फूलों का होली महोत्सव मनाया गया यज्ञस्थल पर धूमधाम से
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 May 2018 4:05 AM
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आसनसोल : कन्यापुर हाई स्कूल के निकट ज्योति जिम के समक्ष दस दिवसीय श्रीमदभागवत सप्ताह ज्ञान भक्ति महायज्ञ के आठवें दिन मंगलवार को श्रीधामवृंदावन के आचार्य मृदूलकृष्ण गोस्वामी ने सुदामा चरित्र का वर्णन किया.आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में कितना भी धन ऐश्वर्य और संपन्नता हो लेकिन यदि मनुष्य के मन में शांति नहीं […]
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आसनसोल : कन्यापुर हाई स्कूल के निकट ज्योति जिम के समक्ष दस दिवसीय श्रीमदभागवत सप्ताह ज्ञान भक्ति महायज्ञ के आठवें दिन मंगलवार को श्रीधामवृंदावन के आचार्य मृदूलकृष्ण गोस्वामी ने सुदामा चरित्र का वर्णन किया.आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में कितना भी धन ऐश्वर्य और संपन्नता हो लेकिन यदि मनुष्य के मन में शांति नहीं है
तो वह मनुष्य कभी भी सुखी नहीं हो सकता है. वहीं जिसके पास धन की कमी भले ही हो सुख सुविधाओं की कमी हो परंतु उसका मन यदि शांत है तो वह व्यक्ति वास्तव में परम सुखी है. वह हमेशा मानसिक असंतुलन से दूर रहेगा.
कथा प्रसंग में परम भक्त सुदामा चरित्र पर प्रकाश डालते हुए आचार्य श्री ने कहा कि सुदामा के जीवन में धन की कमी थी, निर्धनता थी लेकिन वह स्वंय शांत ही नहीं परम शांत थे. इस लिए सुदामा हमेशा सुखी जीवन यापनकर रहे थे. क्योंकि उनके पास ब्रहम प्रभुनाम रूपी धन था. धन की तो उनके जीवन में न्यूनता थी परंतु नाम धन की पूर्णता थी. हमेशा भाव से ओत प्रोत होकर प्रभु नाम में लीन रहते थे. उनके घर में वस्त्र आभूषण तो दूर अन्न का एक कण भी नहीं था. जिसे लेकर वो प्रभु श्री द्वारिकाधीश के पास जा सकें. परंतु सुदामा की धर्म पत्नी सुशीला के मन में इच्छा थी.
मन में बहुत बडी भावना थी कि पति भगवान श्री द्वारिकाधीश के पास खाली हाथ न जायें. सुशीला चार घर गईं और चार मुटठी चावल मांग कर लायी और चार मुटठी चावल को लेकर सुदामा प्रभुश्री द्वारिकाधीश के पास गये. प्रभु ने उन चावलों का भोग बडे ही भाव के साथ लगाया. उन भाव भक्ति चावलों का भोग लगाकर प्रभु ने यही कहा कि भक्त भाव से पत्र, पुष्प, फल अथवा जल ही अर्पण करता है, तो वे उसे बड़े ही आदर के साथ स्वीकार करता हैं.
प्रभु ने चावल ग्रहण कर श्री सुदामा जी को अपार संपत्ति प्रदान कर दी. आचार्य श्री ने इस पावन सुदामा प्रसंग पर सारे तत्व बताते हुए समझाया कि व्यक्ति अपना समझे और विश्वास करे कि वे संसारके सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं तो वह इमेशा कार्यशील बना रहेगा. क्योंकि समाज में सम्मान अमीरी से नहीं इमानदारी और सज्जनता से प्राप्त होता है.
मंगलवार को विशेष महोत्सव के रूप में फुल होली महोत्सव बडे ही धूमधाम से मनायी गयी. जिसमें आचार्य श्री द्वारा होली खेल रहे बांके बिहारी को देख छटा मेरो मन है, गया लटा पटा आदि भजनों को बडे ही भाव के साथ गुन गुनाया गया. जिससे हजारों की संख्या में उपस्थित श्रोताओं ने फुल होली महोत्सव का आनंद लिया और कथा प्रांगण स्थल श्री राधा कृष्णमय हो गया.
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