कासगंज में भारी सुरक्षा बल की तैनाती के बीच शांति, कुछ ऐसा है नजारा

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कासगंज में भारी सुरक्षा बल की तैनाती के बीच शांति, कुछ ऐसा है नजारा

कासगंज: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कासगंज कस्बे में हुई हिंसा की घटना के एक सप्ताह बाद भी स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। इलाके में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और कल रात से अभी तक किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है. कासगंज के पुलिस अधीक्षक पीयूष श्रीवास्तव ने […]

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कासगंज: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कासगंज कस्बे में हुई हिंसा की घटना के एक सप्ताह बाद भी स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। इलाके में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और कल रात से अभी तक किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है. कासगंज के पुलिस अधीक्षक पीयूष श्रीवास्तव ने बताया कि कल रात से आज तक हिंसा की कोई नयी घटना नहीं हुई है. लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, कासगंज में 26 जनवरी को तिरंगा यात्रा के दौरान हुई हिंसा में मारे गये चंदन गुप्ता (22) की हत्या के मुख्य आरोपी सलीम को गिरफ्तार कर लिया गया है. उसने चंदन पर गोली चलाने की बात स्वीकार भी कर ली है.

सलीम के भाइयों नसीम और वसीम की तलाश की जा रही है। इस मामले में दर्ज प्राथमिकी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के अनुसार सलीम ने अपने घर की बालकनी या छत से गोलियां चलाई थीं. इस घटना में चंदन की मौत के बाद उग्र भीड़ ने कम से कम तीन दुकानों, दो बसों और एक कार को आग के हवाले कर दिया था. श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान में कासगंज में आरएएफ की चार कंपनियां, पीएसी की सात कंपनियां, आठ अपर पुलिस अधीक्षक, 14 क्षेत्राधिकारी, 25 थानाध्यक्ष, 100 सब इंस्पेक्टर और 500 कांस्टेबल अभी भी तैनात हैं. शहर के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गए हैं. इलाके में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. चंदन की हत्या के विरोध में मैनपुरी में हिंदू जागरण मंच ने कल तिरंगा यात्रा निकाल कर प्रदर्शन किया था और घटना की कड़े शब्दों में निंदा की थी.

उन्होंने चंदन को शहीद का दर्जा देने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा नहीं होने पर उनका संगठन आंदोलन करेगा. इस घटना के विरोध में कल शाहजहांपुर में निकाली जा रही ‘तिरंगा रैली’ में शामिल लोगों के बीच धन के विवाद को लेकर हुए पथराव से भगदड़ मच गयी. थाना प्रभारी रजी अहमद के अनुसार, तिलहर में बजरंग दल तथा हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ता तिरंगा रैली निकाल रहे थे. इसी दौरान दो पक्षों में धन विवाद को लेकर पथराव हो गया. घटना में कई लोग घायल हुए. पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सुभाष चंद्र शाक्य ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपियों बृजेश तथा गोविंद को गिरफ्तार कर लिया है। इलाके में अब पूरी तरह शांति कायम है. इस बीच, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कल उत्तर प्रदेश के कासगंज शहर में हुई साम्प्रदायिक हिंसा की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने का आदेश देने के आग्रह को नामंजूर कर दिया.

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन ने दिलीप कुमार श्रीवास्तव तथा अन्य की याचिकाओं का निपटारा करते हुए कल यह आदेश दिये. अदालत ने राज्य सरकार को कासगंज हिंसा में मारे गये युवक चंदन को शहीद का दर्जा देने और उसके परिजन को 50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश जारी करने से भी इनकार कर दिया. इधर, कल राज्य सरकार ने कासगंज हिंसा पर केन्द्र को रिपोर्ट भेज दी है. रिपोर्ट में इस वारदात और उसके बाद उठाये गये कदमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है.

राज्य सरकार ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय को बताया है कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं यह हिंसा पूर्व-नियोजित तो नहीं थी. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां ने कासगंज में हुई साम्प्रदायिक हिंसा का जिक्र करते हुए कल कहा था कि आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मुल्क के दंगे कराने की रणनीति तैयार की गयी है ताकि आम जनता की समस्याएं चुनावी मुद्दा ना बन सकें. समाजवादी पार्टी प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा था कि कासगंज सांप्रदायिक हिंसा मामले में किसी निर्दोष को फंसाया ना जाए, यह सरकार की जिम्मेदारी है.

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