सुप्रीम कोर्ट ने कहा-समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया ने कोर्ट को धोखा दिया, आदेशों का उल्लंघन किया

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समय रैना

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सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना को फटकार लगाई है. कोर्ट ने समय रैना और अन्य आरोपियों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

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Samay Raina : सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना और यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया को फटकार लगाते हुए कहा है कि उन्होंने कोर्ट को बेवकूफ बनाया है और खुलेआम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया है. सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य आरोपियों पर सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देश का पालन न करने के लिए 3-3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कंप्लायंस एफिडेविट फाइल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है.


खुद को युवाओं का आदर्श समझते हैं, फिर भी ऐसा आचरण

कोर्ट ने आदेश का पालन नहीं करने पर कॉमेडियन समय रैना और यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया को फटकार लगाते हुए कहा, वे खुद को युवाओं का आदर्श समझते हैं. उसके बावजूद उनका आचरण इस तरह का है. कोर्ट ने समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया और आशीष चंचलानी पर तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया और उन्हें दो हफ्ते में यह रकम जमा करने का आदेश दिया है.

कोर्ट में अबतक क्या-क्या हुआ

तारीखसुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई
18 फरवरी 2025रणवीर को अंतरिम राहत, नई एफआईआर पर रोक
3 मार्च 2025पॉडकास्ट दोबारा शुरू करने की अनुमति, शालीन कंटेंट की शर्त
अप्रैल 2025समय रैना को भी मामले में पक्षकार बनाया गया
अगस्त 2025सार्वजनिक बिना शर्त माफी का आदेश
नवंबर 2025दिव्यांगों के लिए फंड रेजर आयोजित करने का निर्देश
14 जुलाई 2026कंप्लायंस एफिडेविट दाखिल न करने और आदेशों के पालन में कमी पर कड़ी फटकार


इंडियाज गॉट लेटेंट शो से शुरू हुआ था विवाद

इंडियाज गॉट लेटेंट शो के फरवरी 2025 के एक एपिसोड में रणवीर इलाहाबादिया की अश्लील टिप्पणी के बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया. महाराष्ट्र और असम समेत कई राज्यों में एफआईआर दर्ज हुईं. समय रैना ने शो के सभी एपिसोड यूट्यूब से हटा दिए, जबकि रणवीर ने सार्वजनिक माफी मांगी. सुप्रीम कोर्ट ने रणवीर को अंतरिम राहत देते हुए पॉडकास्ट दोबारा शुरू करने की अनुमति दी, लेकिन शालीन कंटेंट की शर्त लगाई थी, लेकिन कोर्ट का आदेश ना मानने पर 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें फटकार लगाई है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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