Gyanvapi News: शिवलिंग की पूजा की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए कोर्ट तैयार, मुस्लिम पक्ष को झटका
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 17 Nov 2022 9:57 PM
**EDS: SCREENGRAB FROM TWITTER VIDEO VIA @INCIndia** Akola: Congress leader Rahul Gandhi addresses a press conference during the party's 'Bharat Jodo Yatra', in Akola district, Thursday, Nov. 17, 2022. (PTI Photo)(PTI11_17_2022_000096B)
कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज कर दी. फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने किरन सिंह की ओर से दाखिल वाद को सुनवाई योग्य माना. हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं ने दलीलें रखी थी कि संपत्ति के अधिकार के तहत देवता को अपनी जायदाद पाने का मौलिक अधिकार है.
वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट में गुरुवार को ज्ञानवापी केस में सुनवाई हुई. जिसमें मुस्लिम पक्ष को तगड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने परिसर में मुस्लिमों के प्रवेश पर पाबंदी और वजू खाने में मिले शिवलिंग की पूजा की अनुमति वाली याचिका को सुनवाई के योग्य माना. अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को करेगी.
कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की आपत्ति को खारिज किया
कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज कर दी. फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने किरन सिंह की ओर से दाखिल वाद को सुनवाई योग्य माना. हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं ने दलीलें रखी थी कि संपत्ति के अधिकार के तहत देवता को अपनी जायदाद पाने का मौलिक अधिकार है. इस पर कोर्ट ने यह कहते हुए मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज कर दी कि इस मामले में पूजा स्थल अधिनियम 1991 लागू नहीं होता है और ऐसे में यह सुनवाई योग्य है.
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किरन सिंह ने ज्ञानवापी में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक और पूजा की अनुमति मांगी थी
गौरतलब है कि इस मामले में वादी किरन सिंह की तरफ से ज्ञानवापी परिसर में मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित करने, परिसर को हिंदुओं को सौंपने और कथित शिवलिंग के पूजा-पाठ एवं भोग की अनुमति मांगी गई थी.
मुस्लिम पक्ष ने सुनवाई न करने की लगायी थी गुहार
मुस्लिम पक्ष यानी अंजुमन इंतजामिया ने कहा था कि यह मामला उपासना स्थल अधिनियम 1991 के तहत आता है लिहाजा इस पर सुनवाई न की जाए.
क्या है ज्ञानवापी शृंगार गौरी परिसर का मामला
गौरतलब है कि सिविल जज सीनियर डिविजन की अदालत के आदेश पर ज्ञानवापी शृंगार गौरी परिसर के वीडियोग्राफी सर्वे में मई में ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने से एक आकृति बरामद हुई थी. हिंदू पक्ष का दावा है कि यह शिवलिंग है जबकि मुस्लिम पक्ष ने उसे फव्वारा बताते हुए कहा था कि मुगलकालीन इमारतों में ऐसे फव्वारे मिलना आम बात है. हिंदू पक्ष ने दावा किया है कि वह आदि विश्वेश्वर का विग्रह है लिहाजा ज्ञानवापी परिसर में मुसलमानों का प्रवेश बंद किया जाए और उस जगह को हिंदुओं को सौंपा जाए.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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