तृणमूल कांग्रेस के शासन में भ्रष्टाचार बेकाबू:नजरूल
कोलकाता: पिछले महीने ही पुलिस सेवा से रिटायर हुए पूर्व आइपीएस डॉ नजरूल इसलाम ने सोमवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासन काल में भ्रष्टाचार बेकाबू हो गया है. प्रेस क्लब में अपनी किताबों के विमोचन कार्यक्रम के दौरान मीडिया से मुखातिब डॉ इसलाम ने सवालों के जवाब में कहा […]
कोलकाता: पिछले महीने ही पुलिस सेवा से रिटायर हुए पूर्व आइपीएस डॉ नजरूल इसलाम ने सोमवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासन काल में भ्रष्टाचार बेकाबू हो गया है. प्रेस क्लब में अपनी किताबों के विमोचन कार्यक्रम के दौरान मीडिया से मुखातिब डॉ इसलाम ने सवालों के जवाब में कहा कि वाममोरचा के अंदर एक संगठित ढांचा था, इसलिए वहां भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक नियंत्रण था, पर तृणमूल के राज में भ्रष्टाचार बेकाबू हो गया है.
इस पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है. कभी तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के साथ अच्छे रिश्ते के लिए जाने जाने वाले नजरूल इसलाम ने किसी का नाम लिये बिना कहा कि उन्हें (नजरूल) जरिया बना कर धन वसूली की कोशिश की गयी थी.
वर्षो तक वाममोरचा सरकार के फैसलों के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले डॉ इसलाम को एक समय ममता बनर्जी का करीबी माना जाता था. ममता बनर्जी तब केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थीं. वह उन्हें अपने साथ दिल्ली ले गयी थीं और उन्हें आरपीएफ में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (कार्यकारी निदेशक) के पद पर तैनात किया था. उस समय की एक घटना का जिक्र करते हुए डॉ इसलाम ने कहा कि उन्हें एक व्यक्ति के खिलाफ जांच कर उसके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए कहा गया था. उन्होंने वैसा ही किया, पर बाद में पता चला कि उस व्यक्ति को रुपये ले कर छोड़ दिया गया. उसके बाद ही वह (नजरूल) दिल्ली से बंगाल लौट आये. यहां भी उन्हें एक कम महत्व वाले पद पर तैनात किया गया. जिसके खिलाफ उन्होंने मामला दायर किया था, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. डॉ इसलाम ने बताया कि अदालत के फैसले की कॉपी अभी तक उन्हें नहीं मिली है. पर उन्होंने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला कर लिया है.
किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की संभावना को खारिज करते हुए पूर्व आइपीएस ने कहा कि फिलहाल उनका लक्ष्य राज्य के दबे, कुचले व पिछड़े लोगों को एकत्रित, शिक्षित व जागरूक करना है. उसके बाद अगर लोगों को सही लगा तो राजनीतिक दल का गठन करने पर विचार करेंगे. माकपा से बहिष्कृत अब्दुल रज्जाक मोल्ला के सामाजिक न्याय मंच के बारे में पूछे जाने पर डॉ इसलाम ने कहा कि श्री मोल्ला जो बातें आज कर रहे हैं, वह सात वर्ष पहले उन बातों को रख चुके हैं. हकीकत में पूर्व माकपा नेता उन्हीं की बातों को दोहरा रहे हैं. वह आगामी दस मार्च को श्री मोल्ला के साथ भेंट करने वाले हैं. डॉ इसलाम ने यह भी इलजाम लगाया कि उनकी पुस्तक को बाजार में आने से रोकने के लिए प्रकाशक की दुकान पर ताला लगवा दिया गया. खुद उन्हें फोन पर मारने-पीटने की धमकी तक दी गयी, पर वह किसी भी धमकी से डरने वाले नहीं है. इस अवसर पर डॉ नजरूल इसलाम द्वारा लिखी गयी तीन किताबें ‘मूल निवासी इश्तेहार’, ‘उलंगिनी रानी’ एवं ‘भांवतादीर भांड समूह’ का विमोचन किया गया. उलंगिनी रानी एक काव्य संकलन है. डॉ इसलाम ने कहा कि इन किताबों को पढ़ने के बाद ही इसके किरदार के बारे में सब कुछ सामने आ जायेगा.
तृणमूल से हाथ नहीं मिलायेंगे
नजरूल इसलाम ने कहा कि सभी शासक दल चाहते हैं कि सरकारी कर्मचारी उनकी बातों के अनुसार चलें, पर वह यह भूल जाते हैं कि हम लोग सरकारी कर्मचारी हैं, किसी का निजी दास नहीं है. डॉ इसलाम ने कहा कि वह कभी भी तृणमूल कांग्रेस के साथ हाथ नहीं मिलायेंगे और न ही तृणमूल में इतना दम है कि वह उन्हें यह प्रस्ताव दे. उन्होंने कहा कि उनकी (नजरूल) किताबों को लेकर उन्हें फोन पर धमकी दी गयी थी.
वाममोरचा के अंदर एक संगठित ढांचा था, इसलिए वहां भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक नियंत्रण था, पर तृणमूल कांग्रेस के राज में भ्रष्टाचार बेकाबू हो गया है. इस पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है.
नजरूल इसलाम, पूर्व आइपीएस अधिकारी
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