बरसात में बच्चों पर मंडरा रहा पीलिया का खतरा, गंदे पानी से लेकर बासी फल तक बन सकते हैं वजह

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बरसात में पीलिया से बचें, साफ पानी पिएं और ताजा खाना खाएं

बरसात के मौसम में बच्चों में पीलिया का खतरा बढ़ जाता है. दूषित पानी और खान-पान इसके मुख्य कारण हैं. जानें इसके लक्षण और बचाव के ज़रूरी उपाय ताकि आप अपने बच्चों को सुरक्षित रख सकें.

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UP News : बरसात के मौसम में दूषित पानी और खाने की वजह से पीलिया का खतरा बढ़ जाता है. खासकर बच्चों में इस बीमारी के मामले अधिक सामने आ सकते हैं. आंखों का पीला होना, पेशाब का रंग बदलना, भूख न लगना, उल्टी जैसा महसूस होना और कमजोरी इसके प्रमुख लक्षण माने जाते हैं. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.

बारिश के मौसम में क्यों बढ़ता है पीलिया का खतरा?

लोकल 18 से बातचीत में केसरी राज अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सुमंत कुमार गुप्ता ने बताया कि बारिश के मौसम में पीलिया के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है. इस दौरान बैक्टीरिया और वायरल संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं. दूषित पानी या गंदे हाथों से खाना खाने की वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. बारिश के दौरान पानी और खाद्य पदार्थों के दूषित होने की आशंका भी अधिक रहती है. यही वजह है कि इस मौसम में पीलिया के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

बच्चों में ये लक्षण दिखें तो रहें सावधान

पीलिया की शुरुआत में बच्चों को भूख कम लगना, उल्टी जैसा महसूस होना, पेट में दर्द और कमजोरी जैसी परेशानी हो सकती है. इसके अलावा आंखों में पीलापन और पेशाब का रंग पीला होना भी इसके महत्वपूर्ण संकेत हैं. विशेषज्ञ के अनुसार, बच्चों में पीलिया के मामले अधिक देखने को मिल सकते हैं. हालांकि, बड़ों को भी साफ-सफाई और खान-पान को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए.

साफ पानी और ताजा भोजन से करें बचाव

पीलिया से बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. बारिश के मौसम में पानी को उबालकर या सुरक्षित तरीके से साफ करके पीना चाहिए. खाना खाने से पहले और शौचालय के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना भी जरूरी है. इसके साथ ही ताजे फल और भोजन का सेवन करें. कटे हुए या लंबे समय से रखे फलों और बासी भोजन से बचना चाहिए.

समय पर इलाज न मिलने पर बढ़ सकती है परेशानी

पीलिया के कई मामले हेपेटाइटिस A और E वायरस के संक्रमण से जुड़े होते हैं. समय पर पहचान और उचित चिकित्सकीय देखरेख में कई मरीज ठीक हो जाते हैं. लेकिन लक्षणों को नजरअंदाज करने पर स्थिति गंभीर हो सकती है और कुछ मामलों में लिवर को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है. इसलिए आंखों में पीलापन, पेशाब का रंग गहरा होना, लगातार कमजोरी, उल्टी या पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

झाड़-फूंक के बजाय डॉक्टर से कराएं इलाज

पीलिया होने पर कई लोग झाड़-फूंक या घरेलू उपायों के भरोसे इलाज में देरी कर देते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर योग्य चिकित्सक से जांच और उचित उपचार कराना चाहिए. समय पर इलाज मिलने से बीमारी को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है.

इन बातों का रखें ध्यान

साफ और सुरक्षित पानी ही पिएं. खाना खाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं. ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन करें. कटे हुए या बासी फलों से बचें. आंखों या पेशाब में पीलापन दिखे तो इसे नजरअंदाज न करें. लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें.

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रवि रंजन कुमार

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By रवि रंजन कुमार

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