लॉकडाउन: श्रमिक सहित हार्वेस्टर, कंबाइन, थ्रेसर का उपयोग करने के लिये मिली छूट

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लॉकडाउन: श्रमिक सहित हार्वेस्टर, कंबाइन, थ्रेसर का उपयोग करने के लिये मिली छूट

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आदेश जारी कर कृषि सेवा, कृषि उत्पाद, कृषि यंत्र और उनके परिचालन व प्रयोग को लॉकडाउन की परिधि से बाहर कर दिया गया है

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बलिया. उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में गेहूं, सरसों, मंसूर, मटर की कटाई और थ्रेसिंग को लेकर किसानों को खेतिहर श्रमिकों में उत्पन्न हो रही उहापोह की स्थिति को प्रशासन ने समाप्त कर दिया है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आदेश जारी कर कृषि सेवा, कृषि उत्पाद, कृषि यंत्र और उनके परिचालन व प्रयोग को लॉकडाउन की परिधि से बाहर कर दिया गया है. अब किसान बिना डर-भय के अपने खेतों का कार्य कर सकते हैं. उन्हें पुलिस परेशान नहीं करेगी, बल्कि सहयोग करेगी. साथ ही जायद की बुआई के मद्देनजर उर्वरक और बीज की दुकानों को भी नियमानुसार खोलने की अनुमति दी जाएगी. रबी की तैयार फसल की कटाई को लेकर पिछले कई दिनों से किसानों और मजदूरों में संशय की स्थिति थी. लॉकडाउन के कारण कहीं किसान तो कहीं मजदूर खेतों में जाने से परहेज कर रहे थे.

वे अब बिना डर-भय के खेतों में जाकर गेहूं की कटाई कर सकेंगे. शासनादेश में हार्वेस्टर, थ्रेसर और अन्य कृषि यंत्रों के उत्पाद, क्रय, परिचलान और उपयोग श्रमिकों सहित लॉकडाउन परिधि से बाहर किए जाने के साथ ही साथ कृषि रक्षा के लिये खाद, बीज, कीटनाशक आदि की बिक्री भी निर्वाध रूप से हो इसके लिए शासन ने आदेश जारी किया है. अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने सभी मंडलायुक्त, पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक को निर्देशित करते हुए कहा है कि उर्वरक बीज एवं कृषि रक्षा रसायनों के बिक्री केंद्र थोक व फुटकर,पूर्व की भांति खुलेगा तथा निर्माण एवं आपूर्ति सड़क और रेल मार्ग से होगा. रेलवे रैक द्वारा उर्वरक की आपूर्ति लोडिंग तथा अनलोडिंग में प्रयुक्त श्रमिक लॉकडाउन से मुक्त होंगे. रबी की फसलों की कटाई में प्रयुक्त होने वाले कंबाइन, हार्वेस्टर तथा कृषि क्षेत्र में प्रयुक्त श्रमिक भी लॉकडाउन की परिधि से बाहर होंगे. बीज विधायन संयत्रों के संचालन एवं कार्य में प्रयुक्त होने वाले श्रमिकों को भी लॉकडाउन अवधि में छूट प्रदान करने का शासनादेश जारी किया गया है. अपर मुख्य सचिव ने कहा कि उक्त सभी बिंदुओं को शासनदेश में शामिल किया जाए.

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शशिकांत ओझा

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By शशिकांत ओझा

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