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यूपी की राजनीति में तरह-तरह के रिश्ते: बेटे-बेटियां, बहन, बुआ, दो लड़के और दर्जनों चाचा

Updated at : 20 Dec 2016 8:33 AM (IST)
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यूपी की राजनीति में तरह-तरह के रिश्ते: बेटे-बेटियां, बहन, बुआ, दो लड़के और दर्जनों चाचा

!!फैजाबाद से कृष्ण प्रताप सिंह!! एक बाप, दो बेटे, दो बेटियां, दो बहनें, दो अच्छे लड़के, दो बुआ, दो बहुएं, दर्जनों चाचा और ढेर सारा इमोशनल अत्याचार! चौंकिये नहीं, यूपी विधानसभा चुनाव का परिदृश्य फिलहाल इन्हीं से मिल कर बनता और पूरा होता है. अगर आपका प्रदेश से सिर्फ ट्रेनों या बसों की खिड़कियोंवाला रिश्ता […]

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!!फैजाबाद से कृष्ण प्रताप सिंह!!

एक बाप, दो बेटे, दो बेटियां, दो बहनें, दो अच्छे लड़के, दो बुआ, दो बहुएं, दर्जनों चाचा और ढेर सारा इमोशनल अत्याचार! चौंकिये नहीं, यूपी विधानसभा चुनाव का परिदृश्य फिलहाल इन्हीं से मिल कर बनता और पूरा होता है. अगर आपका प्रदेश से सिर्फ ट्रेनों या बसों की खिड़कियोंवाला रिश्ता है, तो आपको यह बात अचरजभरी लग सकती है कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की ‘धरतीपुत्र’ व ‘धर्मनिरपेक्षता के अपराजित सिपहसालार’ वाली पहचानें अब पुरानी पड़ चुकी हैं. नयी छवि बनी है, वह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पिता की है, जो सपा के अंदरुनी झगड़ों के दौरान और निखर कर सामने आयी है. कई लोग पिता की मुश्किल बयां करते हुए कहते हैं कि उन्होंने बेटे को मुख्यमंत्री, तो बनाया, लेकिन खुद उसे मुख्यमंत्री स्वीकार नहीं कर सके. पहले उसकी ओर से सारे फैसले खुद करने की हिमाकत तक गये, फिर अपेक्षा रखने लगे कि वह पिता के अहसानों का बदला चुकाने में फरामोशी न करे. बेटे का लर्निंग पीरिएड खत्म हो जाने के बावजूद वह ‘अच्छे मुख्यमंत्री’ की जगह ‘लायक बेटा’ ही तलाशते रहते हैं.

भतीजे ने बुआ का सम्मान बचाया: दयाशंकर ने जब बुआ का अपमान कर दिया. सीएम ने दया की गिरफ्तारी करके मायावती के सम्मान की रक्षा की.

राहुल और अखिलेश में गिला शिकवा नहीं रहा: गत चुनाव में नेताजी के बेटे की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया के बेटे राहुल से सीधी भिड़ंत हुई, इसमें करारी शिकस्त के बावजूद राहुल को अखिलेश से कोई गिला शिकवा नहीं. उसके मुख्यमंत्री बन जाने पर भी उसे ‘अच्छा लड़का’ ही कहते रहे. राहुल की पिछली किसान यात्राओं के दौरान उसने भी उनको अच्छा लड़का बता कर हिसाब बराबर कर दिया, तो कहते हैं कि दोनों ने दोस्ती गांठ ली है. इस पर ‘मुख्यमंत्री के पिता’ द्वारा सपा-कांग्रेस गंठबंधन से इनकार कर देने पर भी कोई असर नहीं पड़ा है. इसी के कारण पिछले दिनों सपा में टूट के अंदेशे के दौरान कांग्रेस अखिलेश सरकार के समर्थन को तैयार थी. अब अखिलेश सपा कांग्रेस गंठबंधन की तरफदारी कर रहे हैं.

जयंत और पंकज के नाम की ज्यादा चर्चा नहीं : इस परिदृश्य में कभी-कभी चौधरी अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह भी नजर आते हैं, लेकिन उनकी ज्यादा चर्चा नहीं है. बेटियों में मायावती खुद को दलित की बेटी बताती हैं, जबकि विरोधी उन्हें दौलत की बेटी कहते हैं. हां, समर्थकों के लिए वे ‘बहिन जी’ भी हैं. दूसरी ओर सोनिया की बेटी प्रियंका हैं, राहुल की बहन. इनमें मायावती ने सत्ता में वापसी के लिए पैंतरे भांजने शुरू कर दिये हैं, लेकिन प्रियंका अमेठी व रायबरेली के बाहर कदम निकालेगी या नहीं, अभी किसी को नहीं मालूम. यों, तीसरी बेटी भी मैदान में हैं-अपने वक्त के बहुचर्चित मुख्यमंत्री हेमवतीनंदन की बेटी रीता बहुगुणा, जो पिछले दिनों भाजपा में शामिल हो गयी हैं.

यूपी की बहुएं

शीला दीक्षित: दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उमां शंकर दीक्षित की बहू हैं.

डिंपल यादव : सपा सुप्रीमो मुलायम िसंह यादव की बहू डिंपल यादव कन्नौज से सांसद हैं.

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