मोदी मंत्रिमंडल से बुंदेलखंड फिर नदारद, इलाके के लोगों में घोर निराशा

Updated at : 01 Jun 2019 2:40 PM (IST)
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मोदी मंत्रिमंडल से बुंदेलखंड फिर नदारद, इलाके के लोगों में घोर निराशा

बांदा (उप्र) : विकास की दौड़ में बेहद पिछड़े बुंदेलखण्ड के उत्तर प्रदेश से जुड़े इलाके को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में इस बार भी नुमाइंदगी ना मिलने से क्षेत्र के लोगों में गहरी निराशा है. लगभग 29 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले और अक्सर सूखे की मार से परेशान इस इलाके के सामाजिक प्रतिनिधियों का […]

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बांदा (उप्र) : विकास की दौड़ में बेहद पिछड़े बुंदेलखण्ड के उत्तर प्रदेश से जुड़े इलाके को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में इस बार भी नुमाइंदगी ना मिलने से क्षेत्र के लोगों में गहरी निराशा है. लगभग 29 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले और अक्सर सूखे की मार से परेशान इस इलाके के सामाजिक प्रतिनिधियों का कहना है कि विकास के नाम पर सत्ता में दोबारा आयी नरेंद्र मोदी सरकार में इस अति पिछड़े क्षेत्र से एक भी मंत्री नहीं बनाया जाना बेहद अफसोस की बात है. हाल में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में यूपी के हिस्से वाले बुंदेलखंड के मतदाताओं ने भाजपा को सभी चार सीटों पर जीत दिलायी.

बांदा से आरके सिंह पटेल जीते जबकि हमीरपुर से पुष्पेंद्र सिंह चन्देल, जालौन से भानु प्रताप सिंह वर्मा और झांसी से अनुराग शर्मा को जीत मिली. केंद्र में नवगठित मोदी मंत्रिमंडल में इनमें से किसी भी सांसद को जगह नहीं मिली। वर्ष 2017 के प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी इलाके की सभी 19 सीटों पर भाजपा को जीत हासिल हुई, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में बुंदेलखण्ड से कोई कैबिनेट मंत्री नहीं है. स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी और समाजवादी चिन्तक जमुना प्रसाद बोस का कहना है कि पहले केन्द्र और राज्य सरकार की कैबिनेट में बुंदेलखंड के प्रतिनिधियों को भरपूर जगह मिलती थी, लेकिन इस बार दोनों जगह यह संख्या ‘शून्य’ है. इससे बुंदेली मतदाता निराश हैं.

बोस कहते हैं कि बुंदेलखंड में किसानों की हालत महाराष्ट्र के विदर्भ जैसी है। ‘कर्ज’ और ‘मर्ज’ से परेशान किसान आये दिन आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होते हैं. केंद्र और राज्य सरकारों की कृषि नीति भी किसानों को उबारने में सहायक नहीं हो रही है. सूखा और अन्य आपदा से किसानों की कमर टूट चुकी है. ऐसे में यह और भी तकलीफदेह बात है कि दोनों ही सरकारों की कैबिनेट में बुंदेलखण्ड के मुद्दे उठाने वाला कोई नहीं है. बुंदेलखण्ड में उत्तर प्रदेश के हिस्से में सात जिले बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी और ललितपुर आते हैं. इनमें तकरीबन एक करोड़ की आबादी रहती है. अक्सर सूखे की मार झेलने वाला यह इलाका विकास की दौड़ में बहुत पीछे माना जाता है.

बुंदेलखण्ड को अलग राज्य का दर्जा देने के लिये आंदोलन कर रहे समाजसेवी तारा पाटकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुंदेलखंड में पानी की समस्या के मद्देनजर बांदा की चुनावी जनसभा में किया वादा पूरा करते हुए जल शक्ति मंत्रालय का गठन जरूर किया है, लेकिन किसी बुंदेली सांसद को अगर इसका जिम्मा दिया जाता तो अच्छा होता. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में बुंदेलखंड के हमीरपुर की रहने वाली साध्वी निरंजन ज्योति को दोबारा राज्य मंत्री बनाया गया है, लेकिन साध्वी रुहेलखंड की फतेहपुर सीट से सांसद हैं. इसी तरह सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा की सभी 19 सीटें जीतने के बाद ललितपुर जिले की महरौनी सीट से विधायक मन्नू कोरी और उरई-जालौन के अस्थायी निवासी स्वतन्त्र देव सिंह को कैबिनेट के बजाय राज्यमंत्री बनाया है, जो बुंदेलखण्ड के लिये न्यायपूर्ण नहीं है.

भाजपा के जिलाध्यक्ष लवलेश सिंह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश और केंद्र की भाजपा सरकार की निगाहें लगातार बुंदेलखंड़ पर बनी हुई हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने दोबारा सत्ता संभालते ही पीने के पानी की समस्या के निदान के लिए ‘जल शक्ति’ मंत्रालय का गठन किया है. उन्होंने कहा कि रही बात कैबिनेट में शामिल करने की तो उत्तर प्रदेश के नौ सांसदों को मंत्री बनाया गया है, जिनमें चार कैबिनेट मंत्री हैं. जल्द ही योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में बुंदेलखंड को उचित प्रतिनिधित्व दिये जाने की उम्मीद है.

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