कामगारों की कमी से जूझ रही है कोल इंडिया

सांकतोड़िया : कोल इंडिया कामगारों की कमी से जूझ रही है. आने वाले समय में इनकी संख्या और कम हो जाएगी. वित्तीय वर्ष 2018-19 में 552 श्रमिकों को कोल इंडिया ने विभिन्न कारणों से बर्खास्त किया है. फिलहाल कंपनी में युवा कर्मियों की संख्या दस फीसदी से भी कम है. ऐसे में कोल इंडिया ने […]
सांकतोड़िया : कोल इंडिया कामगारों की कमी से जूझ रही है. आने वाले समय में इनकी संख्या और कम हो जाएगी. वित्तीय वर्ष 2018-19 में 552 श्रमिकों को कोल इंडिया ने विभिन्न कारणों से बर्खास्त किया है. फिलहाल कंपनी में युवा कर्मियों की संख्या दस फीसदी से भी कम है. ऐसे में कोल इंडिया ने एक हजार मिलियन टन लक्ष्य हासिल करने का मिशन-2020 की समय सीमा को अब बढ़ाकर मिशन-2026 कर दिया है.
ईसीएल के सूत्रों ने बताया कि कोल इंडिया ने जो रिपोर्ट तैयार की है उसमें साफ है कि 63428 कर्मी अगले तीन साल में सेवानिवृत्त हो जाएंगे. कोल इंडिया की कुल श्रम शक्ति अभी 285479 है, इसमें 25 साल उम्र के 6463 कर्मी है, 61649 कर्मियों की संख्या 51 से 55 साल के बीच है.
बीसीसीएल में अगले तीन साल में 8809 तो ईसीएल में 10540 कर्मी सेवानिवृत्त होंगे. एक साल में 2216 कर्मियों की मौत : कोल इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 2018-19 के दौरान पूरे कोल इंडिया में 2216 कर्मियों की मौत हुई है, इसमें ईसीएल के 358, बीसीसीएल के 358, सीसीएल रांची के 362 तो सीएमपीडीआईएल के 18 कर्मी शामिल हैं. यह रिपोर्ट कोयला मंत्रालय को भेजी गई है.
उन्होंने कहा कि कोल इंडिया ने गत वित्तीय वर्ष में 552 कर्मियों को विभिन्न कारणों से बर्खास्त किया है, इनमें ईसीएल के 156 बीसीसीएल के 38, सीसीएल के 33, डब्ल्यूसीएल के 160, एसईसीएल के 123, एमसीएल के 33, सीएमपीडीआईएल के पांच कर्मी शामिल हैं. कोल इंडिया ने एक साल के दौरान 6842 लोगों को नौकरी दी है, इसमें बीसीसीएल में 672, ईसीएल में 1429, सीसीएल में 712, डब्ल्यूसीएल में 1007 और एसईसीएल में 919 लोगों को काम दिया गया है.
कोल इंडिया ने जमीन अधिग्रहण के मद में 1929, आश्रितों के मद में 2303, नई नियुक्तियां 1214, पुन: नियुक्तियां 600 लोगों को दी हैं, इसमें ईसीएल में जमीन अधिग्रहण में 412, बीसीसीएल में 8 व सीसीएल ने 73 लोगों को नियुक्ति दिया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से कोल इंडिया कामगारों की कमी से जूझ रही है, उससे आनेवाले दिनों में उत्पादन लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो जायेगा. यदि कोयला उत्पादन पूरा नहीं होगा तो पॉवर सेक्टर पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.
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