उद्यमी शिशिर बाजोरिया भाजपा में

Published at :24 Aug 2014 7:50 AM (IST)
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उद्यमी शिशिर बाजोरिया भाजपा में

बसु और बिमान के करीबी रहे हैं एसके बाजोरिया कोलकाता : मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नजदीकी उद्योगपति शिशिर बाजोरिया शनिवार को भाजपा में शामिल हो गये. प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में श्री बाजोरिया के भाजपा में शामिल होने की घोषणा की गयी. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने कहा कि माकपा […]

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बसु और बिमान के करीबी रहे हैं एसके बाजोरिया

कोलकाता : मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नजदीकी उद्योगपति शिशिर बाजोरिया शनिवार को भाजपा में शामिल हो गये. प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में श्री बाजोरिया के भाजपा में शामिल होने की घोषणा की गयी.

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने कहा कि माकपा के नजदीकी उद्योगपति के रूप में पहचाने जाने वाले बाजोरिया भाजपा में शामिल हुए हैं क्योंकि उनका मानना है कि भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है जो बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के कुशासन से लड़ सकती है. इस प्रकार के अनुभवी नेता या कार्यकर्ता के भाजपा में शामिल होने से भाजपा को लाभ मिलेगा. आज तृणमूल के लोग गुंडागर्दी के साथ उनके विधायक लोगों को जिंदा जला तक की बात कर रहे हैं.

लोकतंत्र में इस तरह की बयानबाजी बरदाश्त नहीं की जायेगी. प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ हैं. इस बयान में भी हाइकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही सरकार या प्रशासन कोई कदम उठायेगी.

‘परिवर्तन के परिवर्तन के लिए हुआ भाजपा में शामिल’: शिशिर बाजोरिया ने कहा कि वह लोगों के लिए काम करने के मकसद से भाजपा के साथ जुड़े हैं.

साथ ही बंगाल में परिवर्तन के बाद का परिवर्तन भाजपा ही कर सकती है. आज बंगाल में उद्योग नहीं है. बेरोजगारी चरम पर है. रोज एक न एक उद्योग बंद हो रहा है. ऐसे में बंगाल का विकास रुक चुका है. राज्य सरकार की उद्योग नीति बड़े उद्योग के लिए नहीं हैं. लघु एवं मध्यम उद्योग में भी कोई खास निवेश नहीं दिख रहा है. ऐसे में बंगाल का विकास एवं परिवर्तन के बाद का वास्तविक परिवर्तन भाजपा ही कर सकती है.

इसी कारण मैं भाजपा में शामिल हुआ. शिशिर बाजोरिया के भाजपा में शामिल होने के बाद माकपा नेता रॉबिन देव ने कहा है कि फिलहाल हम मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. अगर हमें कोई छोड़ना चाहता है तो यह उसका निजी फैसला है.

सीएम के सिंगापुर दौरे पर जारी हो श्वेत पत्र : श्री सिन्हा ने कहा कि हमारी मांग है कि पश्चिम बंगाल सरकार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सिंगापुर दौरे के बारे में श्वेतपत्र जारी करना चाहिए, जहां वह निवेश आकर्षित करने के लिए गयी थीं. हम ममता बनर्जी के सिंगापुर दौरे को लेकर राज्य सरकार से श्वेतपत्र जारी करने की मांग करते हैं. हम जानना चाहते हैं कि इसका उद्देश्य क्या था और इसमें कितनी सफलता मिली है. सिंगापुर दौरे से क्या गया एवं क्या मिला, यह जनता को जानने का हक है. अगर राज्य सरकार ने दौरे के निष्कर्ष का खुलासा नहीं किया तो भाजपा तथ्यों का पता लगाने के लिए आरटीआइ दायर करेगी.

अब परदे के सामने

आनंद कुमार सिंह

कोलकाता. बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में शिशिर बाजोरिया को हमेशा ही एक ऐसे उद्योगपति के तौर पर जाना जाता रहा है जो माकपा के बेहद करीब रहा. माकपा के गलियारों में बेहद प्रभावशाली माने जाने वाले श्री बाजोरिया को अब तक परदे के पीछे से काम करने वाला कार्यकर्ता माना जाता रहा है. लेकिन अब बकौल शिशिर बाजोरिया वह परदे के सामने आकर सक्रिय होना चाहते हैं. श्री बाजोरिया का यूं तो प्रत्यक्ष राजनीति में आगमन नया कदम है लेकिन उनका इससे संपर्क 1994 में ही हो गया था जब सोमनाथ चटर्जी ने उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु से मिलाया था.

श्री बाजोरिया कहते हैं कि वह उन दोनों नेताओं से खासे प्रभावित हुए. पता नहीं उन दोनों नेताओं को उनमें क्या भाया था कि उन्हें कालांतर में कोई न कोई जिम्मेदारी सौंपते रहे. ज्योति बसु से मुलाकात के वक्त वह इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष थे. शिशिर बाजोरिया वाम मोरचा चेयरमैन बिमान बसु के भी करीबी रहे हैं. रिफ्रैक्टरी उद्योग के विशिष्ट उद्योगपति श्री बाजोरिया की फैक्टरी ओड़िशा, गुजरात के अलावा अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैंड व चीन में भी हैं.

माकपा से जुड़े रहकर वह इंडियन वर्कर एसोसिएशन की कई बैठकों में शामिल हुए. माकपा की इकॉनोमिक सेल की कमेटियों सहित अन्य प्रकोष्ठ में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभायी. औपचारिक रूप से वह पार्टी के सदस्य करीब एक वर्ष पहले राजस्थान से बने. माकपा छोड़ने के फैसले के संबंध में उनका कहना है कि यह काफी कठिन फैसला था. पुराने घर को छोड़ना आसान नहीं होता. लेकिन अब वह समझ चुके हैं कि राज्य में परिवर्तन के परिवर्तन के लिए एकमात्र भाजपा ही सक्षम है. माकपा अपना वजूद खो चुकी है. लिहाजा उन्होंने माकपा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर भाजपा का दामन थामा है. इस बार परदे के सामने से वह राजनीति में अपनी काबिलियत दिखाना चाहते हैं.

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