Gyanvapi Dispute: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कल से गांव-गांव में जुटाएंगे शिवलिंंग की पूजा के लिए भक्त
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 16 Jun 2022 9:08 PM
7 दिन पूरे होने के बावजूद उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया. ऐसे में अब उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए स्वतंत्र हैं. इसके अलावा उन्होंने कहा कि हम आदि विश्वेश्वर की प्रतीक पूजा जारी रखेंगे और ये पूजा देश के 7 लाख गांव और साढ़े चार लाख मोहल्लों में प्रतिदिन की जायेगी. इसका शुभारम्भ शुक्रवार को होगा.
Varanasi News: जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गुरुवार को श्री विद्या मठ में पीसी की. उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी वाराणसी को हमने सुप्रीम कोर्ट के आदेश ड्यूली प्रोटेक्ट की अवहेलना पर जवाब लीगल नोटिस भेजकर मांगा था. आज 7 दिन पूरे होने के बावजूद उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया. ऐसे में अब उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए स्वतंत्र हैं. इसके अलावा उन्होंने कहा कि हम आदि विश्वेश्वर की प्रतीक पूजा जारी रखेंगे और ये पूजा देश के 7 लाख गांव और साढ़े चार लाख मोहल्लों में प्रतिदिन की जायेगी. इसका शुभारम्भ शुक्रवार को होगा.
उन्होंने कहा कि कार्यपालिका इतनी निरंकुश हो गयी है कि जो चाहे वो कर लेती हैं. जहां मनमानी की जरूरत पड़ती है, वहां कानून का हवाला दे देती हैं. ये परिस्थिति केवल ज्ञानवपी प्रकरण में ही नहीं अपितु अन्य सन्दर्भ में भी है. अब हमने ये निश्चय किया है कि जो जरूरी कार्यवाही होगी जिलाधिकारी वाराणासी के ऊपर करेंगे. अभी तक हमने नोटिस को लेकर प्रतीक्षा की. इसके बीच में हमने कुछ भी नहीं कहा, अब इसके बाद की जो भी कार्यवाही बनती है उसे करने में हम आज से स्वतंत्र होते हैं. दूसरी बात ये है कि ज्ञानवापी प्रकरण में जो प्रतीक पूजा है उसे हम करेंगे. इसके लिए भारत के 7 लाख गांवों के साढ़े चार लाख मुहल्लों को केंद्र में रखकर एक दिन में एक गांव से पुजा सुनिश्चित करेंगे. हमारे कार्यकर्ता गावों में जाएंगे और विश्वेश्वर की पूजा के लिए गांव के लोगों को इकठ्ठा करेंगे.
मीडिया के माध्यम से वाराणासी जिलाधिकारी के प्रति यह खबर चलाई गयी कि डीएम तो बड़े न्यायप्रिय हैं लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हठी हैं. वे कोर्ट के आदेश को कुछ समझते ही नहीं है. ऐसी धारणा पुरे विश्व में बना दी गई है. ये सब करने से मीडिया की विश्वसनीयता खंडित हो रही है. मजाक बन रहा है. सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि दोनों पक्षों को सुनें और शिवलिंग को ड्यूली प्रोटेक्ट करें.
4 जून को ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की पूजा करने जा रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पुलिस ने उनके मठ में ही रोक दिया था. इसके बाद उन्होंने मठ में 108 घंटे का अन्न-जल त्याग कर उपवास किया और फिर शंकराचार्य के आदेश पर उसे तोड़कर आदि विश्वेश्वर की प्रतीक पूजा की. इसके बाद ही उन्होंने जिलाधिकारी वाराणसी को लीगल नोटिस भेजा था. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि हमारे यहां धर्मशास्त्र कहता है कि यदि हम किसी धर्म कार्य में लगे हुए हैं और हमारे गुरु हमें बुला लेते हैं तो वह अधूरा छूट जाता है पर उसे पूरा ही माना जाता है. उन्होंने कहा कि अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि जिस वाराणसी के जिला प्रशासन द्वारा न्यायालय का हवाला देकर हमें मठ में रोक दिया तो हमने अध्ययन किया तो पाया कि सर्वे में जब शिवलिंग की आकृति प्रतीत हुई तो वादी पक्ष ने कोर्ट में एक याचिका डाली की यहां शिवलिंग है उसे सील कर दिया जाए.
रिपोर्ट : विपिन सिंह
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