हड़ताल के बाद प्राकृतिक आपदा से लक्ष्य हुआ और दूर

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सांकतोड़िया. पिछले चार दिनों से लगातार हो रही बारिश का सीधा असर ईसीएल के लगभग सभी क्षेत्रों पर पड़ा है. स्थिति यह है कि कंपनी प्रतिदिन लक्ष्य का 30 प्रतिशत उत्पादन भी नहीं कर पा रही है. उत्पादन प्रभावित होने से कंपनी अपने लक्ष्य से पीछे चली गई है. उत्पादन में भारी गिरावट होने के […]

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सांकतोड़िया. पिछले चार दिनों से लगातार हो रही बारिश का सीधा असर ईसीएल के लगभग सभी क्षेत्रों पर पड़ा है. स्थिति यह है कि कंपनी प्रतिदिन लक्ष्य का 30 प्रतिशत उत्पादन भी नहीं कर पा रही है. उत्पादन प्रभावित होने से कंपनी अपने लक्ष्य से पीछे चली गई है. उत्पादन में भारी गिरावट होने के कारण प्रबंधन काफी चिंतित हैं. सीएमडी के तकनीकी सचिव नीलाद्रि राय ने कहा कि यूनियनों की एकदिवसीय हड़ताल से कोयला उत्पादन पर बुरा असर पड़ा था.
उसके बाद चार दिनों से लगातार हों रही बारिश से उत्पादन पूरी तरह से चरमरा गया है. सबसे ज्यादा प्रभावित खुली खदानें यथा – राजमहल, सोनपुर बाजारी एवं एसपी माइंस की खदानें हुई है. बारिश में लगभग ढाई लाख टन कोयला का उत्पादन प्रभावित हुआ है.
इसके साथ ही कोयला डिस्पैच भी उतना ही प्रभावित हुआ है.उन्होनें कहा कि राजमहल परियोजना से सिर्फ एनटीपीसी प्लांट को कोयला सप्लाई किया जाता है. उत्पादन तथा डिस्पैच प्रभावित होने से एनटीपीसी प्लांट को कोयला उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. कोयला उपलब्ध नहीं होने के कारण उसका भी संकट बढ़ने लगा है.
उन्होनें कहा कि अभी राजमहल परियोजना से प्रतिदिन लगभग 45 हजार टन कोयला का उत्पादन हो रहा है. वर्षा के कारण उत्पादन घटकर बारह हजार टन रोजाना पर आ गया है. उन्होनें कहा कि बारिश के कारण बड़े वाहनों को खदान में उतारने में परेशानी हो रही है. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारी वाहनों को खदान में उतारने पर रोक लगा दी गयी है.
सूत्रों ने बताया कि लगातार हो रही बारिश से भूमिगत खदानों में भी जलस्तर काफी तेजी से बढ़ रहा है. खदानों में काम कर रहे कर्मियों में भय व्याप्त है. कोयला कर्मियों का कहना है कि कई खदानों के आसपास छोटे-छोटे नाले तथा नदियां बहती है.
लगातार बारिश होने के कारण सभी नदियां एवं नाले उफान पर है. उनका भी जल खदानों में प्रवेश कर रहा है. इसके साथ ही कई इलाकों में अवैध खनन किया जा रहा है. वर्षा का पानी उस खदान के रास्ते से भी खदानों में पानी प्रवेश करने के कारण जलस्तर में वृद्धि हो रही है.
जलस्तर लगातार बढ़ने से चासनाला खदान दुर्घटना की याद ताजा होने लगी है. प्रबंधन ने कहा कि भूमिगत खदानें सभी सुरक्षित है. खदानों पर पैनी नजर है. भूमिगत खदानों में पानी भरने की आशंका को देखते हुए सभी एरिया प्रबंधन को हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. खासकर नदी व जोड़िया के किनारे स्थित खदानों पर विशेष चौकसी व सतर्कताबरती जा रही है.
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