भाजपा की चाल पर तृणमूल की पैनी नजर

Updated:
विज्ञापन

कोलकाता: केंद्र में मोदी सरकार के गठन, सारधा चिटफंड घोटाले में तृणमूल नेताओं पर गिरती गाज और लोकसभा चुनाव में भाजपा के बढ़े मत प्रतिशत से तृणमूल कांग्रेस चिंतित है. पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी राज्य में भाजपा के बढ़ते वर्चस्व से निबटने के लिए रणनीति बनाने में जुट गयी है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित […]

विज्ञापन

कोलकाता: केंद्र में मोदी सरकार के गठन, सारधा चिटफंड घोटाले में तृणमूल नेताओं पर गिरती गाज और लोकसभा चुनाव में भाजपा के बढ़े मत प्रतिशत से तृणमूल कांग्रेस चिंतित है. पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी राज्य में भाजपा के बढ़ते वर्चस्व से निबटने के लिए रणनीति बनाने में जुट गयी है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कोलकाता दौरे के ऊपर तृणमूल कांग्रेस के आला नेताओं की निगाहें टिकी हैं.

तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि विधानसभा चुनाव उपचुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस चिंतित नहीं है, हालांकि तृणमूल कांग्रेस अपनी पूरी ताकत लगा देगी, लेकिन चुनाव के बहाने भाजपा जिस तरह से बंगाल में अपने प्रसार की रणनीति बनायी है. यहां केंद्रीय नेताओं की उपस्थिति लगातार बढ़ रही है. इस पर तृणमूल नेताओं की लगातार नजर है.

उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव 2014 में तृणमूल कांग्रेस को पश्चिम बंगाल की 42 में 34 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा को दो, माकपा को दो व कांग्रेस को चार सीटें मिली थीं. उस चुनाव में भाजपा लोकसभा चुनाव में बंगाल में दो ही सीटें जीत सकी, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से वह आठ सीटों पर दूसरे नंबर पर रही. यानी अगर उन सीटों पर वोटों का थोड़ा और झुकाव उसके पक्ष में होता तो वह राज्य में वाम दल व कांग्रेस को किनारे कर राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी की हैसियत पा लेती. लोकसभा में भाजपा का वोट प्रतिशत पिछले लोकसभा चुनाव में छह फीसदी और विधानसभा चुनाव में चार फीसदी से बढ़ कर 16.8 फीसदी हो गया. इस वोट शेयर से जहां भाजपा का आत्मविश्वास बढ़ा है, वहीं ममता आशंकित हैं. हाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बयान भी इसी परिपेक्ष्य में देखा जाना चाहिए. माकपा को अपना राजनीतिक शत्रु माननेवाली ममता बनर्जी ने भाजपा के मुकाबले माकपा के साथ समझौता करने तक की बात कर दी. उन्होंने साफ कहा था कि राजनीति में कोई अछूत नहीं होता है, जबकि तृणमूल के नेता पहले कहा करते थे कि जिस घर में माकपा नेता हैं, उनके घर में शादी तक नहीं करें.

हालांकि तृणमूल कांग्रेस की यह पहल को वामपंथी नेताओं ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है, लेकिन बिहार में भाजपा के मुकाबले जिस तरह से नीतीश, लालू व कांग्रेस एकजुट हुई है. उससे ममता बनर्जी को यह साफ लगने लगा है कि माकपा का मुकाबले भले ही उन्होंने कर लिया है तथा 34 वर्षो के माकपा शासन को समाप्त करने में सफल रही है, लेकिन भाजपा से मुकाबले के लिए उसे सहयोगी की जरूरत है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola