रामपुर उपचुनाव: BJP प्रत्याशी घनश्याम लोधी तोड़ेंगे आजम का तिलिस्म, आखिर क्यों नतीजे से पहले चिंतित है SP

Rampur by election result: रामपुर लोकसभा क्षेत्र के उप चुनाव के लिए मतगणना 26 जून को होगी. इससे पहले सपा नेता मुहम्मद आजम खान और उनके विधायक बेटे अब्दुल्लाह आजम ने प्रशासन और पुलिस पर मतदाताओं को वोट न डालने देने के आरोप लगाए हैं, जिसके लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है. वहीं दूसरी ओर...
Bareilly News: रामपुर लोकसभा सीट के लिए 23 फरवरी को उपचुनाव हो गया है. मगर, यहां के चुनावी इतिहास में सबसे कम मतदान हुआ है. हालांकि, चुनावी मुकाबला काफी नजदीक का माना जा रहा है, जिसके चलते भाजपा की भी चिंता कायम है. रामपुर लोकसभा में 17,06,590 मतदाता हैं, लेकिन इनमें से 7 लाख से भी कम मतदाताओं ने मतदान किया है.
हालांकि, सपा नेता मुहम्मद आजम खान और उनके विधायक बेटे अब्दुल्लाह आजम ने प्रशासन और पुलिस पर मतदाताओं को वोट न डालने देने के आरोप लगाए हैं. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है. मगर, इसके बाद भी सपा को रामपुर के दलित और पिछड़ी जाति के मतदाताओं से जीत की उम्मीद है. सियासी जानकारों का मानना है सपा नेता आजम खां की दलित समाज में मजबूत पकड़ है.
इसके साथ ही बसपा का प्रत्याशी न होने से दलित समाज के मतदाताओं ने सपा के पक्ष में मतदान किया है. सपा ने यहां से रामपुर के नगर अध्यक्ष आसिम राजा को उतारा है, तो वहीं भाजपा ने सपा के पूर्व एमएलसी घनश्याम लोधी पर दांव लगाया है. भाजपा को मुस्लिम मतदाताओं के सहारे जीत की उम्मीद है. क्योंकि, रामपुर के नवाब खानदान के साथ ही कुछ मुस्लिम समाज के प्रमुख लोगों ने भाजपा को चुनाव लड़ाया है.
रामपुर के सियासी लोगों की मानें, तो भाजपा प्रत्याशी घनश्याम सिंह लोधी अपने गांव की प्रधानी का चुनाव भी हार गए थे. मगर, मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह की दोस्ती के सहारे 2006 में सपा से रामपुर-बरेली स्थानीय निकाय सीट से एमएलसी बने थे. इसके बाद 2015 में मुहम्मद आजम खान ने सपा सरकार में एमएलसी बनवाया था. वह मुहम्मद आजम खां के काफी करीबी हैं. मगर, इस बार भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं. रामपुर में उनकी पहचान पहले कल्याण सिंह, फिर मुहम्मद आजम खान से ही होती है.
रामपुर लोकसभा सीट मुस्लिम बाहुल्य सीट मानी जाती है. यहां 55 फीसद मुसलमान मतदाता हैं. मगर, मुस्लिम मतदाताओं के बंटवारे के सहारे 1977 में राजेंद्र कुमार शर्मा ने डीएलडी के टिकट पर जीत दर्ज की थी. उन्होंने कांग्रेस के जुल्फिकार अली खान को काफी अंतर से हराया था. इसके बाद 1991 में भाजपा के टिकट पर राजेंद्र कुमार शर्मा ने फिर कांग्रेस के जुल्फिकार अली खान को हराया. 2004 और 2009 में सपा के टिकट पर जयप्रदा नाहटा ने जीत दर्ज की.
उन्होंने दोनों बार कांग्रेस की बेगम नूरबानो और उर्फ मेहताब जमानी बेगम को हराया.इसके बाद 2014 में डॉक्टर नेपाल सिंह सपा प्रत्याशी एवं वर्तमान चमराऊआ के विधायक नसीर खां को हराया था.इस बार अगर घनश्याम सिंह लोधी जीतते हैं,तो वह हिंदू समाज के छठे सांसद होंगे.हालांकि, भाजपा ने रामपुर में 1991,1998 और 2014 में तीन बार जीत दर्ज की है.
रामपुर लोक सभा सीट पर 1951 में 48.22 फीसद मतदान हुआ था.1962 में 49,1967 में 67 फीसद सबसे अधिक मतदान हुआ था.1971 में ,65, 1977 में भी 67, 1980 में 55, 1984 में 66, 1989 में 54, 1991 में 57, 1996 में 58, 1998 में 62, 1999 में 62, 2004 में 57, 2009 में 53, 2014 में 59 और 2019 में 63.45 फीसद मतदान हुआ था.
रामपुर लोकसभा से पहले सांसद मौलाना अबुल कलाम आज़ाद चुने गए थे. वह देश के पहले शिक्षा मंत्री बने थे. 2019 के चुनाव में सपा नेता मुहम्मद आजम खान ने भाजपा की जयप्रदा को हराया था. 2019 में 1060921 वोट पड़े थे. इसमें आजम खां को 5,59,177, जबकि जयप्रदा नाहटा को 4,49,180 मत पड़े थे.
रिपोर्ट: मुहम्मद साजिद
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By Prabhat Khabar News Desk
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