तृणमूल सरकार को राहत
Updated at : 24 Aug 2018 11:49 PM (IST)
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नयी दिल्ली/कोलकाता : पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों के निर्विरोध जीत वाले मामले में सत्तारूढ़ दल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. पंचायत चुनाव में 20 हजार से ज्यादा सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार निर्विरोध चुनाव जीत गये थे. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया और स्पष्ट कर दिया […]
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नयी दिल्ली/कोलकाता : पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों के निर्विरोध जीत वाले मामले में सत्तारूढ़ दल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. पंचायत चुनाव में 20 हजार से ज्यादा सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार निर्विरोध चुनाव जीत गये थे.
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया और स्पष्ट कर दिया कि निर्विरोध जीतीं गयी सीटों पर दोबारा पंचायत चुनाव नहीं होंगे. पंचायत चुनाव में जिन सीटों पर सिर्फ एक प्रत्याशी था, वहां के नतीजे घोषित किये जाने के आदेश दिये गये. चुनाव परिणाम से जो असंतुष्ट हैं, वे 30 दिनों के भीतर संबंधित कोर्ट के समक्ष अपनी याचिका दायर कर सकते हैं.
पिछली सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने संकेत दिया था कि अदालत जांच करेगी कि क्या बिना विरोध चुनाव होना चुनाव की निष्पक्षता को नष्ट करता है या नहीं.
उस दौरान तृणमूल कांग्रेस सरकार की ओर से दोबारा चुनाव कराने का विरोध किया गया था. कथित तौर पर माकपा और भाजपा की ओर से तर्क दिया गया था कि उनके उम्मीदवारों पर हमले किये गये और नामांकन दाखिल करने से रोका गया. तथ्य दिये गये थे कि 20,000 से अधिक तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों को विजेता घोषित करने की मांग की जा रही है, जो विपक्षी दलों के लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करता है.
इधर, पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग भी दोबारा चुनाव कराने के पक्ष में नहीं दिखा. ग्राम पंचायतों की 48,650 सीटों, जिला परिषदों की 825 सीटों और पंचायत समितियों की 9,217 सीटों के लिए चुनाव हुए थे. विपक्षी दलों की ओर से आरोप लगाये गये थे कि उनके उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने नहीं दिये गये और करीब 34 प्रतिशत सीटों पर सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार बिना विरोध के जीत गये. ग्राम पंचायत, जिला परिषद और पंचायत समिति के लिए कुल 58,692 सीटों में से 20,158 पर तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार निर्विरोध जीते थे.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाइकोर्ट के इमेल से नामांकन दाखिल करने के आदेश को रद्द कर दिया था. कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि इमेल या व्हाट्स एप से नामांकन दाखिल नहीं किया जा सकता है, क्योंकि ये कानून में नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने उन उम्मीदवारों के नाम गजट में घोषित नहीं करने का निर्देश दिया था.
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