UP में शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर हाईकोर्ट का फैसला, जानें किसे मिलेगा अंतरजनपदीय तबादले का लाभ
प्राथमिक शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादले का रास्ता साफ
उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर आई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अंतरजनपदीय तबादले से जुड़ी याचिकाओं पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट के आदेश से प्रदेश में शिक्षकों के तबादले का रास्ता साफ हो गया है.
UP News : उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षकों के लिए राहत की खबर है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अंतरजनपदीय तबादले से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए तबादला नीति को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है. कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादले का रास्ता साफ हो गया है.
शिक्षक अपनी पसंद के स्कूल में तैनाती का दावा नहीं कर सकते
न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि तबादला नीति के तहत शिक्षक अपने आवेदन पर जिले स्तर पर विचार की मांग कर सकते हैं, लेकिन किसी खास विद्यालय में तैनाती का अधिकार नहीं मांग सकते. कोर्ट ने ऋषी कटियार समेत तीन शिक्षकों की याचिकाएं खारिज कर दीं.
22 जून के शासनादेश को दी गई थी चुनौती
याचिकाकर्ताओं ने 22 जून 2026 को जारी शासनादेश में तबादले के लिए निर्धारित जिलेवार छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) को चुनौती दी थी. उनका तर्क था कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के अनुसार छात्र-शिक्षक अनुपात विद्यालय और कक्षा के आधार पर निर्धारित किया जाना चाहिए. शिक्षकों का कहना था कि जिलेवार अनुपात तय होने से यह स्पष्ट नहीं होगा कि तबादले के लिए किस विद्यालय का विकल्प चुना जाए. हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया.
तबादला शिक्षक का स्वतः प्राप्त अधिकार नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षक का तबादला कोई स्वतः प्राप्त वैधानिक अधिकार नहीं है. राज्य सरकार की तबादला नीति के तहत ही शिक्षकों को तबादले का अवसर मिलता है. इसलिए नीति में जिले स्तर पर आवेदन पर विचार की व्यवस्था होने के बावजूद किसी शिक्षक को अपनी पसंद के विद्यालय में नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता.
RTE और तबादला नीति के PTR का उद्देश्य अलग
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरटीई के तहत विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या तय करने वाला छात्र-शिक्षक अनुपात और तबादलों के लिए सरकार द्वारा निर्धारित जिलेवार PTR, दोनों के उद्देश्य अलग-अलग हैं. आरटीई के तहत PTR का मकसद विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराना है, जबकि तबादला नीति में जिलेवार अनुपात का इस्तेमाल यह तय करने के लिए किया जाता है कि किन जिलों में शिक्षकों का तबादला किया जा सकता है.
पति-पत्नी शिक्षकों को भी मिल सकता है लाभ
तबादला नीति में विशेष परिस्थितियों में अंतरजनपदीय तबादले का प्रावधान किया गया है. इसमें ऐसे पति-पत्नी के मामले भी शामिल हैं, जिनमें दोनों बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं और अलग-अलग जिलों में तैनात हैं. कम छात्र-शिक्षक अनुपात वाले जिलों में ऐसे आवेदनों पर नीति के अनुसार विचार किया जा सकता है. इस तरह हाईकोर्ट के फैसले से अंतरजनपदीय तबादला प्रक्रिया को लेकर बनी कानूनी अड़चन दूर हो गई है.
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