तृणमूल ने गांगुली पर बढ़ाया इस्तीफे का दबाव
कोलकाता :एक प्रशिक्षु वकील का यौन उत्पीड़न करने के मामले में दोषी करार दिए गए न्यायाधीश(सेवानिवृत) ए.के. गांगुली पर दबाव बढ़ाते हुए तृणमूल कांग्रेस ने आज गांगुली को नैतिक आधार पर पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटने के लिए कहा. तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद सौगत रॉय ने बताया, ‘‘भारत […]
कोलकाता :एक प्रशिक्षु वकील का यौन उत्पीड़न करने के मामले में दोषी करार दिए गए न्यायाधीश(सेवानिवृत) ए.के. गांगुली पर दबाव बढ़ाते हुए तृणमूल कांग्रेस ने आज गांगुली को नैतिक आधार पर पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटने के लिए कहा.
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद सौगत रॉय ने बताया, ‘‘भारत के मुख्य न्यायाधीश पी.सतशिवम को उन्होंने जो लिखा है, वह उनका काम है.यह हमारी राजनैतिक मांग नहीं है बल्कि यह शिष्टाचार और न्याय की मांग है कि उन्हें नैतिक आधार पर इस पद को छोड़ना चाहिए.’’ रॉय ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को दो पत्र लिखकर उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के खिलाफ ‘तत्काल उचित कार्रवाई’ करने की मांग की है और राष्ट्रपति ने ऐसे कदमों की शुरुआत भी की है. यह मामला गृहमंत्रलय को सौंप दिया गया था और मंत्रलय ने इसे विधि मंत्रलय को सौंप दिया. अटॉर्नी जनरल ने भी अपनी रिपोर्ट दे दी है.’’
रॉय ने कहा, ‘‘अब उन्हें (गांगुली) खुद इस पूरी प्रक्रिया में अपना बचाव करने दें.’’ भारत के प्रधान न्यायाधीश द्वारा गठित तीन न्यायाधीशों के पैनल को सौंपे गए अपने शपथपत्र में प्रशिक्षु वकील ने गांगुली के उस कथित व्यवहार का वर्णन किया है, जो उन्होंने उसके साथ पिछले साल 24 दिसंबर को नई दिल्ली के होटल में किया था. इस समय वह गांगुली के काम में उनकी मदद करने गई थी.
पैनल ने प्रशिक्षु के लिखित व मौखिक बयान के आधार पर गांगुली को दोषी ठहराते हुए कहा कि प्रथम दृष्ट्या यह न्यायाधीश :गांगुली: द्वारा उनके होटल के कमरे में प्रशिक्षु के साथ किया गया ‘अस्वीकार्य व्यवहार का कार्य’ यानी अस्वीकार्य मौखिक या अमौखिक यौन प्रकृति का व्यवहार लगता है.
जस्टिस गांगुली ने कहा, इंटर्न का उत्पीड़न नहीं किया, पीड़िता ने झूठ बोलने का आरोप लगाया
कोलकाता: उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ए के गांगुली ने किसी इंटर्न का उत्पीड़न या उसके प्रति कोई अवांछित आचरण करने के प्रयास से इनकार करते हुए आज भारत के प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम से शिकायत की कि अदालत ने उनके पक्ष पर ठीक ढंग से ध्यान नहीं दिया.
न्यायमूर्ति गांगुली ने प्रधान न्यायाधीश को लिखे आठ पृष्ठों के पत्र में कहा है कि वह इस पत्र की एक प्रति राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भी भेज रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘मैं हाल के कुछ घटनाक्रमों को लेकर व्यथित हूं. मैं इस बात को लेकर दुखी हूं कि आपके नेतृत्व में उच्चतम न्यायालय ने मेरा पक्ष ठीक ढंग से नहीं लिया.’’ उन्होंने कहा कि एक इंटर्न के आरोपों को लेकर मीडिया में चल रही बातों पर गहन विचार के बाद वह अपनी चुप्पी तोड़ने पर विवश हुए हैं.
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