एक नहीं, कई बार बदली उत्तर प्रदेश की पहचान, जानिए कैसे बदले नाम, राजधानी और नक्शा

सांकेतिक तस्वीर (उत्तर प्रदेश का इतिहास )
UP News: समय के साथ न सिर्फ इंसानों की, बल्कि जगहों की पहचान भी बदल जाती है. उत्तर प्रदेश का इतिहास ऐसा ही है, जिसने मुगल काल से लेकर आज तक कई रूप बदले हैं. जानिए कैसे बदला इसका नाम, राजधानी और नक्शा.
UP News: कहते हैं... समय के साथ सिर्फ इंसान ही नहीं, जगहों की पहचान भी बदल जाती है. उत्तर प्रदेश का इतिहास भी कुछ ऐसा ही है. आज जिस राज्य को देश का सबसे बड़ा और सबसे अहम राज्य माना जाता है, वह एक दिन में नहीं बना. इसके नाम बदले, सीमाएं बदलीं और कई बार राजधानी भी बदलनी पड़ी. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश का इतिहास बेहद दिलचस्प माना जाता है. इसकी कहानी मुगल काल से शुरू होकर अंग्रेजी शासन और फिर आजाद भारत तक पहुंचती है.
मुगल शासन में ऐसे बदला उत्तर प्रदेश का नक्शा और प्रशासन
मुगल काल में आज के उत्तर प्रदेश का इलाका कई छोटे-छोटे राज्यों और रियासतों में बंटा हुआ था. मुगल शासकों ने धीरे-धीरे इन इलाकों को अपने अधीन कर लिया और उन्हें अलग-अलग सूबों के रूप में चलाया. उस समय हर सूबे का अपना प्रशासन था... लेकिन सभी मुगल बादशाह के अधीन काम करते थे. कुछ समय के लिए फतेहपुर सीकरी सत्ता का बड़ा केंद्र बना. बाद में प्रयागराज का नाम बदलकर इलाहाबाद रखा गया और उसे भी शासन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया गया.
नवाबों के दौर में अवध का बढ़ा दबदबा, अयोध्या से फैजाबाद बनी सत्ता का केंद्र
समय बदला तो नवाबों का दौर आया. उस समय अवध क्षेत्र की अहमियत बढ़ी. पहले अयोध्या को शासकों का प्रमुख ठिकाना बनाया गया और बाद में फैजाबाद को राजधानी के रूप में विकसित किया गया. इस दौरान अवध की अलग पहचान बनी और प्रशासन का केंद्र भी बदल गया.
अंग्रेजों ने कई बार बदली राजधानी, बदलता रहा प्रांत का नाम
इसके बाद अंग्रेजों ने भारत में अपनी सत्ता मजबूत की. उन्होंने अपने हिसाब से राज्यों का नया ढांचा तैयार किया. आगरा और अवध को मिलाकर एक बड़ा प्रांत बनाया गया. शुरुआत में इलाहाबाद को राजधानी बनाया गया, लेकिन कुछ साल बाद 1834 राजधानी आगरा पहुंच गई और प्रांत का नाम उत्तर-पश्चिम प्रांत रखा गया. कुछ समय बाद फिर से इलाहाबाद को राजधानी बना दिया गया. कुछ साल बाद 1877 में प्रांत का नाम बदलकर संयुक्त प्रांत आगरा एवं अवध कर दिया गया.
1921 का ऐतिहासिक फैसला, जब लखनऊ बना सत्ता का नया केंद्र
आजादी की लड़ाई तेज होने लगी तो प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव किए गए. धीरे-धीरे इस बड़े प्रांत को सिर्फ संयुक्त प्रांत कहा जाने लगा. साल 1921 में एक बड़ा फैसला हुआ और राजधानी इलाहाबाद से हटाकर लखनऊ कर दी गई. इसके बाद लखनऊ ही प्रशासन और राजनीति का मुख्य केंद्र बन गया.
आजादी के बाद मिली नई पहचान, ऐसे बना 'उत्तर प्रदेश'
भारत आजाद होने के बाद 24 जनवरी 1950 को संयुक्त प्रांत का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश रखा गया. इसके साथ ही इस राज्य की नई पहचान बनी. कुछ साल बाद वर्ष 1957 में राज्यों के पुनर्गठन के दौरान इसकी सीमाओं और प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव किए गए. इसी वजह से आज का उत्तर प्रदेश पहले की तुलना में अलग स्वरूप में दिखाई देता है.
अलग उत्तराखंड की मांग क्यों उठी? जानिए आंदोलन की पूरी कहानी
हालांकि कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. राज्य के पहाड़ी इलाकों के लोगों को लंबे समय तक लगा कि उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है. सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर अलग राज्य की मांग धीरे-धीरे मजबूत होती गई. इसके लिए कई वर्षों तक आंदोलन चले. धरने हुए, हड़तालें हुईं और कई जगह प्रदर्शन भी हुए. कुछ स्थानों पर आंदोलन हिंसक हो गया और पुलिस के साथ टकराव की घटनाएं भी सामने आईं. इस दौरान कई लोगों की जान गई और कई घायल हुए. आंदोलन के दौरान महिलाओं के साथ बदसलूकी के आरोप भी लगे... जिससे पूरे देश में नाराजगी फैल गई.
साल 2000 में बदला इतिहास, उत्तराखंड बनने के बाद नए स्वरूप में आया उत्तर प्रदेश
लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार साल 2000 में उत्तर प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों को अलग कर नया राज्य उत्तराखंड बनाया गया. इसके बाद उत्तर प्रदेश अपने मौजूदा स्वरूप में सामने आया. आज यह राज्य सिर्फ अपनी आबादी के लिए ही नहीं...बल्कि अपने इतिहास, संस्कृति, राजनीति और विरासत के लिए भी पूरे देश में खास पहचान रखता है.
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