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राख की उपयोगिता को लेकर एमटीपीएस डीवीसी की कार्यशाला

Updated at : 08 Jun 2019 5:22 AM (IST)
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राख की उपयोगिता को लेकर एमटीपीएस डीवीसी की कार्यशाला

बांकुड़ा : राख की उपयोगिता को लेकर दुर्लभपुर स्थित मेजिया थर्मल पावर स्टेशन, दामोदर घाटी निगम ने एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन आडिटोरियम में हुआ. सेमिनार का उद्घाटन बांकुड़ा जिला परिषद के सभाधिपति मृत्युंजय मुर्मु ने किया. इस मौके पर मुख्य अभियंता सह परियोजना अधिकारी चंद्रशेखर त्रिपाठी, मुख्य अभियंता (कॉमन सर्विस) प्रदीप सिकदर, कार्यकारी निदेशक […]

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बांकुड़ा : राख की उपयोगिता को लेकर दुर्लभपुर स्थित मेजिया थर्मल पावर स्टेशन, दामोदर घाटी निगम ने एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन आडिटोरियम में हुआ. सेमिनार का उद्घाटन बांकुड़ा जिला परिषद के सभाधिपति मृत्युंजय मुर्मु ने किया. इस मौके पर मुख्य अभियंता सह परियोजना अधिकारी चंद्रशेखर त्रिपाठी, मुख्य अभियंता (कॉमन सर्विस) प्रदीप सिकदर, कार्यकारी निदेशक (परियोजना) देबाशीष घोष, अधिकारी अमिताभ राय चौधरी एवं दामोदर घाटी निगम के गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे.

सेमिनार का मुख्य उद्देश्य है कि सुखी राख का उपयोग ईंट के निर्माण से लेकर टाइल्स एवं सड़को के निर्माण तक किया जा सकता है. इसके लिए दामोदर घाटी निगम एमटीपीएस की तरफ से ईंट एवं टायल्स हेतु सुखी राख का निःशुल्क वितरण एवं सीमेंट कम्पनियों को उचित कीमत पर राख बेचना शामिल है. ऐसा ही ब्यौरा शुक्रवार को सेमिनार के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने बताया.
इस मौके पर एमटीपीएस डीवीसी के मुख्य अभियंता एवं परियोजना प्रधान चंद्रशेखर त्रिपाठी ने बताया कि नि:शुल्क रूप से ईंट एवं टायल्स निर्माण हेतु राख दिया जाता है एवं सीमेंट कंपनियों को 120 रुपये प्रति मिट्रिक टन के हिसाब से राख दे रहे है. निःशुल्क रूप में ईंट एवं टायल्स हेतू राख प्रदान करने के चलते स्व रोजगार बढ़ेगा.
इसके लिये जन जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है साथ ही राख के माध्यम से पचास किमी इलाके तक नीची जमीन की भराई भी की जा रही है जहां यातायात का खर्च डीवीसी खुद दे रही है. राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी राख का इस्तेमाल हो रहा है जिसे हम उपलब्ध करा रहे है. वही सीमेंट कंपनियों को 120 रुपये प्रति मैट्रिक टन राख दिए जाने के सवाल पर परियोजना अधिकारी श्री त्रिपाठी ने बताया कि लाफार्ज सीमेंट से 12000 टन राख देने का समझौता हुआ है जबकि स्टार सीमेंट के साथ भी सहमति बनी है. इसके अलावा उत्तर भारत इलाके में राख की खूब मांग है.
इसके चलते हर महीने रेलवे के माध्यम से छह रैक माल बाहर जाता है जिसे दस रैक तक बढ़ाने का प्रावधान है एवं कोशिश की जा रही है. पिछले वर्ष उत्पादन का 78 प्रतिशत उपयोग में लाया गया है जबकि बाकी राख तालाब में है. सुखी राख के लिए और भी जमीन की जरूरत है जहा राख को डाल कर नीची जमीन को भराई कर सके. वही मुख्य अभियंता कॉमन सर्विस प्रदीप सिकदर का कहना कि राख का इस्तेमाल सड़क निर्माण में बहुत उपयोगी है. इसका इस्तेमाल पहले की तुलना में बढ़ा है.
वहीं जिला सभाधिपति मृत्युंजय मुर्मु का कहना कि जिले के विभिन्न हिस्सों में बन रही सडकों पर राख का इस्तेमाल होना चाहिए. परियोजना के एक्जिक्यूटीव डायरेक्टर देबाशीष घोष जिले के सड़कों पर अगर राख का प्रयोग किया जाये तो उपयोगी होगा. ईंट के निर्माण में राख के इस्तेमाल हेतु ग्रामवासियों को जागरूक किया जा रहा है. सहायक प्रबंधक लॉजिस्टिक का सीमेंट मनाज पुरोहित ने बताया कि हमारी कंपनी लंबे समय से कार्य कर रही है और आगे भी जारी रहेगा.
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