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उत्तरप्रदेश : योगी सरकार पहली वर्षगांठ पर तलब करेगी मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड

Updated at : 18 Mar 2018 3:37 PM (IST)
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उत्तरप्रदेश : योगी सरकार पहली वर्षगांठ पर तलब करेगी मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड

कुछ होंगे तो पास तो कुछ होंगे फेल अच्छा काम करने वालों का होगा प्रमोशन हरीश तिवारी लखनऊ: उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को राज्य की सत्ता पर काबिज हुए एक साल होने को आया है. ऐसे में योगी सरकार अपने कामकाज को जनता तक पहुंचाना चाहती है. लिहाजा इसके लिए सरकार ने मंत्रियों से […]

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कुछ होंगे तो पास तो कुछ होंगे फेल

अच्छा काम करने वालों का होगा प्रमोशन

हरीश तिवारी

लखनऊ: उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को राज्य की सत्ता पर काबिज हुए एक साल होने को आया है. ऐसे में योगी सरकार अपने कामकाज को जनता तक पहुंचाना चाहती है. लिहाजा इसके लिए सरकार ने मंत्रियों से एक साल में किए गए कार्यों का लेखा-जोखा और उपलब्धियों को तैयार करने को कहा है. फिलहाल केंद्रीय नेतृत्व और सरकार के मुखिया कुछ मंत्रियों के कामकाज से खुश हैं और कुछ के कामकाज से नाखुश. लिहाजा तय माना जा रहा है कि सरकार कुछ मंत्रियों का प्रमोशन करेगी तो कुछ मंत्रियों के पर कतरे जाएंगे.

फिलहाल योगी सरकार अपने एक साल के कामकाज को जनता तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए सरकार और संगठन ने मिलकर कार्य योजना तैयार की है. संगठन जनता के बीच जाकर योगी सरकार के काम की उपलब्धियों को बताएगी तो सरकार के जिला प्रभारी मंत्री भी अपने अपने जिले में जाकर बैठकें करेंगे. फिलहाल सरकार के एक साल होने पर मंत्रियों के कार्यों की समीक्षा करेगी. पिछले एक साल के दौरान सरकार ने कई बड़े फैसले लिए और उन्हें लागू भी किया, जिसके कारण मंत्रियों का मुख्यमंत्री की शाबासी भी मिली. कुछ मंत्री सिर्फ मीडिया के जरिए ही वाहीवाही लूटते रहे, जबकि उनके विभागों में काम कुछ नहीं हुआ है. इसका फीडबैक सरकार को संगठन और कार्यकर्ताओं से लगातार मिल रहा है. फिलहाल लोकसभा की दो सीटों पर उपचुनाव के नतीजे आने के बाद मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकलें भी और ज्यादा तेज हो गयी हैं.

प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी सरकार के कार्यकाल का पहला साल 19 मार्च को पूरा हो रहा है. एक साल के कामकाज के मूल्यांकन के आधार पर मंत्रिपरिषद में फेरबदल तो संभावित था ही अब दोनों सीटों पर उपचुनाव में भाजपा को मिली पराजय के बाद इसे तय माना जा रहा है. बहरहाल भाजपा संगठन के भीतर ही बदलाव के लिए दबाव बढ़ने लगा है. संघ की तरफ से काफी पहले सरकार को आगाह किया जा चुका है. जबकि संगठन की तरफ से सरकार को मंत्रियों के बारे में लगातार जानकारी दी जा रही है. ऐसे मंत्रियों को निशाने पर लिया जा रहा है जिनके विभागों का जनता से सीधा जुड़ाव है. कुछ मंत्रियों के बारे में संगठन को लगातार फीडबैक मिल रहा है कि उनके विभाग की निष्क्रियता के कारण जनता में यह संदेश गया कि सरकार जनहित के मोर्चे पर संवेदनशील नहीं है. मंत्रियों से कार्यकर्ताओं की नाराजगी को भी पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने गंभीरता से लिया है. फेरबदल में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कुछ मंत्रियों का कद बढ़ाया जा सकता है तो खराब प्रदर्शन करने वाले कुछ मंत्रियों का कद घटाया जा सकता है. इसके अलावा जनता से सीधे जुड़े अहम विभागों की जिम्मेदारी अच्छा प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों को दिए जा सकते हैं. भाजपा की केंद्रीय टीम ने अच्छी छाप छोड़ने वाले प्रदेश के मंत्रियों को चिह्नित भी किया है. यह भी संभव है कि कुछ विभागों का विलय करके मंत्रियों को कद बढ़ाया जाए. ऐसे में शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, आवास, नगर विकास, लोक निर्माण विभाग व सिंचाई जैसे विभागों का आकार और बढ़ाया जा सकता है. पिछले दिनों लखनऊ में हुई इन्वेसटर्स सम्मिट में बेहतर काम करने वाले मंत्रियों का प्रमोशन होना तय है. सूत्रों के मुताबिक लखनऊ जिले की एक विधायक जो मंत्री भी हैं की जिम्मेदारी भी कम की जा सकती है, क्योंकि मंत्री अपने काम के बजाय मीडिया की सुर्खियां में ज्यादा रहती हैं.

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