केएलओ समेत तीन उग्रवादी संगठनों के फरमान का पलटा जवाब

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Jan 2017 7:40 AM

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सिलीगुड़ी/जलपाइगुड़ी. प्रतिबंधित तीन उग्रवादी संगठन केएलओ, एनएलएफटी व पीडीसीके द्वारा इसी वर्ष 31 मार्च तक हिंदी और बांग्ला भाषियों को उत्तर बंगाल के कूचबिहार के अलावा असम व त्रिपुरा छोड़ने के फरमान का पलटा जवाब देते हुए बंगाली जनमुक्ति वाहिनी (नेशनल लिबरेशन फोर्स ऑफ बंगाली) नामक संगठन ने भी पलटा जवाब दिया है. बंगाली जनमुक्ति […]

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सिलीगुड़ी/जलपाइगुड़ी. प्रतिबंधित तीन उग्रवादी संगठन केएलओ, एनएलएफटी व पीडीसीके द्वारा इसी वर्ष 31 मार्च तक हिंदी और बांग्ला भाषियों को उत्तर बंगाल के कूचबिहार के अलावा असम व त्रिपुरा छोड़ने के फरमान का पलटा जवाब देते हुए बंगाली जनमुक्ति वाहिनी (नेशनल लिबरेशन फोर्स ऑफ बंगाली) नामक संगठन ने भी पलटा जवाब दिया है.

बंगाली जनमुक्ति वाहिनी ने भी दो पेज में प्रेस-विज्ञप्ति जारी कर धमकी दी है कि भारतीय किसी से नहीं डरते, वह चाहे बंगाली हो या हिंदी भाषी या फिर अन्य कोई भी भारतीय समुदाय. विज्ञप्ति के जरिये पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में रहनेवाले सभी भारतीय समुदायों से यह अपील की गयी है कि किसी भी धमकी से डरने की जरूरत नहीं है बल्कि हम सबको एकजुट होकर दहशतगर्दों को मुंहतोड़ जवाब देना होगा.

इस प्रेस-विज्ञप्ति के जरिये संगठन ने बंगाल, असम और त्रिपुरा के मुख्ममंत्री क्रमशः ममता बनर्जी, सर्वानंद सोनोवाल व मानिक सरकार को चेतावनी दी है कि अगर किसी भी भारतीय के साथ कोई अनहोनी घटना घटित होती है तो इसके लिए राज्य सरकारें ही जिम्मेदार होंगी. सरकारों को आम जनता की सुरक्षा के लिए अभी से ही तगड़ा इंतजाम करना होगा. अगर किसी एक भारतीय को भी कुछ हुआ तो इसका खामियाजा भुगतने के लिए भी सरकार को तैयार रहेना होगा. बंगाली जममुक्ति वाहिनी के इस प्रेस-विज्ञप्ति के नीचे संगठन के मुख्य सचिव मिठुन घोष व प्रमुख नेता रंजन सरकार के हस्ताक्षर है. उग्रवादी संगठनों की धमकी और फिर पलटा धमकी के बाद शासन-प्रशासन के होश उड़ गये हैं.धमकी फिर पलटा धमकी के बाद उत्तर बंगाल से सटे असम अंतरराजीय सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी गयी है.

उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार व कूचबिहार जिला असम-त्रिपुरा की ओर जानेवाली सड़कों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. यह कहना है अलीपुरद्वार जिला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अवारूल रवींद्रनाथन का. उनका कहना है कि यूं तो वर्ष भर ही पुलिस पूरी सुरक्षा बरतती है. लेकिन उग्रवादी संगठनों के धमकी के बाद सुरक्षा के और तगड़े इंतजाम किये गये हैं. सभी थानों को भी कड़ी सतर्कता का निर्देश दे दिया गया है. अंतरराजीय सीमाओं पर हरेक गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है.

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