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48 घंटे बाद भी रानीपुर इंक्लाइन में सुष्मिता का कुछ पता नहीं चला

Updated at : 05 Jan 2020 12:37 AM (IST)
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48 घंटे बाद भी रानीपुर इंक्लाइन में सुष्मिता का कुछ पता नहीं चला

वर्ष 1987 से बंद इस इंक्लाइन कि गहराई 750 फ़ीट है इसीएल और जिला आपदा प्रबंधन की टीम रही नाकाम, एनडीआरएफ को बुलाया गया लोगों ने मुर्गा भेजकर अपने स्तर से किया प्रयास नितुरिया : शादी के खर्च से पिता की परेशानी को कम करने के लिए इसीएल के परित्यक्त रानीपुर इंक्लाइन में शुक्रवार सुबह […]

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वर्ष 1987 से बंद इस इंक्लाइन कि गहराई 750 फ़ीट है

इसीएल और जिला आपदा प्रबंधन की टीम रही नाकाम, एनडीआरएफ को बुलाया गया
लोगों ने मुर्गा भेजकर अपने स्तर से किया प्रयास
नितुरिया : शादी के खर्च से पिता की परेशानी को कम करने के लिए इसीएल के परित्यक्त रानीपुर इंक्लाइन में शुक्रवार सुबह को छलांग लगाई युवती सुष्मिता गोप का शनिवार शाम तक कुछ पता नहीं चला. इसीएल की रेस्क्यू टीम, जिला की आपदा प्रबंधन की रेस्क्यू टीम द्वारा लगातार अभियान चलाने के बावजूद भी शनिवार तक सुष्मिता का कुछ पता नहीं चल पाया है.
जिला प्रशासन द्वारा एनडीआरएफ की टीम को इस कार्य के लिए बुलाया गया है. स्थानीय लोग भी अपने स्तर से खदान में मुर्गा छोड़कर उसे ढूढ़ने का प्रयास कर रहे है. सनद रहे के नितुरिया थाना क्षेत्र में परित्यक्त रानीपुर इंक्लाइन में शुक्रवार की सुबह सुष्मिता गोप ने छलांग लगा दी. स्थानीय गार्ड ने इसकी पुष्टि की थी कि एक लड़की डोली के मुहाने पर चढ़कर खदान में छलांग लगाई थी.
इधर सुष्मिता के लापता होने पर घरवालों को संदेह है कि वह उन्हीं की लड़की है. सुष्मिता के परिजनों ने बताया कि उसकी शादी सीआईएसएफ जवान से तय हुई थी. मार्च में शादी में होने वाले खर्च को लेकर मानसिक रूप से वह काफी परेशान थी. कुल चार बहनें हैं.
एक की शादी में ही पिता का दिवाला निकल रहा है तो बाकी के बहनों की शादी कैसे होगी. इस बात को लेकर वह अंदर ही अंदर घुट रही थी. पिता को इस परेशानी से मुक्त करने के लिए ही उसने आत्महत्या का रास्ता चुन लिया. इस घटना को लेकर पूरे इलाके के लोग दुखी हैं.
ओसीपी के पास भारी संख्या में लोग जुटे हैं. बचाव टीम के कर्मी सुष्मिता को ओसीपी के गहरे पानी में लगातार तलाश कर रहे है. 48 घंटा बीत जाने के बावजूद भी उन्हें कोई सफलता नहीं मिली है. जिसके कारण जिला प्रशासन ने इस कार्य के लिए एनडीआरएफ टीम को बुलाया है.
सुष्मिता के पिता बिचाली काटने का मशीन चलाकर पूरे परिवार का भरण-पोषण करते हैं. शादी के खर्च को लेकर वे स्थानीय कुछ लोगों से मदद भी मांगी थी. हालांकि अबतक मदद नहीं मिली थी.सुष्मिता स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुकी थी. नर्सिंग की ट्रेनिंग के साथ एनसीसी में सी सर्टिफिकेट पास कर चुकी है.
ईसीएल के रेस्क्यू टीम द्वारा शुक्रवार को कोईसफलता नहीं मिलने पर राज्य सरकार की सिविल डिफेंस रेस्क्यू टीम बुलाया गया. सिविल डिफेंस के लोगों ने बताया कि पानी और गैस से निपटने के लिए उनके पास पर्याप्त साधन नहीं है. स्थानीय लोग भी अपने स्तर से सुष्मिता को निकालने का प्रयास कर रहे हैं. खदान के अंदर रस्सी के सहयोग से जिंदा मुर्गा भेजकर यह जानने की कोशिश की किया जा रहा है कि अंदर कोई जहरीली गैस का रिसाव तो नहीं है.
मुर्गा जिंदा वापस आ जाने पर यह पुष्टि हो गयी कि जहरीली गैस अंदर नहीं है. झग्गा डालकर भी प्रयास किया, लेकिन उसमें भी कोई सफलता नहीं मिली है. इसीएल कोलियरी 1987 से बंद पड़ी है और खदान की गहराई 750 फुट से भी अधिक है. खदान के मुंह से मात्र 35 फुट दूर पर ही पानी है.
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