Coronavirus Pandemic : सोशल डिस्टैंसिंग का कड़ाई से पालन कराने की योजना का खाका पेश करे यूपी सरकार : कोर्ट

Author Agency|Edited by Prabhat Khabar
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प्रयागराज : कोविड-19 महामारी के दौरान शारीरिक दूरी के नियमों का पालन नहीं किए जाने को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को प्रदेश सरकार को इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने की योजना का खाका पेश करने को कहा. कोरोना वायरस को लेकर प्रदेश में स्थिति से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजित कुमार की पीठ ने कहा, “हमें यह सुझाव देने में कोई हिचक नहीं है कि कैद और अधिक जुर्माने पर विचार किया जा सकता है.”

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प्रयागराज : कोविड-19 महामारी के दौरान शारीरिक दूरी के नियमों का पालन नहीं किए जाने को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को प्रदेश सरकार को इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने की योजना का खाका पेश करने को कहा. कोरोना वायरस को लेकर प्रदेश में स्थिति से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजित कुमार की पीठ ने कहा, “हमें यह सुझाव देने में कोई हिचक नहीं है कि कैद और अधिक जुर्माने पर विचार किया जा सकता है.”

पीठ ने कहा, “हमें यह समझ में नहीं आता कि उत्तर प्रदेश महामारी कोविड-19 नियमन, 2020 को उचित ढंग से क्यों नहीं लागू किया जा रहा है जिसमें भादंसं की धारा 188 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है. साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-144 जो हमें बताया गया है कि लागू है, उसका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है.” इससे पूर्व, राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बताया कि प्रदेश में कैसे शारीरिक दूरी बनाए रखी जाए और लोगों का मास्क पहनना सुनिश्चित किया जाए, इसके तरीके निकालने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की जाएगी.

उन्होंने अदालत से कहा कि इस कवायद को अनिवार्य रूप से अपनाना होगा क्योंकि कोविड-19 का संक्रमण अब भी यहां है और लोग शारीरिक दूरी की अवधारणा को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं. सरकारी भवनों के बाहर लोगों को अनाधिकृत रूप से एकत्रित होने से नहीं रोके जाने के सवाल पर अदालत को बताया गया कि नगर निगम अनाधिकृत रूप से कब्जा जमाए लोगों को हटाने के लिए अभियान शुरू करने जा रहा है.

साथ ही इस्तेमालशुदा मास्क को इकट्ठा कर उसे व्यवस्थित ढंग से नष्ट किया जा रहा है. इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 20 जुलाई तय करते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि उच्च न्यायालय के बाहर और पूरे प्रदेश में सभी सरकारी भवनों के बाहर कूड़ादान लगाए जाएं. जिससे इस्तेमालशुदा मास्क और दास्ताने को लोग ठिकाने लगा सकें.

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