अयोध्या: धन्नीपुर मस्जिद का डिजाइन बदलने के बाद अब ट्रस्ट नए सिरे से करेगा आवेदन, छह महीने में शुरू होगा काम
Published by : Sanjay Singh Updated At : 13 Oct 2023 8:58 PM
बताया जा रहा है कि आधुनिक स्वरूप में तैयार की गई धन्नीपुर में प्रस्तावित मस्जिद की डिजाइन लोग स्वीकार नहीं कर पा रहे थे. अब नए डिजाइन पर सभी की सहमति बन गई है. खास बात है कि मस्जिद का पैगम्बर मोहम्मद साहब के नाम से जुड़ाव होने के कारण ये सभी ने पसंद किया है.
Ayodhya Dhannipur Mosque: अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और जनवरी 2024 में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियों को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर धन्नीपुर में मस्जिद निर्माण कार्य शुरू भी नहीं हो पाया है. इसका नक्शा पास हो चुका है, लेकिन धन की कमी निर्माण कार्य में रोड़ा बनी हुई है. वहीं अब धन्नीपुर में प्रस्तावित मस्जिद को लेकर बड़ा फैसला किया गया है. मस्जिद अब नई डिजाइन के मुताबिक बनाई जाएगी. इसके बाद अब ट्रस्ट डिजाइन का नक्शा नए सिरे से पास कराने के लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण को आवेदन करेगा. वहीं मस्जिद को अब नया नाम दिया गया है. इस नाम पर सभी की सहमति बन गई है. दरअसल आर्थिक कारणों से धन्नीपुर में प्रस्तावित मस्जिद की नींव अब तक नहीं पड़ सकी है. अयोध्या के धन्नीपुर गांव में प्रस्तावित इस मस्जिद का ‘फर्स्ट लुक’ का मुंबई में अनावरण किया गया है, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया है. मस्जिद का नाम पैगम्बर मोहम्मद साहब के नाम पर ‘मोहम्मद बिन अब्दुल्ला मस्जिद’ रखा गया है. देश की सभी मस्जिदों के संगठन ऑल इंडिया राबता-ए-मस्जिद (एआईआरएम) ने इसके नए नाम पर अपनी मुहर लगा दी है. बताया जा रहा है कि भाजपा नेता हाजी अरफात शेख की पहल पर विभिन्न मुस्लिम संप्रदायों का एआईआरएम सम्मेलन मुंबई में बुलाया गया. सम्मेलन में वरिष्ठ मौलवियों ने भागीदारी की. एआईआरएम सम्मेलन में अयोध्या की प्रस्तावित मस्जिद पैगंबर के नाम पर रखने की घोषणा की गई. धन्नीपुर मस्जिद स्थल सदियों पुरानी बाबरी मस्जिद के मूल स्थान से लगभग 22 किलोमीटर दूर है.
हाजी अरफात शेख के मुताबिक नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद आवंटित जगह पर बनने वाली नई मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिद होगी. मस्जिद में 5000 पुरुषों और 4000 महिलाओं समेत 9000 श्रद्धालु एक साथ नमाज अदा कर सकेंगे. पूरे मस्जिद परिसर में अपने संसाधनों के माध्यम से अतिरिक्त भूमि की खरीद के साथ चिकित्सा, शैक्षिक और सामाजिक सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी.
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हाजी अराफात के मुताबिक आर्किटेक्ट ने उनसे पूछा था की मस्जिद कैसी होनी चाहिए? इस पर उन्होंने कहा कि ये मस्जिद सवाल का जवाब होनी चाहिए. अराफात के मुताबिक जो बेकसूर मारे गए, उनके लिए इस मस्जिद में पहले दिन दुआ पढ़ी जाएगी. हम मुसलमान बाबर को मानने वाले नहीं हैं. हम गरीब नवाज को मानने वाले लोग हैं. नबी को मानने वाले हैं. इस मस्जिद में मुगल बादशाह बाबर का कोई निशान नहीं होगा.
इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष ज़ुफर फारूकी के मुताबिक मुंबई में सभी मसलक के उलमा के साथ बैठक में मस्जिद का डिजाइन बदलने और मस्जिद का नाम पैगम्बर मोहम्मद साहब के नाम पर रखने का फैसला किया गया है. इस तरह धन्नीपुर में प्रस्तावित मस्जिद का नक्शा परंपरागत स्वरूप से बिलकुल अलग दो मीनारों के साथ अंडाकार तैयार किया गया था. मस्जिद की मीनारों को मॉडर्न लुक देने के लिए इसमे मेहराबों को शामिल नही किया गया था.
बताया जा रहा है कि आधुनिक स्वरूप में तैयार की गई मस्जिद की डिजाइन लोग स्वीकार नहीं कर पा रहे थे. अब नए डिजाइन पर सभी की सहमति बन गई है. खास बात है कि मस्जिद का पैगम्बर मोहम्मद साहब के नाम से जुड़ाव होने के कारण ये सभी ने पसंद किया है. इस मस्जिद का डिजाइन मशहूर आर्किटेक्ट इमरान शेख ने बनाया है. खास बात यह है कि मस्जिद की पहली मंजिल पर महिलाएं के भी नमाज पढ़ने का इंतजाम होगा.
कहा जा रहा है कि इस मस्जिद की मीनार 11 किलोमीटर दूर से दिखाई देगी, और इसकी उंचाई 300 फीट से ज्यादा होगी. मस्जिद के लिए आवंटित जमीन पर इबादतगाह के अलावा लॉ कॉलेज, मेडिकल कॉलेज और इंजिनियरिंग कॉलेज का भी निर्माण होगा. इस मस्जिद के लिए पहली ईंट मुंबई से अयोध्या जाएगी, जिसे यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड के प्रमुख जुफर फारुकी को सौंपा गया है.
ट्रस्ट के मुताबिक अभी मस्जिद निर्माण शुरू होने में कम से कम छह महीने और लग जाएंगे. इसकी वजह यह है कि मस्जिद की पुरानी डिजाइन में बदलाव कर दिया गया है. ऐसे में ट्रस्ट अब नए सिरे से नक्शा पास कराने के लिए आवेदन करेगा. एक एकड़ में मस्जिद का निर्माण होगा. शेष चार एकड़ में अस्पताल और लाइब्रेरी बनाई जाएगी. वहीं अभी तक मस्जिद निर्माण नहीं हो पाने के वजह अहम वजह धन की कमी रही है, मस्जिद ट्रस्ट के अध्यक्ष जुफर अहमद फारूकी के मुताबिक धन के अभाव में मस्जिद निर्माण में देरी हुई है. अब समाज की मांग पर मस्जिद की डिजाइन और नाम में बदलाव किया गया है. उम्मीद की जा रही है कि अब मस्जिद के लिए धन की कमी नहीं होगी, लोग खुलकर दान देंगे. छह महीने में काम शुरू हो जाने की उम्मीद है.
अयोध्या में मंदिर-मस्जिद केस में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में नई मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था. अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करने के लिए इसके अलावा छह एकड़ जमीन और खरीदने की योजना है. हाजी अराफात शेख के मुताबिक मस्जिद के परिसर का काम विभिन्न समूहों के बीच कुछ मतभेदों की वजह से विलंबित हो गया था. उन्होंने कहा कि अब जल्द ही धन्नीपुर स्थल पर काम शुरू होने वाला है. इस मस्जिद के निर्माण के लिए लोगों से दान की अपील भी की गई है.
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By Sanjay Singh
working in media since 2003. specialization in political stories, documentary script, feature writing.
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