कानूनी जंग : इसीएल के पक्ष में आया कोलकाता हाइ कोर्ट का निर्णय

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रूपनारायणपुर : रिफैक्ट्री में छापेमारी के बाद जब्त कोयले के जिम्मेनामा के मामले में कोलकाता उच्च न्यायालय ने इसीएल के सालानपुर क्षेत्रीय प्रबंधन के पक्ष में राय देते हुए स्टे ऑर्डर जारी किया. कंपनी ने आसनसोल के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (एसीजेएम) के उस आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में अपील की थी, […]

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रूपनारायणपुर : रिफैक्ट्री में छापेमारी के बाद जब्त कोयले के जिम्मेनामा के मामले में कोलकाता उच्च न्यायालय ने इसीएल के सालानपुर क्षेत्रीय प्रबंधन के पक्ष में राय देते हुए स्टे ऑर्डर जारी किया. कंपनी ने आसनसोल के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (एसीजेएम) के उस आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में अपील की थी, जिसमें जब्त कोयला का जिम्मानामा करखाना मालिक को देने का आदेश जारी किया गया था.
मामला क्या है
सालानपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ‘जय दादी की रिफैक्ट्री’ में तीन दिसंबर, 2014 की रात को पुलिस और इसीएल के सुरक्षा विभाग ने संयुक्त रुप से छापामारी कर 44 टन कोयला जब्त किया था. थाना में कांड संख्या 228/14 दर्ज हुआ. जब्त कोयला इसीएल प्रबंधन के पास जिम्मानामा के आधार पर जमा हुआ. रिफैक्ट्री के मालिक संजय कुमार पारिख ने 44 टन कोयले का मालिक खुद को बताते हुए उक्त कोयला का जिम्मानामा खुद के पास रखने की अपील आसनसोल महकमा कोर्ट के एसीजेएम के समक्ष किया. एसीजेएम ने श्री पारिख के पक्ष में राय देते हुए जब्त कोयला का जिम्मानामा श्री पारिख को देने का आदेश जारी किया.
इसीएल प्रबंधन ने श्री पारिख को जब्त कोयला नहीं सौंपा. इसके बाद उन्होंने फिर अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि इसीएल प्रबंधन ने कोर्ट के इस आदेश का पालन नहीं किया है.
यह अदालत की अवमानना का मामला है. अदालत ने पुन: इस पर सुनवाई करते हुए कोयले का जिम्मानामा श्री पारिख को देने का आदेश जारी किया. कंपनी ने इस आदेश के खिलाफ अतिरिक्त जिला सेंशन कोर्ट में अपील की. लेकिन उनके समक्ष यह मामला स्वीकार नहीं हुआ. कंपनी ने इसके खिलाफ राज्य सरकार और संजय कुमार पारिख को प्रतिवादी बना कर कोलकाता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की तथा निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाने की अपील की. उच्च न्यायालय ने कंपनी के पक्ष में राय देते हुए आदेश पर स्टे ऑर्डर लागू कर दिया. उच्च न्यायालय के आदेश पर आसनसोल एसीजेएम ने भी अपने आदेश पर रोक लगा दी है.
प्रबंधन सूत्रों ने बताया कि पूर्व में इस प्रकार की छापामारी के बाद अदालत के आदेश पर कोयला कारखाना मालिक को जिम्मानामा पर मिल जाता था. लेकिन कोयला केंद्र सरकार का है और यहां इसीएल इसकी देखभाल करती है. इसलिये कोयला का जिम्मानामा इसीएल का ही होना चाहिए. इससे कोयला चोरी पर अंकुश लगेगा.
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