सपा सांसद अफजाल अंसारी की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, तीनों FIR पर सरकार से मांगा जवाब
सपा सांसद अफजाल अंसारी
UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी को शस्त्र लाइसेंस से जुड़े मामलों में बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज तीनों एफआईआर में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है. वहीं, राज्य सरकार से इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा गया है.
UP News: समाजवादी पार्टी के गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी को शस्त्र लाइसेंस से जुड़े मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज तीनों एफआइआर में गिरफ्तारी की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है. साथ ही अदालत ने राज्य सरकार से मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने की. अफजाल अंसारी की ओर से इन तीनों मामलों में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर एफआइआर रद्द करने की मांग की गयी थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए सरकार को दो सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया.
1983-87 की गायब पत्रावली पर उठे सवाल
अफजाल अंसारी के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि जिन शस्त्र लाइसेंस से संबंधित पत्रावलियों के गायब होने को लेकर एफआइआर दर्ज की गयी है, वे वर्ष 1983 से 1987 के बीच की हैं. जबकि इस मामले में एफआइआर 22 जुलाई 2026 को दर्ज हुई है. कोर्ट ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा है. सरकार के जवाब के बाद अफजाल अंसारी की ओर से एक सप्ताह के भीतर रिज्वाइंडर दाखिल किया जायेगा. अदालत ने तीनों याचिकाओं को करीब तीन सप्ताह बाद फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है. तब तक अफजाल अंसारी के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई पर अंतरिम रोक जारी रहेगी.
पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुई है एफआइआर
दरअसल, यूपी पुलिस ने मुख्तार अंसारी के गैंग से जुड़े लोगों को जारी शस्त्र लाइसेंसों की जांच शुरू की थी. जांच के दौरान गाजीपुर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से कुछ मूल पत्रावलियां और हथियारों की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज गायब मिले थे. इसके बाद पुलिस ने अफजाल अंसारी, मुख्तार अंसारी की पत्नी और तत्कालीन शस्त्र लिपिकों समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था.
एफआइआर रद्द करने पर अभी फैसला नहीं
हाईकोर्ट ने फिलहाल केवल अफजाल अंसारी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगायी है. तीनों एफआइआर को रद्द करने की मांग पर अदालत ने अभी अंतिम फैसला नहीं सुनाया है. यानी मामले की कानूनी लड़ाई अभी जारी रहेगी. अगली सुनवाई में सरकार का जवाब आने के बाद अदालत आगे की स्थिति तय करेगी.
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By Tilak Kumar
तिलक कुमार पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है. अमर उजाला, प्रभात खबर, जनसंदेश टाइम्स और राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में क्राइम रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं. अपराध, राजनीति और हाइपरलोकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. मैदानी रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और प्रभावशाली खबरों को पाठकों तक पहुंचाया है. जमीनी मुद्दों की गहरी समझ और तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग उनकी पहचान रही है. वर्तमान में वह प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़े हुए हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध तथा जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं.
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