Mulayam Singh Yadav Death: सुभाष चंद्र बोस के अलावा सिर्फ मुलायम सिंह यादव कहलाये 'नेता जी'

राजनीतिक विश्लेष्क ओपी यादव बताते हैं कि मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav Death) ने अयोध्या मुद्दे पर धर्म निरपेक्षता, किसानों के कर्जा माफी मुद्दे पर किसान सरोकार, मंडल मुद्दे पर सामजिक न्याय के एजेंडे पर देश ही नहीं पूरे विश्व में मिसाल कायम की. डॉ. राम
Mulayam Singh Yadav Neta ji: सुभाष चंद्र बोस के बाद भारतीय राजनीति में “नेता जी” का उद्भोधन प्राप्त करने वाली दूसरी शख्सियत “मुलायम सिंह यादव” (Mulayam Singh Yadav) थे. सामान्य किसान परिवार में जन्मे मुलायम सिंह यादव शुरुआती जीवन में शिक्षक रहे. इसीलिये किसान सरोकार, सामाजिक न्याय, धर्म निरपेक्षता के झंडा बरदार के रूप में उत्तर भारत ही नहीं पूरे देश की राजनीति को प्रभावित करने वाला है.
राजनीतिक विश्लेष्क ओपी यादव के अनुसार मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav Death) ने अयोध्या मुद्दे पर धर्म निरपेक्षता, किसानों के कर्जा माफी मुद्दे पर किसान सरोकार, मंडल मुद्दे पर सामजिक न्याय के एजेंडे पर देश ही नहीं पूरे विश्व में मिसाल कायम की. डॉ. राम मनोहर लोहिया और चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक नर्सरी से निकल कर व चौधरी नत्थू सिंह जी की बांह पकड़कर 1967 में सबसे कम उम्र के विधायक बनने का उन्होंने रिकॉर्ड बनाया.
1977 में खुद चौधरी चरण सिंह ने कहा था , कि “सहकारिता मंत्री के रूप में अच्छे कामों की रिपोर्ट मेरे पास है. जनता पार्टी की सरकार गिर जाने के बाद उत्तर प्रदेश की विपक्षी राजनीति के एक तरह से शून्यावकाश आ गया था. तब मुलायम सिंह यादव ने क्रांति रथ निकल कर पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया.
1989 में तमाम आरोह-अवरोह के बाद चौधरी अजीत सिंह, चौधरी राजेंद्र सिंह, चौधरी रेवती रमण सिंह, सत्य पाल सिंह यादव, प्रो. कैलाश नाथ सिंह यादव जैसे दिग्गजों को पछाड़ मारते हुए किसान नेता मुलायम सिंह यादव ने जनता दल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. ये कार्यकाल किसान सरोकार और धर्म निरपेक्षता के प्रति उनके स्टैंड के लिए याद किया जाएगा.
अयोध्या गोली कांड के बाद जहां राजनीतिक विश्लेषक मुलायम सिंह यादव को फ्यूज बल्ब बता रहे थे और भारतीय ज्योतिष सत्ता में कभी न लौटने की भविष्यवाणी कर रहे थे. उन्हें मुल्ला मुलायम भी कहा जाने लगा था. लेकिन कर्म योद्धा मुलायम सिंह ने कांशीराम से दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए सपा-बसपा गठबंधन की नींव डाली.
1991 की विधान सभा के दलगत आंकड़े बताते हैं कि पूर्ण बहुमत की भाजपा की कल्याण सिंह की सरकार, 112 से अधिक विधायकों वाला जनता दल का विपक्ष, मात्र 32 विधायकों वाली सजपा थी. ऐसे समय में मुलायम सिंह यादव ने सजपा से अलग होकर समाजवादी पार्टी बनाने का फैसला किया था. इसके बाद अपने परंपरागत क्षेत्र इटावा से कांशीराम को लोकसभा पहुंचाया
1993 में सपा बसपा के गठबंधन ने भाजपा के रथ को उत्तर प्रदेश में रोक दिया था. मुलायम सिंह यादव का दूसरा कार्यकाल सत्ता के विकेंद्रीयकरण और ग्रामीण सत्ता की पृष्ठभूमि में आरक्षण के लिए जाना जाएगा. ओपी यादव बताते हैं कि मुझे याद है मीडिया के एक बड़े समूह को इंटरव्यू देते हुए मुलायम सिंह यादव ने कहा था मेरे राज्य में उत्तर प्रदेश ने अगर “आर्थिक क्रांति नहीं की है तो सामाजिक क्रांति जरूर की है” मैंने उत्तर प्रदेश में सत्ता और समृद्धि के केंद्रो का स्थान परिवर्तन किया है.
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