डीवीसी के रघुनाथपुर प्लांट को बेचने पर लग सकती है मुहर!

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नितुड़िया : दिल्ली में होनेवाली दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) बोर्ड की बैठक में 12 सौ मेगावाट क्षमता वाले निर्माणाधीन रघुनाथपुर पावर प्लांट (प्रथम फेज) को नेशनल थर्मल पपावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) को बेचने पर मुहर लग सकती है़ बताया जाता है कि इसका खाका तैयार कर लिया गया है़ उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार इस बाबत […]

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नितुड़िया : दिल्ली में होनेवाली दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) बोर्ड की बैठक में 12 सौ मेगावाट क्षमता वाले निर्माणाधीन रघुनाथपुर पावर प्लांट (प्रथम फेज) को नेशनल थर्मल पपावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) को बेचने पर मुहर लग सकती है़ बताया जाता है कि इसका खाका तैयार कर लिया गया है़
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार इस बाबत डीवीसी मुख्यालय कोलकाता में छह जून को डीवीसी चेयरमैन की श्रमिक यूनियनों के साथ बैठक हो चुकी है. बैठक में चेयरमैन एडब्ल्यूके लैंगस्टे ने स्पष्ट कर दिया कि डीवीसी के हित में रघुनाथपुर के इस प्लांट को बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है़
उन्होंने प्लांट को बेचने को समय की मांग करार दिया़ बैठक में हालांकि स्टाफ एसोसिएशन के सहायक सचिव तापस कुंडू ने चेयरमैन के प्रस्ताव का जम कर विरोध किया़ उन्होंने कहा कि छह जून की बैठक में चेयरमैन को अपने उस वादे की याद दिलायी जिसमें उन्होंने कहा था कि श्रमिक संघों को भरोसे में लिये बिना डीवीसी के भविष्य का कोई भी फैसला नहीं लेंगे. ऐसे में वह किस बिना पर डीवीसी के रघुनाथपुर इकाई को लेकर यह बात कर रहे हैं? इस पर चेयरमैन ने सफाई दी कि उस वक्त कंपनी के इस मामले की जानकारी नहीं थी. श्री कुंडू ने कहा कि किसी भी हाल में रघुनाथपुर प्लांट को नहीं बेचने दिया जायेगा चाहे यूनियन को इसके लिए कुछ भी क्यों ना करना पडे
पांच जून को डीवीसी कामगार संघ के साथ हुई बैठक में भी चेयरमैन श्री लैंगस्टे ने स्पष्ट कह दिया कि रघुनाथपुर को लेकर पूर्व में जो गलती डीवीसी ने की है, उसका खामियाजा उसे बेच कर ही पूरा किया जा सकता है़ चेयरमैन का कहना था कि प्रथम फेज का काम पूरा भी नहीं हुआ और दूसरे फेज के लिए वर्ल्ड बैंक से 10 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले लिया गया़ दूसरे फेज के लिए जमीन तक अधिगृहित नहीं की गयी. नतीजतन डीवीसी की आर्थिक स्थिति खराब हो गयी़
रघुनाथपुर प्लांट को बेचे जाने के निर्णय को लेकर डीवीसी श्रमिक यूनियन के सचिव जीवन आईच ने चार जून को केंद्रीय ऊर्जा सचिव को पत्र लिखा है़
उन्होंने कहा है कि रघुनाथपुर प्लांट को बेचना डीवीसी के लिए आत्महत्या करने जैसी कोशिश है़ आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए वह झारखंड व पश्चिम बंगाल सरकार के साथ बैठक कर बकाया भुगतान कराये ताकि डीवीसी के प्लांट बेचने की नौबत नहीं आय़े इधर रघुनाथपुर प्लांट को बेचने के खिलाफ विभिन्न यूनियनों के संयुक्त मोरचा ने बीते आठ जून को डीवीसी मुख्यालय कोलकाता में विरोध प्रदर्शन किया. यूनियन नेताओं का कहना है कि किसी भी हाल में प्लांट बेचने का चौतरफा विरोध किया जायेगा़ डीवीसी रघुनाथपुर प्रथम फेज का काम पूरा नहीं कर पाया है. इस प्लांट के निर्माण के लिए लिये गये कर्ज के एवज में उसके ब्याज का भी भुगतान नहीं हो पा रहा है़ फलत: उसका ब्याज लगातार बढ़ता जा रहा है़
उधर, दूसरे फेज के लिए सामान डिमांड भी कर लिया गया था, जिसके लिए भी पैसे की जरूरत है़ इस कारण भी डीवीसी दुविधा में फंस गया है. वह यह नहीं समझ पा रहा है कि दूसरे फेज का काम कराया जाये या नहीं़ अब डीवीसी का भविष्य पूर्णत: केंद्रीय ऊर्जा मंत्रलय के निर्णय पर निर्भर है़ ऊर्जा मंत्रलय के निर्देश के अनुसार ही डीवीसी कोई भी कदम उठायेगा़
डीवीसी की 2400 मेगावाट क्षमता की महत्वाकांक्षी रघुनाथपुर परियोजना दो फेज में पूरी होनी थी़ प्रथम फेज में 1200 मेगावाट के प्लांट का काम 90 प्रतिशत तक तैयार है़ इसके वाटर, ऐश व रेल कॉरिडोर का काम जमीन के अभाव में रुका पड़ा है़ दूसरे फेज का काम अभी शुरू नहीं हो सका है़
तैयार प्लांट की एक नंबर यूनिट की कमिशनिंग भी हो चुकी है़ सूत्रों के अनुसार डीवीसी ने प्लांट बनाने का काम ‘टर्नकी प्रोजेक्ट’ के तहत रिलायंस इंफ्रास्ट्रर को दे रखा है़ 2400 मेगावाट प्लांट के लिए इसकी लागत 12 हजार करोड़ रुपये है, जबकि निर्मित दो यूनिटों में छह हजार करोड़ रुपये का व्यय हो चुका है़
18 मई को कोलकाता में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समक्ष ही एनटीपीसी के सीएमडी अरूप राय चौधरी व डीवीसी के अध्यक्ष एडब्ल्यूके लैंगस्टे के बीच रघुनाथपुर पावर प्लांट को बेचे जाने को लेकर बातचीत हो चुकी है.
इस प्लांट को बनाने की लागत से कम दाम पर बेचने की बातें हुई है़ एनटीपीसी इसका वैल्यू अपने हिसाब से लगा रहा है. उसका कहना है कि इस प्लांट को बनाने में जितनी राशि लगनी चाहिए, उतने का ही वह भुगतान करेगा़ एनटीपीसी के सर्वे के अनुसार प्लांट निर्माण में उतनी राशि लगनी ही नहीं चाहिए, जितनी का दावा डीवीसी कर रहा है़
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