आधार कार्ड बनाने में हो रही है धांधली

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Jan 2017 1:54 AM

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बालूरघाट. बालूरघाट जिले में विभिन्न स्थानों पर आधार कार्ड बनाने में धांधली बरतने का आरोप सामने आया है. जिले में आधार बनाने की जिम्मेदारी गैर सरकारी संगठन ‘सहज तथ्य मित्र’ को दी गई है. इसके साथ ही कई साइबर कैफे में भी आधार कार्ड बनाने का काम चल रहा है. आरोप है कि इन्हीं केन्द्रों […]

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बालूरघाट. बालूरघाट जिले में विभिन्न स्थानों पर आधार कार्ड बनाने में धांधली बरतने का आरोप सामने आया है. जिले में आधार बनाने की जिम्मेदारी गैर सरकारी संगठन ‘सहज तथ्य मित्र’ को दी गई है. इसके साथ ही कई साइबर कैफे में भी आधार कार्ड बनाने का काम चल रहा है. आरोप है कि इन्हीं केन्द्रों पर आधार कार्ड बनाने के लिए आम लोगों से पैसे लिये जा रहे हैं.

जिला प्रशासन के पास भी इस प्रकार की शिकायतें मिली हैं. जिला प्रशासन ने इस पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है. प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दक्षिण दिनाजपुर जिले में करीब 80 प्रतिशत लोगों का आधार कार्ड बन गया है. जिनका आधार कार्ड नहीं बना है, वह इसे बनाने के लिए सहज तथ्य मित्र केन्द्र अथवा साइबर कैफे जा रहे हैं. जिला प्रशासन ने इसके लिए इन केन्द्रों को अधिकृत किया है. यहां नया आधार कार्ड बनाने के साथ ही पुराने आधार कार्ड में किसी प्रकार की त्रुटी का संशोधन भी किया जाता है.

इस बीच, जिले के बंशीहारी ब्लॉक स्थित जोरदिघी इलाके में आधार कार्ड बनाने के लिए सरकार द्वारा अधिकृत तथ्य मित्र केन्द्र तथा साइबर कैफे पर पैसे लेने का आरोप लगा है. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा है कि 100 रुपये से 150 रुपये तक आधार कार्ड बनाने के लिए लिये जा रहे हैं. सिर्फ नया आधार बनाने के लिए नहीं, बल्कि पुराने आधार कार्ड में संशोधन कराने के लिए भी पैसे की मांग की जाती है. स्थानीय निवासी मानिक घोष का कहना है कि उनके परिवार का आधार कार्ड पहले ही बन गया है. नाम में भूल रहने की वजह से वह जोरदिघी के सरकार द्वारा अधिकृत एक साइबर कैफे में नाम में संशोधन कराने गये थे. इसके लिए उनसे 100 रुपये लिये गये. बाद में पता चला कि इसके लिए पैसे नहीं लगते हैं. उन्होंने कहा कि उनके जैसे काफी लोग हैं जो साइबर कैफे में आधार कार्ड के लिए पैसे दे रहे हैं. बगैर पैसे दिये कोई काम नहीं हो रहा है.

क्या कहते हैं कैफे मालिक: इस मामले के सामने आने के बाद कैफे मालिकों ने अपनी सफाई दी है. इन लोगों का कहना है कि पिछले तीन महीने से आधार कार्ड बनाने के लिए सरकार की ओर से कोई रकम नहीं दी गई है. वह लोग अपने खर्च पर आधार कार्ड बना रहे हैं. साइबर कैफे चलाने वाले तमाम युवक किसी तरह रोजगार कर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं. अगर सरकार पैसे नहीं देगी, तो वह लोग आगे कैसे काम कर पायेंगे. इसी वजह से आम लोगों से आधार कार्ड बनाने के लिए पैसे ले रहे हैं. इन लोगों ने यह भी माना कि आधार कार्ड बनाने के लिए पैसा लेना गैर कानूनी है.
क्या कहते हैं जिला अधिकारी : जिला अधिकारी संजय बोस का कहना है कि आधार कार्ड बनाने के लिए पैसे लेना पूरी तरह से गैर कानूनी है. उन्हें अभी इस मामले की जानकारी नहीं है. वह इसका पता करेंगे. उन्होंने कहा कि ऐसे साइबर कैफे को बंद करा दिया जायेगा और आरोपियों की गिरफ्तारी की जायेगी.
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