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Kashi Vishwanath Dham: लोकार्पण का एक वर्ष आज पूरा, भक्तों ने 100 करोड़ के चढ़ावे का बनाया रिकार्ड...

Updated at : 13 Dec 2022 8:50 PM (IST)
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Kashi Vishwanath Dham: लोकार्पण का एक वर्ष आज पूरा, भक्तों ने 100 करोड़ के चढ़ावे का बनाया रिकार्ड...

पिछले एक साल में देश-दुनिया से श्रीकाशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए आये श्रद्धालुओं ने दिल खोलकर बाबा के दरबार में नकदी, सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं को समर्पित किया है. मंदिर प्रशासन के अनुसार चढ़ावे का कुल मूल्य 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है.

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Lucknow: काशी विश्‍वनाथ धाम के लोकार्पण का एक साल पूरा होने के मौके पर आज जहां भव्‍य उत्‍सव का आयोजन किया जा रहा है, वहीं इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं. इस बीच काशी विश्वनाथ धाम में चढ़ावे का रिकॉर्ड बन गया है.

श्रद्धालुओं को मन मोह लिया धाम की भव्य सजावट ने

काशी विश्वनाथ धाम की पहली वर्षगांठ पर मंगलवार को उत्सव का माहौल रहा. धाम की भव्य सजावट ने जहां श्रद्धालुओं को मन मोह लिया, वहीं सुगंधित पुष्पों की महक पूरे परिसर में व्याप्त रही. धाम में सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन पूजन किया गया. बाद में मैदागिन चौराहे से भव्य शोभायात्रा निकाली गई. शोभायात्रा को शहर दक्षिणी के विधायक और प्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.

शोभायात्रा के स्वागत में उमड़ी काशी
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मैदागिन से निकली शोभा यात्रा दशाश्वमेध डेढ़सी पुल तक गईं. शोभा यात्रा में मिनी भारत का नजारा दिखा. काशी के साहित्यकार, वकील, चिकित्सकों के साथ आसाम, सोनभद्र, बुंदेलखंड के लोक कलाकार भी इस यात्रा में शामिल हुए. शोभा यात्रा में लोगों को बरबस ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के वनवास वापसी जैसा महसूस हो रहा था. शोभायात्रा के स्वागत में लगा पूरी काशी ही उमड़ी. बरात में शिव के अघोरी स्वरूप, दैत्य, भूत ,पिशाच, सभी देवी देवताओं के प्रतीक शामिल रहे. पूरी राह असम, सोनभद्र, वृंदावन, पूर्वांचल का पारम्परिक नृत्य, बनारस का मशाने की होली, लड़कियों का डांडिया नृत्य, काली के नौ स्वरूपों का नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा.

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ऑनलाइन माध्यम से भी चढ़ावा समर्पित

पिछले एक साल में देश-दुनिया से श्रीकाशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए आये श्रद्धालुओं ने दिल खोलकर बाबा के दरबार में नकदी, सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं को समर्पित किया है. मंदिर प्रशासन के अनुसार चढ़ावे का कुल मूल्य 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है. इससे पहले कभी इतनी अधिक मात्रा में चढ़ावा नहीं आया. भक्तों ने नकदी से लेकर ऑनलाइन माध्यम से भी चढ़ावा अपने आराध्य को समर्पित किया है.

50 करोड़ से अधिक की नकदी का दान

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि धाम के लोकार्पण से अब तक श्रद्धालुओं द्वारा लगभग 50 करोड़ से अधिक की नकदी दान की गयी है. इसमें से 40 फीसदी राशि ऑनलाइन सुविधाओं के उपयोग से प्राप्त हुई है. वहीं श्रद्धालुओं द्वारा लगभग 50 करोड़ से अधिक की बहुमूल्य धातु भी है. इनमें 60 किलोग्राम सोना, 10 किलोग्राम चांदी और 1500 किलोग्राम तांबा है. भक्तों द्वारा दिये गये सोना व तांबे का प्रयोग करके गर्भगृह की बाहरी एवं आंतरिक दीवारों को स्वर्ण मंडित किया गया है.

लोकार्पण के बाद 7.35 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने किये दर्शन

13 दिसम्बर, 2021 से लेकर अब तक श्रद्धालुओं द्वारा 100 करोड़ रुपये से अधिक का अर्पण किया गया है, जो मंदिर के इतिहास में सर्वाधिक है. साथ ही पिछले साल की तुलना में इस बार चढ़ावा लगभग 500 फीसदी से ज्यादा है. सुनील कुमार वर्मा के मुताबिक लोकार्पण के बाद से लेकर अब तक मंदिर में 7.35 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किया है. धाम परिसर के चारों द्वार पर लगे हेड स्कैनिंग मशीन के जरिए नियमित अंतराल पर श्रद्धालुओं की गिनती की जाती है.

कॉरिडोर के निर्माण में 900 करोड़ हुए थे खर्च

मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण और मुआवजा में तकरीबन 900 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. आने वाले समय में धाम में सुविधाओं के विस्तार से भक्तों की संख्या बढ़ना निश्चित है, जिससे शिवभक्तों की ओर से चढ़वा भी बढ़ेगा. उन्होंने बताया कि चढ़ावे के अलावा कॉरिडोर में बने भवनों से भी अतिरिक्त आय होगी. माना जा रहा है कि कॉरिडोर की लगात अगले 4 से 5 साल में भक्तों के चढ़ावे और परिसर में नवनिर्मित भवनों से होने वाली आय से पूरी कर ली जाएगी.

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श्री काशी विश्वनाथ धाम का नव्य भव्य स्वरूप होने के कारण वाराणसी में टूरिस्ट व दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ी है. इसकी वजह से परिवहन, होटल, गेस्ट हाउस, नाविकों, श्रमिकों, वस्त्र उद्योग, हेंडीक्राफ्ट व अन्य व्यवसाय से जुड़े रोजगार बढ़े हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ ने बीते दिनों इसकी पुष्टि करते हुए कहा था कि पहले एक साल में काशी में एक करोड़ पर्यटक आते थे, अब एक महीने में ही इतने पर्यटक वाराणसी आ रहे हैं.

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