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Saturday, March 2, 2024

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AIMPLB ने ज्ञानवापी व्यास जी मामले में कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल, कहा-देश में विभाजन की कोशिश

जमीयत उलेमा ए हिंद कार्यालय में AIMPLB के नेताओं ने कहा कि वाराणसी कोर्ट ने व्यास जी तहखाना केस में जो फैसला दिया है, वो सही नहीं है. इसमें दूसरे पक्ष की बात भी सुनी जानी चाहिए थी.

दिल्ली: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने ज्ञानवापी व्यास जी मामले में बड़ा बयान दिया है. दिल्ली में जमीयत उलेमा ए हिंद कार्यालय में AIMPLB के नेताओं ने कहा कि वाराणसी कोर्ट ने व्यास जी तहखाना केस में जो फैसला दिया है, वो सही नहीं है. इसमें दूसरे पक्ष की बात भी सुनी जानी चाहिए थी. हिंदू मुस्लिम समाज के बीच इस तरह के मामलों से दरार पैदा करने की कोशिश की जा रही है.

नेताओं ने दावा किया कि मंदिर गिराकर मस्जिद नहीं बनी है. इस्लाम में छीनी गई जमीन पर मस्जिद नहीं बन सकती है. कोर्ट के फैसले देश के मुसलमानों को झटका लगा है. प्रेस कांफ्रेंस में कहा गया कि देश में कई ऐसे बड़े मंदिर हैं जो हजारों साल से हैं. इन प्रसिद्ध मंदिरों की एक ईंट भी इधर से उधर नहीं हुई है. इस दौरान मुस्लिम शासकों का भी राज देश में रहा है. देश में एक नया इतिहास गढ़ने की कोशिश की जा रही है. कोर्ट ने एकतरफा फैसला दिया है.

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एआईएमपीएलबी (AIMPLB) के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी का कहना था कि हमारे साथ अन्याय हो रहा है. अब अदालत से भी भरोसा उठता जा रहा है. हमारी कोई बात नहीं सुनी जा रही है. अदालत ने मूर्तियां रखकर जल्दी में पूजा शुरू करा दी है. जबकि अदालत ने प्रशासन को पूजा का इंतजार करने के लिए 7 दिन का समय दिया था. वाराणसी जिला कोर्ट ने यह फैसला बहुत ही गलत और निराधार तर्कों के आधार पर दिया है. ज्ञानवापी मस्जिद के तहखाना में 1993 तक सोमनाथ व्यास का परिवार पूजा करता था. तत्कालीन राज्य सरकार के आदेश पर उसे बंद कर दिया गया था.

उन्होंने कहा कि देश में जिस तरह से अलग-अलग मुद्दों को उठाया गया है. इससे ऐसा लगता है कि कानून की हिफाजत करने वाली अदालत में मजहबी ताकतों का कब्जा हो गया है. सुप्रीम कोर्ट के राम जन्म भूमि आदेश के बाद लगातार कभी ज्ञानवापी मस्जिद, कभी मथुरा का मामला उठाया जा रहा है. अगर मुगल शासन में ऐसा हुआ होता तो देश के अंदर बहुत सारे मंदिर है, मुसलमान कभी भी किसी मंदिर को तोड़कर इबादत नहीं करता है.

प्रेस कांफ्रेंस में अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी, जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी, मरकजी जमीअत अली हदीस के अध्यक्ष मौलाना असगर इमाम मेहंदी, जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अहमद महमूद मदनी आदि मौजूद थे.

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