गिरफ्तार सांसद कुणाल घोष हावड़ा कोर्ट में पेश सात दिनों की पुलिस हिरासत

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हावड़ा: सारधा चिटफंड घोटाला मामले में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस के निलंबित सांसद कुणाल घोष को शनिवार को हावड़ा सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अरुण कुमार नंदी ने उन्हें सात दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया. उन पर आइपीसी की धारा 420, 406, 506/34 (धोखाधड़ी, विश्वासघात, जान से मारने की […]

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हावड़ा: सारधा चिटफंड घोटाला मामले में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस के निलंबित सांसद कुणाल घोष को शनिवार को हावड़ा सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अरुण कुमार नंदी ने उन्हें सात दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया. उन पर आइपीसी की धारा 420, 406, 506/34 (धोखाधड़ी, विश्वासघात, जान से मारने की धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

मई में हुआ मामला दर्ज
सारधा ग्रुप के एजेंट जयंत बेरा ने पांच मई 2013 को सांतरागाछी थाने में सारधा ग्रुप के अध्यक्ष व मालिक सुदीप्त सेन और अन्य एजेंट ब्रजेश राय के खिलाफ एफआइआर दर्ज करायी थी. जयंत ने दोनों पर सात लाख 15 हजार रुपये का घोटाला करने का आरोप लगाया है.

सुदीप्त झूठ बोल रहे
इस मामले में आरोपित 12 लोगों की संलिप्तता पर सारधा समूह के मालिक सुदीप्त सेन के इनकार करने के बारे में सांसद ने कहा कि सुदीप्त पूरी तरह झूठ बोल रहे हैं. उन्हें झूठ बोलने के लिए सिखाया गया है. अदालत से निकलने के दौरान उन्होंने कहा कि मुङो फंसाया गया है. यहां पूरी तरह तमाशा हो रहा है.

अदालत कक्ष में प्रवेश पर रोक
लगभग 20 मिनट की सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी. कक्ष के सामने व पीछे रैफ व पुलिस के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात थे. पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगाने से थोड़ी देर तक वहां तनाव का माहौल रहा.

साजिश का आरोप
कुणाल घोष के वकील अर्धेंदु दास ने बताया कि जयंत बेरा की एफआइआर में श्री घोष का नाम दर्ज नहीं है. बावजूद इसके उन्हें गिरफ्तार किया गया. उनकी जमानत अरजी भी खारिज कर दी गयी. श्री दास ने बताया कि विधाननगर कोर्ट ने दो दिसंबर को श्री घोष का धारा 164 (मजिस्ट्रेट के समक्ष) के तहत बयान दर्ज कराये जाने का आदेश दिया गया था, लेकिन इसके पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर रिमांड पर ले लिया गया. यह एक सुनियोजित साजिश है.

पेशी पहले से तय थी
सहायक सरकारी वकील पायल घोष बनर्जी ने कहा कि उन पर सात लाख 15 हजार रुपये घोटाला करने का आरोप है. एफआइआर में नाम दर्ज नहीं होने के बावजूद उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया, यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जांच के दौरान श्री घोष का इस मामले से जुड़े होने का संदेह व्यक्त किया जा रहा है. इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया है.

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