मॉडल सिटी आसनसोल के वार्ड संख्या 14 में लोग आदिम युग में जीने को मजबूर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :02 Jan 2020 2:40 AM (IST)
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मॉडल सिटी के मानकों के आधार पर छह माह के अंदर हर घर से कचरा उठाने का लक्ष्य निर्धारित. आसनसोल : मई 2019 में राज्य सरकार से मॉडल सिटी का दर्जा प्राप्त कर चुकी आसनसोल नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 14 अंतर्गत उत्तर धदका इलाके में स्थित आमबागान झोपड़पट्टी और बाउरीपाड़ा के लोग प्रशासनिक […]
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मॉडल सिटी के मानकों के आधार पर छह माह के अंदर हर घर से कचरा उठाने का लक्ष्य निर्धारित.
आसनसोल : मई 2019 में राज्य सरकार से मॉडल सिटी का दर्जा प्राप्त कर चुकी आसनसोल नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 14 अंतर्गत उत्तर धदका इलाके में स्थित आमबागान झोपड़पट्टी और बाउरीपाड़ा के लोग प्रशासनिक सफाई व्यवस्था की उदासीनता के कारण आज भी आदिम युग में जीने को मजबूर हैं.
नाली न होने के कारण घर का गंदा पानी गड्ढ़े में संग्रह करते हैं. भर जाने पर गंदे पानी को निकल कर बाहर कहीं भी फेंक देते हैं. कूड़ेदान न होने के कारण जगह-जगह कचड़ा भरा पड़ा है. सफाई कर्मियों का दर्शन इलाके के लोगों के लिए दुर्लभ है. पार्षद नरेंद्र मुर्मू ने स्वीकार किया कि इलाके में सफाई व्यवस्था सुचारू रूप ने नहीं हो पाती है. वार्ड काफी बड़ा है और सफाई कर्मी सिर्फ दस हैं. सीमित संसाधन में बेहतर परिणाम देने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है.
आंखों देखी
वार्ड संख्या 14 अंतर्गत उत्तर धादका के आमबागान झोपड़पट्टी इलाके में सफाई नहीं होने से इलाके में गंदगी की भरमार है. कूड़ेदान नहीं होने से जहां-तहां गंदगी पसरी है. नालियों के न होने से घरों का गंदा पानी लोग अपने घरों के पास ही गड्डा खोदकर जमा करते हैं, भर जाने पर बाल्टी से निकाल कर बाहर फेंक देते हैं. इससे इलाके में संक्रामक रोगों के फैलने का डर हमेशा बना हुआ है. शाम होते ही मच्छरों की भरमार से लोग परेशान हैं. पक्की सड़कें न होने से बरसात में इलाके की स्थिति भयावह हो जाती है. गंदगी के कारण फैली दुर्गंध से बचने के लिए लोग यहां से नाक बंद करके गुजरते हैं. प्रशासनिक उदासीनता के कारण इसी गंदगी के बीच लोग जीवन बसर करने को मजबूर हैं.
आमबागान झोपड़ीपट्टी निवासी आशा पांडे ने कहा कि सफाई कर्मी इलाके में नियमित रूप से नहीं आते हैं. जब भी वे आते हैं उन्हें सफाई को लेकर शिकायत करने पर स्थानीय लोगों से उलझ जाते हैं. एक भी कूड़ेदान नहीं होने से जहां तहां गंदगी पसरी रहती है. बरसात में यहां नरकीय स्थिति बन जाती है.
झोपड़ीपट्टी निवासी सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि सफाई कर्मी मनमाने ढ़ंग से सफाई करते हैं. इलाके में कूड़ेदान नहीं होने से लोग कहीं भी कूड़ा फेंक देते है, जिससे एक दूसरे के बीच विवाद यहां आम बात है. पार्षद नरेंद्र मुर्मू इलाके में सफाई व अन्य व्यवस्थाओं का मुआयना करने नहीं आते हैं. लोगों के घरों में शौचालय का निर्माण नहीं करवाया गया. जिससे लोग खुले में शौच करने को विवश हैं.
बाउरीपाड़ा निवासी टूंपा बाद्यकर ने कहा कि घरों के गंदगी की निकासी के लिए नाली की व्यवस्था नहीं होने से घरों का गंदा पानी घर के पास ही गड्डा खोद कर जमा करने को बाध्य हैं. यह भर जाने पर यहां से पानी को निकाल कर बाहर फेंक दिया जाता है. सफाई को लेकर इलाके में सुध लेने वाला कोई नहीं है. गंदगी की भरमार से संक्रामक रोगों के खतरा बना रहता है. सफाई कर्मी नियमित रूप से सफाई करने नहीं आते हैं.
झोपड़पट्टी निवासी रामदुलारी कुशवाहा ने कहा कि महीने दो महीने में सफाई कर्मी एक बार ब्लिचिंग पावडर का छिड़काव करते हैं. पार्षद इलाके का मुआयना करने नहीं आते हैं. कूड़ेदान और नाली नहीं होने से इलाके में गंदगी की भरमार है. शाम होते ही मच्छरों का आतंक से लोग परेशान हो जाते हैं.
झोपड़पट्टी निवासी सूरज कुमार ने कहा कि इलाके में फॉगिंग मशीन का उपयोग नहीं होता है. कीटनाशक और ब्लीचिंग पावडर का छिड़काव भी नहीं किया जाता है. अधिकांश घरों में शौचालय नहीं है, इलाके में सामूहिक शौचालय का निर्माण नहीं होने से लोग नदी किनारे खुले में शौच को विवश हैं. यहां महिलाओं को कठिन समस्या का सामना करना पड़ता है. पार्षद इन समस्याओं के समाधान को लेकर कोई प्रयास नहीं करते हैं.
झोपड़पट्टी निवासी सुशीला देवी ने कहा कि इलाके में जहां जरूरत थी वहां नाली न बनाकर विपरित दिशा में नाली बना देने से लोग परेशान हैं. घरों से निकलने वाली पानी को मुख्य नाली से जोड़ने को लेकर कोई पहल नहीं की गयी. जिसे लेकर लोगों में आक्रोश है. सफाई कर्मी बहुत दिनों बाद आते हैं. इलाके में सफाई नहीं करते हैं, सिर्फ मुख्य सड़क की सफाई कर बाहर से ही चले जाते हैं. फॉगिंग मशीन का उपयोग होते नहीं देखा. कीटनाशक और ब्लीचिंग पावडर का छिड़काव नहीं किया जाता है.
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