शाहजहांपुर में निकाला गया ‘लाट साहब'' का जुलूस, मारे गये जूते

Updated at : 21 Mar 2019 7:04 PM (IST)
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शाहजहांपुर में निकाला गया ‘लाट साहब'' का जुलूस, मारे गये जूते

शाहजहांपुर (उप्र) : उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में होली पर पारंपरिक तरीके से निकलने वाले लाट साहब का जलूस यूं तो शांतिपूर्वक संपन्न हो गया, मगर प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद ‘लाट साहब’ को जूते मारने से नहीं रोका जा सका. लाट साहब का जुलूस चौक क्षेत्र स्थित फूलमती मंदिर से लाट साहब […]

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शाहजहांपुर (उप्र) : उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में होली पर पारंपरिक तरीके से निकलने वाले लाट साहब का जलूस यूं तो शांतिपूर्वक संपन्न हो गया, मगर प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद ‘लाट साहब’ को जूते मारने से नहीं रोका जा सका. लाट साहब का जुलूस चौक क्षेत्र स्थित फूलमती मंदिर से लाट साहब को मत्था टेकने के बाद चौक कोतवाली आया. वहां पर कोतवाल ने लाट साहब को सलामी देने के साथ इनाम भी दिया.

अंग्रेजी शासन के दौरान गवर्नर जनरल को लाट साहब के नाम से खिताब किया जाता था और यह जुलूस अंग्रेज शासकों के जुल्म-ज्यादती के खिलाफ आक्रोश के प्रतीक के तौर पर हर साल शाहजहांपुर में निकाला जाता है. इस जुलूस में लाट साहब को बैलगाड़ी पर तख्त डाल कर बिठाया गया तथा सिर पर हेलमेट भी पहनाया गया, ताकि चोट ना लगे. इसके अलावा, उनके ऊपर झाड़ू से हवा की जाती रही. होरियारे लोग लाट साहब की जय बोलते हुए उन्हें जूते मारते रहे.

हालांकि, इस बार प्रशासन ने काफी चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था की थी, ताकि कोई बवाल ना हो. इसीलिए लाट साहब को जूते मारने पर भी पाबंदी लगा दी गयी थी, लेकिन प्रशासन की कोशिश के बाद भी होरियारे लाट साहब को जूता मारते रहे. यह जुलूस शहर के बाद विभिन्न सड़कों से होते हुए घंटा घर पहुंचा और वहां से घूमता हुआ दोबारा चौक क्षेत्र में जाकर सम्पन्न हो गया.

जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने बताया कि जुलूस की निगरानी के लिए 4 ड्रोन कैमरे लगाये गये, जबकि पूरी सड़क पर 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों से लाट साहब के जुलूस पर निगरानी रखी गयी. पुलिस अधीक्षक एस चनप्पा ने बताया कि जुलूस के दौरान कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए दो कंपनी आरएएफ तथा दो कंपनी पीएसी बल तैनात किया गया था.

इस जुलूस में लाट साहब बनने वाले व्यक्ति को इस बार गाजियाबाद से लाया गया था. ऐसे व्यक्ति को होली से 15 दिन पहले यहां लाकर गुप्त स्थान पर रखा जाता है. परंपरा के मुताबिक, जुलूस के आयोजक उस व्यक्ति के पूरे परिवार को कपड़े देते हैं तथा काफी धन राशि भी दी जाती है.

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