आठ से मृगशिरा नक्षत्र में बारिश

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17 से 16 जुलाई तक अधिक मास होने से खंड वृष्टि का योग 22 से आद्रा नक्षत्र में अच्छी बारिश के हैं आसार आसनसोल : आठ जून को सूर्य रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश कर रहा है. हल्की बारिश से तपिश से राहत मिलेगी. शास्त्र जानकारों के अनुसार 17 जून से 16 जुलाई […]

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17 से 16 जुलाई तक अधिक मास होने से खंड वृष्टि का योग
22 से आद्रा नक्षत्र में अच्छी बारिश के हैं आसार
आसनसोल : आठ जून को सूर्य रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश कर रहा है. हल्की बारिश से तपिश से राहत मिलेगी. शास्त्र जानकारों के अनुसार 17 जून से 16 जुलाई तक अधिक मास होने से खंड वृष्टि का योग बन रहा है.
इससे कहीं वर्षा होगी, तो कहीं नहीं. मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल है, जो वृष राशि में है. साथ ही दक्षिण दिशा मंगल की दिशा मानी गयी है. इससे दक्षिण दिशा में अच्छी बारिश होगी. इसके बाद सूर्य के आद्र्रा नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही 22 जून से अच्छी बारिश होगी.
स्थानीय शनि मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित तुलसी तिवारी ने बताया कि इस वर्ष आद्र्रा नक्षत्र मलमास महीने में पड़ रहा है. 22 जून के बाद अच्छी बारिश के संकेत हैं. चौमासा मतलब बारिश का महीना इस वर्ष मलमास में अच्छी बारिश होगी. साथ ही इस बार मलमास लगने से चौमासा पांच महीने का रहेगा. इसमें आषाढ़ दो महीने का होगा. पहला आषाढ़ तीन जून से दो जुलाई तक रहेगा. दूसरा आषाढ़ तीन जुलाई से 31 जुलाई तक रहेगा.
अधिक मास होने पर खंड वृष्टि का योग होने से है. कहीं ज्यादा, तो कहीं कम बारिश होगी. चौमासा को बारिश का महीना माना गया है. इसमें आषाढ़, सावन,भादो व आसीन महीने को चौमासा कहा गया है. मलमास को पुरुषोत्तम मास के रूप में जाना जाता है. इसे धार्मिक दृष्टि से बेहतर बताया गया है. इसमें दान-पुण्य का विशेष महत्व है.
क्या है मलमास
हिंदू में 12 महीने हैं, लेकिन यह वर्ष करीब 13 महीनों का पड़ रहा है. इसे ही मलमास कहते हैं.यह प्रति तीन वर्ष बाद आता है. पिछली बार यह वर्ष 2012 में था. वर्ष में 12 चंद्रमास लगभग 354 दिन का होता है, जिसमें सूर्य की 12 संक्रांतियां होती हैं. वहीं, एक सौर वर्ष 365 दिन छह घंटे का होता है. सौर वर्ष तथा चंद्र वर्ष में हर वर्ष लगभग 11 दिनों का अंतर होता है. इसलिए तीन चंद्र वर्षो के मध्य एक अधिमास की आवश्यकता पड़ती है. उस स्थिति में चंद्र वर्षो में दिनों की संख्या 384 हो जाती है और सूर्य की संक्रांति नहीं होती है. श्रृंषियों के श्रृंत संवत्सर को नियंत्रित करने के लिए अधिमास बनाया गया है.
शादी-ब्याह पर पांच माह का ब्रेक
15 जून से मलमास के साथ ही मांगलिक कार्यो पर विराम लग जायेगा. 17 जून से 16 जुलाई तक मलमास पड़ रहा है. इसके बाद 20 नवंबर तक मांगलिक कार्य नहीं होंगे. 21 नवंबर को देवोत्थान एकादशी से मांगलिक कार्यो की शुरुआत होगी.
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