उमड़ा जनसैलाब, नम हुईं आंखें... जनप्रिय नेता उमाशंकर सिंह की अंतिम यात्रा में थम-सा गया पूरा बलिया
बसपा विधायक उमाशंकर सिंह का शव यात्रा
बसपा विधायक उमाशंकर सिंह की अंतिम यात्रा में पूरा बलिया गम में डूब गया. हजारों समर्थकों और आम लोगों ने पुष्प वर्षा कर दी अंतिम विदाई. जानिए पूरी यात्रा का हाल.
बलिया: बसपा के जनप्रिय और इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह की अंतिम यात्रा शुक्रवार को उनके पैतृक आवास खनवर से निकली तो पूरा इलाका गम में डूब गया. घर के बाहर सुबह से ही हजारों की संख्या में समर्थक, शुभचिंतक और आम लोग अंतिम दर्शन के लिए जुट पड़े. जैसे ही पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए बाहर लाया गया, पूरा वातावरण "उमाशंकर सिंह अमर रहें" के नारों और लोगों की सिसकियों से गूंज उठा.

जहां-जहां से गुजरी शवयात्रा, श्रद्धांजलि देने उमड़ पड़े लोग
बलिया के खनवर से शुरू हुई शवयात्रा चिलकहर, फेफना, माल्देपुर, चित्तू पांडेय चौराहा और कदम चौराहा होते हुए बयासी घाट पहुंची. रास्ते भर लोग अपने घरों, दुकानों और सड़कों के किनारे खड़े होकर अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देते रहे. कई स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धासुमन अर्पित किए, जबकि महिलाओं और बुजुर्गों की आंखें नम हो गईं.

हजारों गाड़ियों और बाइकों का काफिला बना जनसैलाब
शवयात्रा में हजारों चारपहिया वाहनों और हजारों बाइकों का लंबा काफिला शामिल रहा. कई किलोमीटर तक सड़कें वाहनों से भरी रहीं. ऐसा लग रहा था मानो पूरा पूर्वांचल अपने लोकप्रिय जनप्रतिनिधि को अंतिम विदाई देने निकल पड़ा हो. प्रशासन को भी यातायात व्यवस्था संभालने में विशेष मशक्कत करनी पड़ी.

हर चेहरे पर गम, हर आंख में आंसू
अंतिम यात्रा के दौरान समर्थकों, कार्यकर्ताओं और आम लोगों की आंखें लगातार नम रहीं. किसी के हाथ में फूल थे तो कोई हाथ जोड़कर अपने नेता को अंतिम प्रणाम कर रहा था. लोगों के चेहरे बता रहे थे कि उन्होंने केवल एक विधायक नहीं, बल्कि जनता के सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले एक ऐसे जननेता को खो दिया है, जिसने हर वर्ग के लोगों के दिलों में अपनी अलग पहचान बनाई थी.

बयासी घाट पर नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
शवयात्रा जब बयासी घाट पहुंची तो वहां पहले से हजारों लोगों की भीड़ मौजूद थी. गंगा तट पर गमगीन माहौल के बीच जनप्रिय नेता उमाशंकर सिंह को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई. उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब इस बात का साक्षी बना कि जनता के दिलों में उनके प्रति कितना गहरा सम्मान और अपनापन था. उनकी अंतिम यात्रा ने यह साबित कर दिया कि जनसेवा से कमाया गया विश्वास और प्रेम ही किसी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पूंजी होती है.
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By Tilak Kumar
तिलक कुमार पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है. अमर उजाला, प्रभात खबर, जनसंदेश टाइम्स और राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में क्राइम रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं. अपराध, राजनीति और हाइपरलोकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. मैदानी रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और प्रभावशाली खबरों को पाठकों तक पहुंचाया है. जमीनी मुद्दों की गहरी समझ और तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग उनकी पहचान रही है. वर्तमान में वह प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़े हुए हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध तथा जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं.
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