तृणमूल, वाम का सरकार पर देश हित बेचने का आरोप

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कोलकाता/ नयी दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों ने रेलवे के ढांचागत क्षेत्र में 100 फीसदी तथा रक्षा क्षेत्र में 49 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) को अनुमति देने के सरकार के फैसले का गुरुवार को राज्यसभा में कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह फैसला जल्दबाजी में किया गया है और यह देश के […]

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कोलकाता/ नयी दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों ने रेलवे के ढांचागत क्षेत्र में 100 फीसदी तथा रक्षा क्षेत्र में 49 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) को अनुमति देने के सरकार के फैसले का गुरुवार को राज्यसभा में कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह फैसला जल्दबाजी में किया गया है और यह देश के हितों को बेचने के समान है.

हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस मुद्दे पर कहा कि सरकार का फैसला कोई नयी घोषणा नहीं है. इस पर पहले ही संसद में चर्चा की जा चुकी है. शून्यकाल में तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि कल रात सरकार ने रेलवे ढांचागत क्षेत्र में 100 फीसदी तथा रक्षा उत्पादन क्षेत्र में 49 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) को अनुमति दे दी.

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा यह घोषणा किये जाने का समय काफी महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में जल्दबाजी दिखा रही है, क्योंकि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सितंबर में होने वाली अमेरिका यात्र से पहले यह काम करवा लेना चाहती है. उन्होंने कहा कि सरकार एफडीआइ को इस तरह से पेश कर रही है मानो यह देश में सारी समस्याओं का एकमात्र हल है. उन्होंने कहा कि एफडीआइ का मतलब फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट ही नहीं, बल्कि ‘फॉरेन डायरेक्ट इन्स्ट्रक्शन’ (प्रत्यक्ष विदेशी निर्देश) और ‘फॉरेन डायरेक्ट इन्ट्र्यूजन’ (प्रत्यक्ष विदेशी हस्तक्षेप) भी है. तृणमूल नेता ने कहा कि अमेरिका में 2008 में उसके कई राज्यों ने अपने यहां बीमा क्षेत्र में एफडीआइ को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि हमारे देश में बीमा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को सरकार विदेशी हाथों में सौंपने जा रही है.

ओब्रायन ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि यह देश के हितों को बेचने के समान है और ‘कृपया देश के हितों को मत बेचिये. माकपा के पी राजीव और भाकपा के डी राजा ने भी एफडीआइ के बारे में सरकार के इस ताजा फैसले का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि सरकार ने यह फैसला जल्दबाजी में किया है और उसे यह निर्णय वापस लेना चाहिए. इससे पहले प्रश्नकाल में माकपा के सीताराम येचुरी ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन्होंने इस पर चर्चा के लिए प्रश्नकाल स्थगित करने का नोटिस दिया है. तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन ने कहा कि कल सदन की बैठक शाम 7 बजे तक चली लेकिन पौने सात बजे टीवी पर खबरों में रक्षा क्षेत्र में एफडीआइ की सीमा बढ़ाये जाने और रेलवे में एफडीआइ की अनुमति के बारे में बताया जा रहा था. ऐसे में संसद की बैठक चलने का क्या औचित्य है.

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रश्नकाल स्थगित करने का नोटिस दिया है. सदन में मौजूद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि रेलवे में एफडीआइ के बारे में रेल बजट के दौरान चर्चा हुई थी और रक्षा क्षेत्र में एफडीआइ बढ़ाने के बारे में बजट तथा वित्त विधेयक के दौरान चर्चा हुई थी. यह नया नहीं है. मंत्रिमंडल ने बजट घोषणाओं पर केवल औपचारिक निर्णय किया है.

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