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Varanasi: काशी विश्‍वनाथ मंदिर कॉरिडोर में बढ़े दर्शनार्थी तो सरकार ने सुरक्षा के लिए उठाया ये कदम

Updated at : 17 Jun 2022 3:30 PM (IST)
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Varanasi: काशी विश्‍वनाथ मंदिर कॉरिडोर में बढ़े दर्शनार्थी तो सरकार ने सुरक्षा के लिए उठाया ये कदम

ध्यान में रखते हुए रिकॉर्ड संख्या में दर्शनार्थियों के आमद से उनकी सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अग्नि सुरक्षा के अत्याधुनिक उपकरणों से धाम को लैस कर दिया है. आग लगने पर तत्काल अत्याधुनिक तकनीक के फायर फाइटर खुद ही आग को कंट्रोल करेंगे.

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Varanasi News: काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर निर्माण के बाद से ही पीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में नित्य नई सुविधाएं और दर्शनार्थियों के लिए सुगम नए-नए प्लेटफॉर्म सामने लाये जा रहे हैं. ऐसे में दर्शनार्थियों की बढ़ती संख्या भी मंद‍िर प्रशासन के साथ-साथ यूपी सरकार के लिए भी एक गंभीर विषय बन चुकी थी. इसको ध्यान में रखते हुए रिकॉर्ड संख्या में दर्शनार्थियों के आमद से उनकी सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अग्नि सुरक्षा के अत्याधुनिक उपकरणों से धाम को लैस कर दिया है. आग लगने पर तत्काल अत्याधुनिक तकनीक के फायर फाइटर खुद ही आग को कंट्रोल करेंगे. परिसर के किसी भी भवन में आग लगते ही उस पर मिनटों में काबू पाया जा सकता है.

कॉमर्श‍ियल एक्‍ट‍िव‍िटी होगी शुरू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट नव्य और भव्य श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर में शिव भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. श्री काशी विश्वनाथ धाम विस्तारीकरण व सौंदर्यीकरण के बाद कुल लगभग 50,280 वर्ग मीटर में फैल गया है. धाम में शिव भक्तो की तादाद रोजाना बढ़ती जा रही है. इसके साथ ही आने वाले समय में नवनिर्मित भवनों में व्यवसायिक गतिविधियां भी शुरू होंगी. मुमुक्षु भवन, गेस्ट हाउस, म्यूज‍ियम, लाइब्रेरी, जलपान गृह आदि का संचालन होगा. इसको देखते हुए अग्निशमन विभाग ने अग्नि सुरक्षा के सभी उपाय कर लिए हैं.

इलेक्ट्रिकल पंप भी खुद ही स्टार्ट होगा

मुख्‍य अग्निशमन अधिकारी अनिमेष सिंह ने बताया कि काशी विश्वनाथ धाम में मंदिर समेत सभी नवनिर्मित भवनों की सुरक्षा के लिए अग्निशमन विभाग ने अत्याधुनिक उपकरणों लगाए हैं. आग लगने पर तत्काल अत्याधुनिक तकनीक के फायर फइटर खुद ही आग को कंट्रोल करेंगे. उन्होंने बताया कि क़रीब 1,45,000 लीटर का वाटर टैंक मंदिर परिसर में है. अत्याधुनिक पंप लगे हैं. इसमें जॉकी पंप ऑटो मोड में रहता है. आग की भनक पाते ही ये स्वतः चालू हो जाता है. जरुरत पड़ने पर इलेक्ट्रिकल पंप भी खुद ही स्टार्ट हो जाता है जो अधिक प्रेशर से पानी देता है. यदि किसी कारणों से ये दोनों पंप आग लगने पर नहीं चल पाते तो तीसरा डीजल पंप खुद चालू हो जाता है.

परिसर में 96 फायर हाइड्रेंट लगे

इसके अलावा पूरे परिसर में 96 फायर हाइड्रेंट लगे हैं. इसमें एक्सटर्नल 41 और इंटरनल 55 फायर हाइड्रेंट, 494 स्मोक डिटेक्टर एवं 46 हीट डिटेक्टर लगे हैं. इसके अलावा अलग-तरह के करीब 224 फायर एक्सटिंग्विशर भी परिसर में लगे हैं. चीफ फायर ऑफ‍िसर ने बताया कि सुरक्षा के लिए लगे 162 सीसीटीवी कमरे से कंट्रोल रूम में निगरानी भी होती रहती है. साथ ही अग्निशमन कर्मचारी फायर पैनल पर भी नजर रखते हैं. इसे आग लगने वाली सही जगह की पहचान हो सके और आग पर तुरंत नियंत्रण किया जा सके. इसके अलावा विभाग के पास पोर्टेबल पंप है. इससे गंगा से सीधे पानी लिया जा सकता है.

रिपोर्ट : विप‍िन सिंह

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