राम मंदिर चढ़ावा विवाद: कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि का इस्तीफे से इनकार, बोले- 'मैदान छोड़कर भागना हमारे धर्म में नहीं'

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राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, फोटो पीटीआई

राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, फोटो पीटीआई

Ram Mandir Donation Theft Case: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि महाराज ने मंगलवार को स्वीकार किया कि अयोध्या के राम मंदिर में निगरानी व्यवस्था में कुछ चूक हुई. लेकिन इसके बावजूद चढ़ावा चोरी मामले में वो इस्तीफा नहीं देंगे, क्योंकि वह खुद को व्यक्तिगत रूप से दोषी नहीं मानते.

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Ram Mandir Donation Theft Case: कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने मीडिया से बात करते हुए कहा- इस मामले में गिरफ्तार किए गए सभी लोग भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कर्मचारी हैं. उन्होंने कहा कि बैंक अधिकारियों को उनकी बैकग्राउंड और पात्रता की पूरी जांच करनी चाहिए थी तथा उन्हें अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए थी.

करीब 3 करोड़ रुपये की हुई चोरी : गोविंद गिरि

चोरी की रकम के बारे में पूछे जाने पर गोविंद गिरि महाराज ने कहा कि उनके व्यक्तिगत अनुमान के अनुसार यह राशि करीब तीन करोड़ रुपये हो सकती है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे आधिकारिक या प्रामाणिक आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वह विशेष जांच टीम (SIT) की जांच और सप्रीम कोर्ट की ओर से मामले की निगरानी से संतुष्ट हैं.


जब समय संघर्ष का हो, तब मैदान छोड़कर भागना हमारे धर्म में नहीं : गोविंद गिरि

गोविंद गिरि महाराज ने यह भी कहा कि उनके इस्तीफा संबंधी खबरें दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक हैं. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं कहा कि मैं इस्तीफा दूंगा. मैं छत्रपति शिवाजी महाराज का अनुयायी हूं और मैं भागने वालों में से नहीं हूं. जब समय संघर्ष का हो, तब मैदान छोड़कर भागना हमारे धर्म में नहीं है.’’

चंपत राय ने स्वेच्छा से पद छोड़ा : गोविंद गिरि

न्यास के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे पर गोविंद गिरि महाराज ने कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से पद छोड़ा है. उन्होंने कहा, ‘‘न्यास के संविधान के अनुसार, एक बार इस्तीफा सौंपे जाने के बाद, उसे मंजूर हुआ मान लिया जाता है.’’ उन्होंने उन चर्चाओं को भी खारिज किया कि चंपत राय को बलि का बकरा बनाया गया. उन्होंने कहा कि चंपत राय की लापरवाही की वजह से यह स्थिति बनी और इस्तीफा देने से पहले उन्हें इसका एहसास हो गया था.

मेरा काम न्यास के बैंक खातों में जमा कोष की देखरेख करना है : गोविंद गिरि

गोविंद गिरि ने कहा, ‘‘कोषाध्यक्ष के तौर पर मेरी भी कुछ जिम्मेदारियां हैं. मेरा काम न्यास के बैंक खातों में जमा कोष की देखरेख करना है. पांच चार्टर्ड अकाउंटेंट नियमित रूप से इन खातों की जांच करते हैं.’’ गोविंद गिरि महाराज ने कहा कि मंदिर की दान पेटियों में जमा रकम का गबन किया गया, न कि न्यास के बैंक खातों में जमा रकम का.

गोविंद गिरि ने एसबीआई पर फोड़ा ठीकरा

कोषाध्यक्ष ने कहा कि स्थानीय न्यासी दान पेटियों में जमा रकम की गिनती और हिसाब-किताब का काम देखते थे. गोविंद गिरि महाराज ने कहा कि दान पेटियों से मिलने वाले दान के प्रबंधन और हिसाब-किताब की जिम्मेदारी एसबीआई को सौंपी गई है. उन्होंने कहा, ‘‘अब तक जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे सभी एसबीआई के कर्मचारी हैं. उन्हें एसबीआई ने ही तैनात किया था, न्यास ने नहीं. भले ही कुछ नियुक्तियां सिफारिश के आधार पर की गई हों, लेकिन संबंधित लोगों की बैकग्रांड और पात्रता की जांच करना एसबीआई की जिम्मेदारी थी. एसबीआई देश के अग्रणी बैंक में से एक है.’’ उन्होंने कहा कि न्यास को उम्मीद थी कि बैंक वित्तीय अनुशासन बनाए रखेगा और चढावे के रोजाना के हिसाब-किताब की देखरेख के लिए खास तौर पर कर्मचारी तैनात करेगा. उन्होंने कहा, ‘‘हो सकता है कि न्यासियों के पास वित्तीय मामलों की जानकारी न हो, लेकिन बैंक अधिकारियों के पास तो होती है.’’

दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए : गोविंद गिरि

यह पूछे जाने पर कि क्या बैंक कर्मचारियों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए था, गोविंद गिरि महाराज ने कहा, ‘‘वे उपदेशक नहीं हैं, वे बैंक अधिकारी हैं. इसलिए उन्हें सतर्क रहना चाहिए था.’’ उन्होंने कहा कि न्यास की प्राथमिकता अब व्यवस्था को मजबूत करना और कमियों को दूर करना है, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. उन्होंने यह भी कहा कि न्यास एसआईटी की जांच में दखल नहीं देगा और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

प्रायश्चित के तौर पर इस्तीफा देने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं : कोषाध्यक्ष

कथित चोरी ‘‘भगवान राम के खिलाफ एक अपराध’’ थी. गोविंद गिरि ने कहा, ‘‘हम शर्मिंदा हैं कि ऐसी घटना हुई. यह हमारे लिए बहुत दुख की बात है.’’ कोषाध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने की मांगों पर गोविंद गिरि महाराज ने कहा कि प्रायश्चित के तौर पर इस्तीफा देने की ‘‘बिल्कुल भी जरूरत नहीं’’ है. उन्होंने कहा, ‘‘मेरा प्रायश्चित इस्तीफा देना नहीं है. बल्कि यह पक्का करना है कि जो गलतियां हुईं, वे दोबारा न हों. हमने खामियों को दूर करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.’’

चोरी की घटना के बाद हुए कई बदलाव: गोविंद गिरि

कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि ने कहा- न्यास ने कई सुधारात्मक उपाय लागू किए हैं, जिनमें नकदी संभालने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली वर्दी अनिवार्य करना, सीसीटीवी के दायरे में सभी स्थान को लाना, नोट के बंडल छिपाने की आशंका रोकने के लिए मेज की बजाय फर्श पर बिछी चटाई पर नकदी की गिनती करना, नकदी की गिनती के दौरान न्यास के दो प्रतिनिधियों और एसबीआई के दो अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा गिनती कक्ष में प्रवेश और बाहर निकलने वाले सभी कर्मचारियों की तलाशी लेना शामिल है.

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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