कोयला उद्योग में एकजुट आंदोलन जरूरी
Updated at : 23 Feb 2019 1:46 AM (IST)
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आउटसोर्सिंग, ठेका मजदूरों को भी मिलनी चाहिए जरूरी सुविधाएं बीएमएस नेता डॉ बीके राय ने कर्मियों के लिए दिये कई टिप्स सांकतोड़िया : भारतीय मजदूर संघ (कोल एवं नन कोल) प्रभारी सह जेबीसीसीआइ सदस्य डॉ बसंत कुमार राय ने कहा कि कोयला उद्योग में काफी चुनौती है. नई आर्थिक नीति एवं टेक्नोलॉजी बढ़ने से उत्पादन […]
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आउटसोर्सिंग, ठेका मजदूरों को भी मिलनी चाहिए जरूरी सुविधाएं
बीएमएस नेता डॉ बीके राय ने कर्मियों के लिए दिये कई टिप्स
सांकतोड़िया : भारतीय मजदूर संघ (कोल एवं नन कोल) प्रभारी सह जेबीसीसीआइ सदस्य डॉ बसंत कुमार राय ने कहा कि कोयला उद्योग में काफी चुनौती है. नई आर्थिक नीति एवं टेक्नोलॉजी बढ़ने से उत्पादन बढ़ा, पर मजदूरों की स्थिति जस की तस बनी हुई है. उन्होंने कहा कि कोयला मजदूरों के समक्ष अभी भी चुनौतियां खड़ी हुई है. इसके लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा.
डॉ राय ने कहा कि आंदोलन में आउटसोर्सिंग एवं ठेका मजदूरों को भी एकजुट कर जोड़ना होगा. अप्रैल माह में होने वाली बैठक में सभी 252 पब्लिक सेक्टर के पदाधिकारी बैठक कर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेंगे. उन्होंने कहा कि विनिवेश, बाईबैक शेयर परचेसमेंट व घाटा वाली खदान बंद करने का मसला कोयला उद्योग से जुड़ा हुआ है.
बीएमएस प्रयोगशाला है और हर क्षण-हर पल प्रयोग करते हैं. कर्मचारी है और कर्म पर विश्वास करते हैं, इसलिए कार्यकर्ता को लाभ-हानि की चिंता किए बगैर काम करना चाहिए. बीएमएस कार्यकर्ताओं को चुनौती स्वीकार कर कार्य करना होगा.
उन्होंने कहा कि नई कार्यकारिणी को तीन वर्ष के भीतर आदर्श यूनियन के रूप में खड़ा होना होगा. संगठन को मजबूत करने के लिए विचारधारा वाले लोगों को जोड़ना होगा.
ठेका मजदूरों को साथ लेकर चलना होगा, तभी सफलता मिलेगी. उन्होंने कहा की कोई भी कार्यक्रम में चंदा नहीं अपने बल व ताकत पर करें. वर्तमान परिवेश में कोई भी कार्यक्रम करने के लिए चंदा वसूली की जाती है, वह चाहे ठेकेदार से हो या फिर अफसरों से, कार्यकर्ताओं को इससे बचना होगा. कोयला सेक्टर में बीएमएस को आदर्श यूनियन के रूप में खड़ा कर नई पहचान बनाने की जरूरत है.
डॉ राय ने कहा कि बीएमएस में भी पदाधिकारी बनने की हो़ड़ मची रहती है, इसके लिए चाटुकारिता व धनबल का रास्ता अपनाया जाता है. इससे कार्यकर्ताओं को बचना चाहिए. पारिवारिक भाव बनाते हुए काम करना चाहिए. दुर्भाग्य की बात है कि तीन साल में खदान में कार्यरत ठेका मजदूर के डाटा तक एकत्र नहीं कर पाये हैं. विनिवेश, कॅमर्शियल माइनिंग की समस्या अभी भी बनी हुई है. ठेका मजदूरों को निर्धारित वेतनमान एवं सुविधा दिलाने सतत प्रयासहोना चाहिए.
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