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क्या ? यूपी में राज्यकर्मियों की हड़ताल का असर चुनाव पर पड़ेगा

Updated at : 11 Aug 2016 8:42 PM (IST)
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क्या ? यूपी में राज्यकर्मियों की हड़ताल का असर चुनाव पर पड़ेगा

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में विभिन्न मांगों को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले कल शुरु हुई लाखों राज्यकर्मियों की तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी हड़ताल आज दूसरे दिन भी जारी रही. परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने यहां बताया कि प्रदेशव्यापी हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही और इसका दायरा भी बढाया गया। कुछ […]

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश में विभिन्न मांगों को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले कल शुरु हुई लाखों राज्यकर्मियों की तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी हड़ताल आज दूसरे दिन भी जारी रही. परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने यहां बताया कि प्रदेशव्यापी हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही और इसका दायरा भी बढाया गया। कुछ दफ्तरों जिनमें कल काम हुआ था, वे भी आज बंद कराये गये. उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने हड़ताल से हो रहे नुकसान के मद्देनजर कर्मचारी नेताओं को शाम को बातचीत के लिये बुलाया है. उसके नतीजे के आधार पर हड़ताल के सिलसिले में कोई फैसला किया जाएगा.

राज्य सरकार को 1800 करोड़ का नुकसान

तिवारी ने कहा कि राज्यकर्मियों की हड़ताल की वजह से सरकार को अब तक कम से कम 1800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.हड़ताल को अधिकारी कर्मचारी महापरिषद समेत विभिन्न कर्मचारी संगठनों का पूरा सहयोग मिल रहा है. उन्होंने बताया कि इस तीन दिवसीय हड़ताल के दूसरे दिन भी शिक्षा, उद्यान, समाज कल्याण, लोकनिर्माण, श्रम, परिवहन, कोषागार, कृषि तथा लेखा समेत तमाम विभागों के दफ्तर बंद रहे. तिवारी ने बताया कि दफ्तर बंद करके उनके गेट पर कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन किया. अगर मुख्य सचिव के साथ वार्ता में बात नहीं बनी तो राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद हड़ताल की समीक्षा करके भविष्य की रणनीति तय करेगी. यह हड़ताल अनिश्चितकालीन भी हो सकती है.

राज्य सरकार के सेहत पर पड़ेगा असर

तिवारी ने बताया कि वर्ष 2013 में परिषद के ही बैनर तले हुई महाहड़ताल के दौरान उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप पर राज्य सरकार चार मांगें मानने को तैयार हो गयी थी. उन्होंने बताया कि इन मांगों में राज्य कर्मचारियों को ‘कैशलेस’ इलाज की सुविधा, तहसीलदारों की पदोन्नति खत्म ना करने, सफाई कर्मचारियों को ग्राम प्रधानों से असम्बद्ध करके उनकी पदोन्नति की नियमावली बनाने और लिपिकों की समय से पदोन्नति में व्याप्त बाधाएं दूर करना शामिल था. तिवारी ने बताया कि उस समय सरकार ने इन मांगों पर सहमति जता दी थी, लेकिन उन पर अमल नहीं किया गया. अन्य मांगों को लेकर समितियां तो बनायी लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ.

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