UP में जिस पनीर और खोवा को असली समझकर खरीद रहे थे, उसमें मिलाया जा रहा था कपड़े धोने वाला केमिकल

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नकली पनीर बनाने का खेल बेनकाब

UP News: गाजियाबाद के भोजपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने नकली पनीर बनाने वाली तीन फैक्ट्रियों पर छापेमारी की. यहां पनीर को सफेद और वजनदार बनाने के लिए कपड़ों के डिटर्जेंट वाइटनर, पामोलीन तेल और दूध पाउडर जैसे रसायनों का इस्तेमाल हो रहा था. विभाग ने 868 किलो पनीर और 170 किलो खोया नष्ट कराया और आगे की जांच के लिए नमूने भेजे हैं.

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UP News: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी में नकली पनीर तैयार करने के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. भोजपुर थाना क्षेत्र के नाहली गांव की तीन फैक्टरियों में पनीर को सफेद और वजनदार बनाने के लिए कपड़े धोने में इस्तेमाल होने वाला वाइटनर, पामोलीन ऑयल, दूध पाउडर और अन्य रसायनों के इस्तेमाल की बात सामने आई है.

868 किलो पनीर और 170 किलो खोवा नष्ट

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बुधवार रात तीनों फैक्टरियों पर कार्रवाई की. यहां से बरामद 868 किलो पनीर और 170 किलो खोवा मौके पर ही नष्ट कराया गया. इसके अलावा विभिन्न रसायनों समेत 20 नमूने जांच के लिए लखनऊ स्थित प्रयोगशाला भेजे गए हैं. सहायक आयुक्त खाद्य-2 सुरेश कुमार मिश्रा के मुताबिक, फैक्टरी संचालकों कलवा, सकील और कफील के खिलाफ भोजपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है. आरोपियों पर बीएनएस की धारा 123, 275 समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है.

यूपी के कई जिलों और दिल्ली-एनसीआर तक सप्लाई

पूछताछ में पता चला कि त्योहारों के सीजन में इन फैक्टरियों से रोज करीब 300 से 400 किलो पनीर तैयार किया जा रहा था. गाजियाबाद के अलावा दिल्ली, फरीदाबाद, गुरुग्राम, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ तक इसकी सप्लाई की जा रही थी. यह पनीर बाजार में करीब 200 से 250 रुपये प्रति किलो की कीमत पर बेचा जाता था. सस्ता होने के कारण दुकानदार और ग्राहक इसे खरीद लेते थे.

सामान्य तरीके से नकली पनीर पहचानना मुश्किल

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी आशुतोष राय ने बताया कि फैक्टरियों में पनीर तैयार करने के लिए कुछ रसायन आरोपी खुद तैयार कर रहे थे. रसायनों के इस्तेमाल के बाद नकली पनीर को सामान्य घरेलू तरीकों से पहचानना मुश्किल हो जाता है. देखने और स्वाद में यह असली पनीर जैसा लग सकता है.

रसायनों से सेहत को गंभीर नुकसान का खतरा

एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ निश्चेतक डॉ. चरन सिंह के अनुसार, वाइटनर या फ्लूड से जुड़े रसायन शरीर के लिए खतरनाक हो सकते हैं. इनके संपर्क या सेवन से चक्कर, समन्वय में कमी और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक ऐसे रसायनों के संपर्क में रहने से लीवर और किडनी पर गंभीर असर पड़ने का खतरा रहता है. बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर अधिक हो सकता है. खाद्य विभाग ने लोगों से पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद लाइसेंस प्राप्त और भरोसेमंद दुकानों से ही खरीदने की अपील की है. विभाग ने त्योहारों को देखते हुए जिले में मिठाई और डेयरी उत्पाद बनाने वाली इकाइयों की जांच तेज करने की बात कही है.

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खुशबू कुमारी

लेखक के बारे में

By खुशबू कुमारी

खुशबू कुमारी पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज, से मास कम्युनिकेशन में स्नातक किया है तथा वर्तमान में इग्नू से मास्टर ऑफ आर्ट्स (मास कम्युनिकेशन एंड डिजिटल मीडिया) की पढ़ाई कर रही हैं. उन्हें जनहित से जुड़ी खबरों, डिजिटल पत्रकारिता, समाचार लेखन, फोटोग्राफी, वीडियो एडिटिंग और ग्राफिक डिजाइन में विशेष रुचि है. वे राजनीति, शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, अपराध और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर शोधपरक, तथ्यपरक और पाठकों के लिए उपयोगी डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं. उनका उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय, स्पष्ट और प्रभावी जानकारी पहुंचाना है, ताकि समाचार केवल सूचना का माध्यम न होकर समाज के लिए उपयोगी साबित हों.

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