नीति. उपभोक्ता केंद्रित रणनीति बनाने में जुटी है सरकारी कंपनी कोल इंडिया
कोयले की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए स्थापित की जा रही 15 कोल वाशरियां
आसनसोल : वर्ष 2020 में कोयले का उत्पादन एक हजार मिलियन टन करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) प्रबंधन ने आगामी पांच वर्षो में 55 हजार करोड़ रुपये के निवेश करने का निर्णय लिया है. देश के घरेलू बाजार में कोयले की बढ़ती मांग को देखते हुए सीआइएल प्रबंधन ने यह महत्वाकांक्षी योजना बनायी है. इस समय कंपनी का वार्षिक उत्पादन 494 मिलियन टन है.
कंपनी सूत्रों ने बताया कि ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्त्रोत होने के कारण देश में कोयले की मांग लगातार बढ़ रही है. देश में इस समय इकलौती सरकारी कंपनी सीआइएल ही कोयले का वाणिज्यिक उत्पादन करती है.
कोयले की बढ़ती मांग और आपूत्तर्ि के बीच के बढ़ते गैप को सामने रखते हुए ही केंद्रीय सरकार ने निजी कंपनियों को कोयले का ब्लॉक आवंटित करने तथा उन्हें वाणिज्यिक उत्पादन करने का आदेश दिया है. इसी बीच कंपनी ने भी अपना वार्षिक उत्पादन दुगुना कर एक हजार मिलियन टन करने का निर्णय लिया है. इसके लिए विभिन्न चरणों में 55 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा.
उन्होंने बताया कि इसके लिए कोयला मंत्रलय ने रोड मैप तैयार किया है. इसके अनुसार ही कार्य को अग्रगति मिल रही है.
चालू वित्तीय वर्ष 2015-16 में छह हजार करोड़ रुपये का निवेश विभिन्न सरकारी कोयला कंपनियों में किया जा रहा है. अगले वित्तीय वर्ष 2016-17 में 8282 करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा. वित्तीय वर्ष 2017-18 में 14,539 करोड़ रुपये , वित्तीय वर्ष 2018-19 में 14,635 करोड़ रुपये तथा अंतिम वित्तीय वर्ष 2019-20 में 13,529 करोड़ रूपये का निवेश किया जायेगा. उन्होंने कहा कि कंपनी के पास आर्थिक संकट नहीं है तथा इस राशि के निवेश के लिए संसाधन उपलब्ध हैं.
कंपनी के पास इस समय 50 हजार करोड़ रुपये का कैश बैलेंस है. इसके साथ ही आगामी हर वित्तीय वर्ष में 10 हजार से 15 हजार करोड़ रुपये तक के लाभ की संभावना है. हालांकि इस समय कोयला उद्योग में वैश्विक वित्तीय संस्थानों ने वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में कटौती शुरू कर दी है. लेकिन सीआइएल ने अपने स्तर से इस निवेश के लिए राशि जुटाने की योजना बनायी है.
उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कंपनी ने कोयले की गुणवत्ता पर भी ध्या न देना शुरू किया है. कंपनी चेयरमैन सुतीर्थ भट्टाचार्या के अनुसार कंपनी का लक्ष्य सिर्फ कोयला बेचना ही नहीं रह गया है, उसे अपना स्थायी बाजार भी विकसित करना है.
इस कारण बोल्डर के रूप में कोयले की आपूत्तर्ि बंद करने का निर्णय लिया गया हैय कोयले के आकार उसकी धुलाई व उसकी ग्रेडिंग को अधिक महत्व दिया जा रहा है. कोयले में राख की मात्र अधिक होने के कारण कोयले की गुणवत्ता बेहतर नहीं हो पाती है. इस कारण कोयले की धुलाई करने का निर्णय लिया गया है.
सीआइएल ने फिलहास 112 मिलियन टन धुलाई क्षमता के लिए 15 कोल वाशरी लगाने की योजना शुरू की है. इनमें से दो इसीएल, तीन बीसीसीएल सहित विभिन्न कोयला कंपनियों में लगायी जा रही हैं. उन्होंने कहा कि उपभोक्ता केंद्रित नीतियां अख्तियार की जा रही हैं.
