बलिया महिला अस्पताल में भ्रष्टाचार का खेल! जन्म प्रमाण पत्र के लिए वसूले गए लाखों रुपये

बलिया महिला जिला अस्पताल
UP News: बलिया जिला महिला अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर अवैध वसूली का आरोप लगा है. वायरल वीडियो में कर्मचारी 250 रुपये मांगता दिख रहा है.
तिलक कुमार, बलिया. UP News: उत्तर प्रदेश के बलिया जिला महिला अस्पताल से सामने आए एक मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि जिला महिला अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र जारी कराने के नाम पर वर्षों से मरीजों और उनके परिजनों से अवैध वसूली की जा रही है. इस पूरे घटना क्रम का वीडियो बनाकर एक पीड़िता ने सोशल मीडिया पर अपलोड किया है. हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में अस्पताल का एक कर्मचारी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के एवज में 250 रुपये मांगता दिखाई दे रहा है. यदि यह वीडियो सही पाया जाता है, तो यह न केवल सरकारी व्यवस्था पर सवाल है, बल्कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के अधिकारों का भी उल्लंघन है.
छोटी रकम, लेकिन बड़ा खेल!
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रत्येक जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर 250 से 300 रुपये तक की वसूली की जाती है. यदि औसतन 250 रुपये प्रति प्रमाण पत्र और प्रतिदिन 10 प्रमाण पत्र का अनुमान लगाया जाए, तो प्रतिदिन लगभग 2,500 रुपये, एक महीने में करीब 75 हजार रुपये और एक वर्ष में लगभग 9 लाख रुपये की कथित वसूली होती है. इसी अनुमान के आधार पर पांच वर्षों में यह आंकड़ा करीब 45 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. हालांकि, इस राशि की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह उपलब्ध आरोपों एवं अनुमानित गणना पर आधारित है.
जब सेवा मुफ्त है, तो पैसा किस बात का?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार की ओर से जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है, तो आखिर मरीजों से रुपये क्यों लिए जा रहे हैं? इस संबंध में जिला महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. राकेश चंद्रा ने स्पष्ट कहा कि जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अस्पताल में किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाता. यह सेवा पूरी तरह निःशुल्क है. उन्होंने कहा कि यदि कोई कर्मचारी इस नाम पर धन वसूलता पाया गया तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ विधिक कार्रवाई भी की जाएगी.
शिकायतें उठती हैं, फिर क्यों दब जाता है मामला?
अस्पताल आने वाले कई लोगों का कहना है कि इस तरह की शिकायतें पहले भी कई बार सामने आई हैं. कुछ दिनों तक मामला चर्चा में रहता है, लेकिन उसके बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है. आरोप है कि चूंकि एक व्यक्ति से अपेक्षाकृत कम राशि ली जाती है, इसलिए अधिकांश लोग शिकायत करने से बचते हैं. इसी वजह से कथित अवैध वसूली का सिलसिला वर्षों से चलता आ रहा है.
सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदारों से
यदि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि जन्म प्रमाण पत्र पूरी तरह मुफ्त जारी किया जाता है, तो वायरल वीडियो में कर्मचारी पैसे क्यों मांग रहा है? यदि यह व्यक्तिगत स्तर पर की जा रही वसूली है, तो इतने वर्षों तक इसकी जानकारी किसी जिम्मेदार अधिकारी को क्यों नहीं हुई? और यदि शिकायतें पहले भी मिलती रही हैं, तो अब तक दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इन सवालों के जवाब स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही सामने आएंगे. फिलहाल वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों ने जिला महिला अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करता है या यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा.
क्या बोले प्रभारी सीएमएस
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डा.राकेश चंद्रा के अनुसार जन्मप्रमाण पत्र जारी करने के एवज में कोई शु:ल्क नहीं है. बिल्कुल मुफ्त है. यदि कोई इस तरह से पैसा वसूल रहे हैं तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ विधिक कार्रवाई कराई जाएगी.
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लेखक के बारे में
By राधेश्याम कुशवाहा
राधेश्याम कुशवाहा को पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत उन्होंने राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में यूपी डेस्क का नेतृत्व कर रहे हैं. इन्हें धर्म-अध्यात्म, ज्योतिष, राजनीति, अपराध और सकारात्मक खबरों की रिपोर्टिंग व लेखन में विशेष रुचि रखते हैं.
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