प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपने ही लोकसभा क्षेत्र में पार्टी की साख बचाने की चिंता

Updated at : 05 Mar 2017 6:20 PM (IST)
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपने ही लोकसभा क्षेत्र में पार्टी की साख बचाने की चिंता

आरके नीरदवाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपने ही संसदीय क्षेत्र में भाजपा की साख बचाने की चिंता बड़ी है. बनारस उनका संसदीय निर्वाचन क्षेत्र है. राज्य विधानसभा के छठे चरण के चुनाव के दिन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी में लगातार तीन दिन अपना वक्त दे रहे हैं. उन्होंने दो दिन रोड शो […]

विज्ञापन

आरके नीरद
वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपने ही संसदीय क्षेत्र में भाजपा की साख बचाने की चिंता बड़ी है. बनारस उनका संसदीय निर्वाचन क्षेत्र है. राज्य विधानसभा के छठे चरण के चुनाव के दिन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी में लगातार तीन दिन अपना वक्त दे रहे हैं. उन्होंने दो दिन रोड शो किये और कल सोमवार को तीसरे दिन सभा करेंगे. बनारस में सातवें अौर अंतिम चरण में 8 मार्च को वोटिंग होनी है. इस चरण में वाराणसी के अलावा गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र और जौनपुर जिलों में वोट पड़ेंगे. इन जिलों में विधानसभा की कुल 40 सीटें हैं. यह पूर्वांचाल का क्षेत्र है और वाराणसी इसका केंद्र है.

वाराणसी जिले में विधानसभा की आठ और वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की पांच सीटें हैं. 2012 के चुनाव में भाजपा को इनमें से केवल तीन सीटें मिली थीं. ये तीनों सीटें नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की हैं. हालांकि जिले में तीन सीट जीतने वाली भाजपा अकेली पार्टी है. सपा-बसपा के खातों में दो-दो तथा कांग्रेस के खाते में एक सीट गयी थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा इन सभी विधानसभा क्षेत्रों में भारी पड़ी थी और नरेंद्र मोदी को सभी इलाकों में सबसे ज्यादा वोट मिले थे. वह करिश्मा अगर इस बार के विधानसभा चुनाव में भी कायम रहता है, तो भाजपा को अंतिम चरण के इस चुनाव मे निश्चय ही बड़ी बढ़त मिलेगी और उसकी सीटों की संख्या बढ़ेगी, मगर एक तो यह चुनाव है, दूसरा कि बनारसियों का अपना मिजाज. इसमें पक्के तौर पर कुछ भी कह पाना बहुत आसान नहीं है. ऊपर से भाजपा में टिकट के बंटवारे को लेकर अतुष्टों का बड़ा तबका भी है. यह तबका भाजपा के उम्मीदवारों के लिए मुश्किलें खड़ा कर सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ये ही चिंता के सबब हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 के लोकसभा चुनाव वाला करिश्मा यहां पैदा करना चाहते हैं. उस चुनाव में भाजपा ने वाराणसी में वोट शेयर का इतिहास रचा था. नरेंद्र मोदी को 56.37 फीसदी वोट मिले थे और भाजपा के खाते में 25.85 फीसदी वोट की बढ़त हुई थी. न केवल भाजपा, बल्कि दूसरी किसी पार्टी को भी इतनी बड़ी बढ़त कभी नहीं मिली थी. 2009 में जब मुरली मनोहर जोशी इस सीट से जीते थे, जब उन्हें केवल 30.52 फीसदी वोट मिला था और भाजपा को 6.91 फीसदी वोट की बढ़त हासिल हुई थी. 2004 में जब भाजपा को कांग्रेस ने हराया था, तब उसे 32.68 प्रतिशत वोट मिले थे और उसके वोट शेयर में केवल 7.20 फीसदी की वृद्धि हुई थी. नरेंद्र मोदी की लोकसभा चुनाव में वाराणसी ने ऐतिहासिक जीत थी. वह इसे इस विधानसभा चुनाव में भी कायम रखने की कोशिश में है.

भाजपा अगर उत्तरप्रदेश में सरकार बनाने लायक सीटें नहीं जीतती है और वाराणसी में मोदी का जलवा कायम रहता है, तो कम-से-कम उनकी अपनी प्रतिष्ठा इस मायने में कायम रह जायेगी. प्रधानमंत्री के काशी रोड शो की एक अहम बात यह भी है कि भाजपा के हिंदूवादी एजेंडे में मथुरा के बाद काशी रही है. नरेंद्र मोदी के काशी अभियान से अंतिम चरण में 40 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में इस बात का असर रहेगा.

वहीं, जिस तरह से रोड शो का रूट में मुस्लिम आबादी वाले इलाकों को रखा गया और रोड शो के दूसरे दिन मुस्लिमों के एक तबके को भाजपा समर्थक के तौर पर झंडे-बैनर के साथ पेश किया गया, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चिंता का संकेत है. काशी क्षेत्र में 70-80 फीसदी हिंदू वोटर हैं. वहां मुस्लिम मतदाताओं में भाजपा के प्रति रुझान पैदा करने की नरेंद्र मोदी के इस प्रयास का भी अपना मायने है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola