विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत का बड़ा ऐलान, ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग के पूजन के लिए करेंगे कारसेवा
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 05 Jun 2022 8:07 PM
Gyanvapi Case: विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होने कहा है कि वह ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग के पूजन के लिए 15 जून के बाद शिव कारसेवा करेंगे.
Varanasi News: काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महन्त डॉ कुलपति तिवारी ने कारसेवा का आह्वान किया है. 15 जून के बाद अस्सी से लेकर वरुणा तक डमरू दल, शनिवार को और शिव भक्तों के साथ नाव पर कारसेवा की शुरुआत की जाएगी. उन्होंने कहा कि, ललिता घाट पर पहुंचने के बाद जल लेकर आदि विश्वेश्वर मंदिर पर चढ़ाकर विधि विधान से उनकी पूजा करेंगे.
काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ कुलपति तिवारी ने कहा कि, ‘मैं देख रहा हूं कि मुस्लिम समुदाय अपने पूर्वजों की तरह आक्रांता होता चला जा रहा है. न्यायालय में मामला अभी विचाराधीन हैं. मगर मुस्लिम इस बात से खुश हैं कि हिन्दू पक्ष को तारीख पे तारीख मिल रही है, और प्राप्त शिवलिंग की पूजा अर्चना करने से रोका गया है.’
उन्होंने आगे कहा कि, ‘मुझे और पूरे हिन्दू और संत समाज को अच्छे से पता है कि ज्ञानवापी मस्जिद में आदि विशेश्वर नाथ समेत श्रृंगार गौरी और क़ई देवी देवता हैं, जिनके पूजा अधिकार से हमें वंचित नहीं रखा जा सकता है. इसके लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी प्रशासन से गुहार लगाई है, जिसके बाद उन्हें पूजा अर्चना करने से रोका गया है. उन्होंने न्यायालय में इससे सम्बंधित प्रार्थना पत्र भी दिया है.
पूर्व महंत डॉ कुलपति तिवारी ने आगे कहा कि, मैंने भी कोर्ट में याचिका दी है कि, मैं अभी कुछ व्यक्तिगत कार्य से कोलकाता जा रहा हूं. जहां से मैं 15 दिन बाद वापस लौट कर आऊंगा, जिसके बाद वरुणा से लेकर अस्सी तक ऐसी शोभायात्रा निकालूंगा जिसमे शहनाई, डमरू के साथ महादेव के भक्तगण होंगे. इस शोभायात्रा का नाम कारसेवा रखूंगा. इसके लिए मीडियाकर्मियों को भी सूचित किया जाएगा. यह शोभायात्रा नाव द्वारा निकलेगी. नाव पर महादेव का भजन और शिव चालीसा महिलाएं पढ़ती रहेंगी.
उन्होंने आगे कहा कि, यह नाव ललिता घाट पर जाकर रुकेगी. जहां आदि विश्वेश्वर नाथ को जल चढ़ाऊंगा. वापस राजघाट जाऊंगा और वहां से फिर अपने घर के लिए प्रस्थान करूंगा. इस कारसेवा यात्रा की तुलना अयोध्या आंदोलन के कारसेवकों से नहीं की जानी चाहिए. वह एक जागृत आंदोलन था. ज्ञानवपी परिसर भगवान अदि विश्वेशर नाथ का है. यह एक ज्ञानतीर्थ है. यहां न्यायपालिका का नहीं बल्कि शिव का संविधान चलता है. इसलिए न्यायालय नहीं भी परमिशन देगी तो भी हम यहीं से बैठकर अदिविश्वेशर नाथ की पूजा करेंगे.
रिपोर्ट- विपिन सिंह
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