शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं हिंदी मीडियम स्कूल

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कोलकाता: राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत जहां एक तरफ स्कूलों में बच्चों को नि:शुल्क किताबें, ड्रेस व भोजन मुहैया करवाये जा रहे हैं, वहीं स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक नहीं होने की समस्या को शिक्षा विभाग नजरअंदाज कर रहा है. स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण शिक्षा का स्तर भी गिरता […]

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कोलकाता: राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत जहां एक तरफ स्कूलों में बच्चों को नि:शुल्क किताबें, ड्रेस व भोजन मुहैया करवाये जा रहे हैं, वहीं स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक नहीं होने की समस्या को शिक्षा विभाग नजरअंदाज कर रहा है. स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण शिक्षा का स्तर भी गिरता जा रहा है. यह शिकायत राज्य के कई हिंदी भाषी स्कूलों के हेडमास्टरों ने की है.

नियुक्ति के मामले में शिक्षा विभाग पीछे
कुछ हेडमास्टरों ने जानकारी दी कि शिक्षा के अधिकार के तहत जहां कुछ अच्छे काम हो रहे हैं, वहीं शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में विभाग काफी उदासीन नजर आ रहा है. सहायक शिक्षकों के कई पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए हैं. इस समस्या के कारण शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है. खिदिरपुर के एक हिंदीभाषी स्कूल के हेडमास्टर ने बताया कि कई बार दो सेक्शनों को एक ही में मिलाकर पढ़ाई करवायी जाती है, ताकि समय पर सिलेबस पूरा किया जा सके. वहीं हावड़ा के एक स्कूल के हेडमास्टर ने शिकायत की कि उनके यहां जगह की कमी है. वह दो सेक्शन के बच्चों को एक साथ नहीं बैठा कर पढ़ा सकते हैं. कम शिक्षकों से ही किसी तरह काम चलाया जा रहा है. ऐसी स्थिति में पढ़ाई प्रभावित हो रही है.

हुगली के स्कूल के एक हेडमास्टर ने बताया कि हाल ही में एसएससी (स्कूल सर्विस कमिशन) द्वारा कुछ स्कूलों में हेडमास्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरु की गयी है. लेकिन असिस्टेंट टीचरों की नियुक्ति नहीं हो रही है. कई सरकारी अनुदान प्राप्त हिंदी मीडियम स्कूलों में शिक्षकों, क्लर्क व ग्रुप डी कर्मचारियों के पद रिक्त पड़े हुए हैं, इसका असर स्कूल के कामकाज व पढ़ाई पर पड़ रहा है. एसएससी व डीआइ में प्रस्ताव भेजने के बावजूद नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा रही है.

स्कूल की घंटी भी बजा रहे हैं कुछ हेडमास्टर
कुछ हेडमास्टरों ने बताया कि शिक्षकों के साथ-साथ ग्रुप डी कर्मचारियों की भी नियुक्ति नहीं की गयी है. कुछ स्कूल अस्थायी ग्रुप डी कर्मचारियों से काम चला रहे हैं, वहीं कुछ स्कूलों में घंटी बजाने का काम भी हेडमास्टर खुद ही कर रहे हैं. यह सुनने में बड़ा अजीब लगता है, लेकिन यह सच है. घंटी बजाने का काम प्रधानाध्यापक वहां के शिक्षकों को नहीं बोल सकते हैं. अगली क्लास का समय होते ही पढ़ाई को ध्यान में रखकर हेडमास्टर खुद ही घंटी बजा देते हैं.

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