यूपी में दिव्यांग छात्राओं को सीएम योगी दे रहे मुफ्त ई-ट्राईसाइकिल, ऐसे करें आवेदन और उठाएं योजना का लाभ
मुफ्त मोटराइज्ड ई-ट्राईसाइकिल का तोहफा (सांकेतिक तस्वीर)
UP News: उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांग छात्राओं की शिक्षा को आसान बनाने के लिए एक अनूठी पहल कर रही है. अब ऐसी छात्राओं को मुफ्त मोटराइज्ड ई-ट्राईसाइकिल दी जाएगी, जिससे उनके आवागमन में सुविधा होगी. इस योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है और 16 साल से अधिक उम्र की छात्राओं को प्राथमिकता दी जाएगी.
UP News: पढ़ाई के लिए रोजाना आने-जाने में परेशानी झेलने वाली दिव्यांग छात्राओं के लिए अच्छी खबर है. योगी सरकार अब ऐसी छात्राओं को मुफ्त मोटराइज्ड ई-ट्राईसाइकिल देने जा रही है. इस पहल का मकसद छात्राओं के लिए आवागमन आसान करना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उनकी पढ़ाई में आने वाली मुश्किलों को कम करना है. योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है और छात्राओं के चिन्हांकन का काम भी किया जा रहा है.
हर विधानसभा क्षेत्र से 20 छात्राओं का होगा चयन
जिले में सदर, तिंदवारी, बबेरू और नरैनी समेत कुल विधानसभा क्षेत्र हैं. योजना के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से 20-20 दिव्यांग छात्राओं का चयन किया जाएगा. इन छात्राओं को मोटराइज्ड ई-ट्राईसाइकिल दी जाएगी. इस योजना का लाभ स्कूल, कॉलेज और तकनीकी ट्रेनिंग सेंटर जाने वाली दिव्यांग छात्राओं को मिलेगा. विभाग ने आवेदन प्रक्रिया शुरू करने के साथ पात्र छात्राओं के चिन्हांकन की शुरुआत भी कर दी है.
पढ़ाई के रास्ते में अब नहीं आएगी दूरी
मोटराइज्ड ई-ट्राईसाइकिल मिलने से दिव्यांग छात्राओं के लिए स्कूल, कॉलेज या प्रशिक्षण संस्थान तक पहुंचना आसान होगा. परिवहन के साधनों की कमी या शारीरिक निशक्तता उनकी पढ़ाई के रास्ते में बाधा नहीं बनेगी. इससे छात्राएं अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगी.
16 साल से ज्यादा उम्र की छात्राओं को प्राथमिकता
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की इस योजना में 16 वर्ष से अधिक आयु की दिव्यांग छात्राओं को प्राथमिकता दी जा रही है. खास तौर पर बीपीएल परिवारों से आने वाली छात्राओं को वरीयता मिलेगी. इसके अलावा छात्रा का किसी मान्यता प्राप्त स्कूल, कॉलेज या व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान में नियमित रूप से अध्ययनरत होना जरूरी है. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की उन छात्राओं को मदद मिलेगी, जो मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं.
बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
योजना को दिव्यांग छात्राओं के लिए सिर्फ वाहन उपलब्ध कराने की पहल के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. इसका उद्देश्य उन्हें शिक्षा के साथ आत्मनिर्भरता और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है. जनपदवासियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस फैसले का स्वागत किया है. योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को आगे बढ़ाने वाली पहल के तौर पर भी देखा जा रहा है.
ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन
इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है. इच्छुक छात्राएं उत्तर प्रदेश दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकती हैं.
आवेदन के लिए मुख्य रूप से ये दस्तावेज जरूरी होंगे:
मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र या UDID कार्ड, आय/जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, स्कूल या कॉलेज में अध्ययनरत होने का प्रमाण ,अधिक जानकारी या किसी तरह की सहायता के लिए विकास भवन स्थित जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है.
आवेदन शुरू, चिन्हांकन की प्रक्रिया जारी
विभाग के अनुसार आवेदन शुरू हो चुके हैं और पात्र छात्राओं का चिन्हांकन किया जा रहा है. प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से 20-20 दिव्यांग छात्राओं का चयन किया जाना है. बीपीएल परिवारों की दिव्यांग छात्राओं को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी.
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