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चिलचिलाती धूप और झुलसाने वाली गर्मी से बिगड़ रही है बच्चों की सेहत

•तेज धूप और गर्म हवा से स्कूली बच्चों के चेहरे लगे मुरझाने •डिहाइड्रेशन और संक्रमण का शिकार हो रहे हैं बच्चे दुर्गापुर : मई के दूसरे सप्ताह में चिलचिलाती धूप और झुलसाने वाली गर्मी से आम लोगों के साथ ही बच्चें भी परेशान हैं. भीषण गर्मी और तेज धूप में घर लौटना उनके लिए पहाड़ […]

•तेज धूप और गर्म हवा से स्कूली बच्चों के चेहरे लगे मुरझाने

•डिहाइड्रेशन और संक्रमण का शिकार हो रहे हैं बच्चे
दुर्गापुर : मई के दूसरे सप्ताह में चिलचिलाती धूप और झुलसाने वाली गर्मी से आम लोगों के साथ ही बच्चें भी परेशान हैं. भीषण गर्मी और तेज धूप में घर लौटना उनके लिए पहाड़ चढ़ने के बराबर है. स्कूलों से दोपहर में लौटते समय बच्चे गर्मी की वजह से परेशान होने लगे हैं. शिल्पांचाल में दोपहर का तापमान 40 डिग्री से अधिक होने लगा है. दोपहर 11 बजे से ही तेज धूप और गर्म हवा से बच्चों के चेहरे मुरझाने लगे हैं.
गर्मी को देखते हुए सरकारी स्कूलों में दो माह का अवकाश दे दिया गया है. वहीं शहर के अधिकांश निजी स्कूल अभी भी खुले हुए हैं. कुछ स्कूलो ने अपने समय में परिवर्तन किया है. स्कूल सुबह जल्दी खुलने और बंद होने के बावजूद बच्चें गर्मी से परेशान हो रहे हैं. स्कूल आने जाने में उन्हें काफी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है. अस्पतालों में काफी संख्या में पहुंच रहे हैं बीमार बच्चे. तपती दोपहर में स्कूल से निकलने पर बच्चे लू और हीट स्ट्रोक की चपेट में आ रहे हैं.
कारण, तेज धूप से घर पहुंचने पर ठंडा पानी पीकर बच्चे सर्द-गर्म का भी शिकार हो रहे हैं.पिछले 10 दिनों के दौरान ही बच्चों में इस तरह की बीमारियां तेजी से बढ़ी हैं. महज सरकारी अस्पतालों में ही रोजाना काफी संख्या मे बच्चे उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन और सर्दी जुकाम से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं. चिकित्सकों का कहना है कि बढ़ती गर्मी बच्चों की सेहत बिगाड़ रही है, ऐसे में स्कूलों को अवकाश देने पर विचार करना चाहिए. सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में भी इन बीमारियों से पीड़ित बच्चों के पहुंचने का आंकड़ा बढ़ा है.
क्यों पड़ रहे हैं बच्चे बीमार
डॉक्टर बताते हैं कि बच्चे दोपहर में स्कूल से निकलते हैं, उस समय धूप तेज होती है. ऐसे में बच्चों को हीट स्ट्रोक का खतरा रहता है. इसके अलावा लगभग आधा घंटा तेज धूप में रहने के कारण बच्चों को तेज प्यास लगती है और वह घर जाकर ठंडा पानी पी लेते हैं. इससे बच्चों को सर्द-गर्म होकर सर्दी-जुकाम या संक्रमण से परेशानी होती है. इसके अलावा बच्चे अक्सर स्कूल से निकलने के बाद बाहर ठेलियों पर बिकने वाली कुल्फी, बर्फ का गोला और अन्य चीजें खा लेते हैं. इससे भी बच्चों में इंफैक्शन होता है.
क्या कहते हैं अभिभावक
अभिभावक अशोक कुमार, विजय अग्रवाल, संदीप सिंह का कहना है की स्कूलो में अनिवार्य 70 फीसदी उपस्थिति को पूरा करना और स्कूल के सिलेब्स को फॉलो करने के लिए स्कूल जाना आवश्यक होता है. हालांकि बच्चों को पूरी तैयारी के साथ स्कूल भेजा जाता है. उसके बाद भी बच्चे बीमार पड़ रहे है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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